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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत !!!

June 22, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, किसी विशेष कार्य में आपको जीत मिले या हार, इससे तब तक कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है जब तक आप उसे मानसिक रूप में स्वीकार ना लें। इसीलिए कहा जाता है, ‘मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।’ जी हाँ, साधारण सी लगने वाली इस बात में सुखी और सफल जीवन का एक बहुत ही बड़ा सूत्र छिपा हुआ है। अपनी बात को मैं आपको एक सच्चे किस्से से समझाने का प्रयास करता हूँ, जो इस विषय में आपकी सोच बदल सकता है।


अमेरिका के मिल्वौकी, विस्कॉन्सिन में जन्में क्रिस हमेशा खुश, शांत और सफल जीवन जीने की चाह रखते थे क्योंकि उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत बड़ी विपरीत परिस्थितियों के साथ करी थी। उनके सौतेले पिता हमेशा उनकी बहन और माँ को प्रताड़ित किया करते थे। जिसके कारण क्रिस और उनकी बहन हमेशा डरी-डरी रहा करती थी। 8 वर्ष की आयु में पिता द्वारा अपराध किए जाने पर क्रिस और उनकी बहन को बच्चों के शेल्टर होम में रहना पड़ा था।


हालाँकि उनकी माँ अपनी शादी से बहुत दुखी और परेशान थी लेकिन इसके बाद भी वे अपने बेटे क्रिस के लिए प्रेरणा और शक्ति का एक सकारात्मक स्रोत थी। उन्होंने हमेशा क्रिस को खुद पर विश्वास रखने के लिए प्रेरित किया और आत्मनिर्भरता के फ़ायदे बताए इसी कि बदौलत कई परेशानियों, विपरीत पारिवारिक स्थितियों और सामयिक ज़रूरतों के आगे कभी झुकते, तो कभी लड़ते हुए क्रिस अपने जीवन में आगे बढ़े और शिक्षा पूर्ण कर अपना कैरियर एक साधारण सेल्समैन के रूप में शुरू किया जो बोन डेंसिटी स्कैनर बेचा करता था।

ख़ुशी की तलाश में क्रिस ने एक दिन स्टॉक ब्रोकर बनने का निर्णय लिया और अपनी पत्नी को बताया। क्रिस का निर्णय सुनते ही उनकी पत्नी की पहली प्रतिक्रिया थी, ‘शायद तुम्हारा दिमाग़ ख़राब हो गया है जो स्टॉक ब्रोकर बनने के विषय में सोच रहे हो।’ हालाँकि पत्नी की इस प्रतिक्रिया का असर उनपर बहुत ज़्यादा नहीं पड़ा। तनाव पूर्ण वैवाहिक सम्बन्धों के कारण पत्नी के छोड़ कर चले जाने के बाद क्रिस, एक बार फिर बेघर हो गए। इसके पश्चात उन्होंने अपने बेटे के साथ स्टेशन, ट्रेन और मिशनरी छात्रावास में रहते हुए एक बार फिर संघर्ष शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी बचत से मात्र 10000 डॉलर का निवेश कर ‘गार्डनर रिच एंड कंपनी’ की शुरुआत करी।


आने वाले कुछ सालों में कम्पनी ने बहुत अच्छा कार्य करा और क्रिस ने अपनी छोटी सी हिस्सेदारी को कई मिलियन डॉलर में बेच दिया। इसके पश्चात क्रिस ने अपने सपनों की स्टॉक बरोकिंग कम्पनी ‘क्रिस्टोफर गार्डनर इंटरनेशनल होल्डिंग’ की स्थापना करी और हमेशा खुश, शांत और सफल होने के अपने सपने को पूरा किया। आज क्रिस एक सफल व्यवसायी और विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर हैं।


दोस्तों, अगर आप उनके जीवन को पलटकर देखेंगे तो पाएँगे कि खुश, शांत और सफल रहने की अदम्य इच्छाशक्ति के अलावा कुछ भी उनके फ़ेवर में नहीं था। वे अपने जीवन में भावनात्मक, व्यवसायिक, वित्तीय और रिश्तों के स्तर पर कई बार असफल हुए लेकिन हर बार पहले से ज़्यादा मज़बूत होकर उभरे और अंततः वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाकर सफल हुए। उनके सफल होने की मुख्य वजह मानसिक तौर पर हार ना मानना था। उन्हें पता था कि जिसका मन हार जाता है फिर चाहे दुनिया के कितने भी साधन और शक्ति उसके पास क्यों न हो वह ज़रूर पराजित होता है और इसके विपरीत जिसका मनोबल बढ़ा हुआ रहता है वह एक ना एक दिन अवश्य सफल हो जाता है। इसीलिए दोस्तों मेरा मानना है कि इंसान की वास्तविक ताकत, उसका स्वयं का आत्मबल है। इसलिए साथियों स्थिति कितनी भी विपरीत क्यों ना हो मन से कभी हार मत मानना। देखना आपके मनोबल के कारण जल्द ही आप अपने सपनों को हक़ीक़त में बदल कर खुश, शांत, संतुष्ट और सफल होंगे।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर


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