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मनःस्थिति बदलें और मनचाहा जीवन पाएँ !!!

Writer: Nirmal Bhatnagar
Nirmal Bhatnagar
Aug 12
2 min read

Updated: Aug 13

Aug 12, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, इस दुनिया में सामान्यतः हर अधूरा सपना, एक ही शिकायत करता है, “मौका नहीं मिला…” या कोई कहता है, “घर की परिस्थितियाँ ठीक नहीं थी…”, तो कोई कहता है, “पैसे नहीं थे…” या फिर कोई कहता है, “अच्छी शिक्षा नहीं मिली…”, या यह भी कहा जाता है, “बाक़ी सब तो ठीक था बस अपने लोग साथ नहीं थे…”


लेकिन दोस्तों, ज़रा इतिहास उठाकर देखिए, इस दुनिया में जिसने भी कुछ बड़ा किया है, उसने पहले अपनी परिस्थितियाँ नहीं, अपनी मनःस्थिति को बदला है। जी हाँ दोस्तों, ‘परिस्थितियाँ…’, तो हमेशा बदलती रहती हैं। जीवन कभी धूप, तो कभी छाँव में चलता है… कभी हम जीतते हैं, तो कभी हमारा सामना हार से होता है। इन सभी स्थितियों में परिणाम नहीं हमारी मनःस्थिति तय करती है कि हम टूटेंगे या तराशे जाएँगे।


सहमत ना हों तो जरा इतिहास के पन्ने पलट कर देख लीजिए, अगर परिस्थितियाँ ही सफलता तय करती, तो नदी तैरकर पार करने के बाद १० किलोमीटर पैदल चलके स्कूल जाने वाला लड़का, देश का प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, कभी नहीं बनता। अगर ग़रीबी ही सपनों की दुश्मन होती, तो मंदिर से मिले प्रसाद को खाकर भूख मिटाने वाला बच्चा, जिसने अपनी आवश्यकता पूर्ति के लिए अख़बार बेचा, वो कभी राष्ट्रपति डॉ कलाम कभी नहीं बनता। इसी तरह लोगों की राय, किसी को मंज़िल पाने से रोक सकती, तो “तुम रेडियो के लायक नहीं हो…” सुनने वाली आवाज़ कभी करोड़ों दिलों की धड़कन नहीं बनती और अमिताभ बच्चन 83 वर्ष की आयु में भी सुपर स्टार नहीं कहलाते। इसी तरह अगर मुश्किलें मंज़िल पहुँचने से रोक सकती, तो एक्सीडेंट में एक पैर खो देने वाली बेटी अरुणिमा सिन्हा, कभी एवरेस्ट पर तिरंगा नहीं फहराती।


दोस्तों, सपनों के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट, हालात नहीं होते, हमारे बहाने होते हैं और सबसे बड़ी ताक़त संसाधन नहीं होते, हमारा निर्णय होता है। इसलिए दोस्तों, अगर अपने सपने सच करना चाहते हो, तो परिस्थितियों को दोष देना छोड़ दीजिए और इसी क्षण अपनी मनःस्थिति बदलिए। क्योंकि जिस दिन सोच बदलती है, उसी दिन जीवन की दिशा बदलती है और जिस दिन दिशा बदलती है, उसी दिन से दशा बदलने लगती है और सीधे शब्दों में कहूँ तो तक़दीर अपना रास्ता बदल देती है।


इसलिए दोस्तों, जीवन को बदलना चाहते हो, तो आज एक फैसला लीजिए और तय कर लीजिए कि आज से मैं परिस्थितियाँ नहीं, अपनी मनःस्थिति बदलूँगा क्योंकि “ज़िंदगी” का सबसे बड़ा चमत्कार तब होता है, जब इंसान हालात बदलने की ज़िद छोड़कर, खुद को बदलने का फैसला कर लेता है और वहीं से शुरू होती है हमारे जीवन की मनचाही सफलता। इसीलिए तो हमेशा कहता हूँ दोस्तों, “चुनौतियाँ कितनी भी क्यों ना हों, ‘ज़िंदगी’ तो फिर भी हसीन है!"


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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