मित्र बनाते हैं जीवन को सुंदर…
- Nirmal Bhatnagar

- Sep 14, 2025
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Sep 14, 2025
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, जीवन के उतार-चढ़ाव के दौर के बीच अगर किसी से स्थाई साथ और संबल मिला था, तो वे सभी मेरे प्यारे दोस्त ही थे।चुनौती भरे दौर में उनका साथ; उनकी मौजूदगी; मुझे आत्मीयता, सुरक्षा और स्थिरता का एहसास कराती है। सुख-दुख से भरे उस दौर में उनके होने से मुझे यह एहसास होता था कि मैं अकेला नहीं हूँ। वैसे दोस्तों, ऐसा ही कुछ आपके जीवन का भी अनुभव रहा होगा और आपने भी कभी ना कभी एहसास किया होगा कि सच्चे दोस्त हमारे जीवन का वह मजबूत आधार होते हैं, जो हमें हर परिस्थिति में सम्भाले रखते हैं। इसलिए ही तो कहा जाता है कि 'दोस्ती एक ऐसा अनमोल रिश्ता है, जो हमें जीवन के हर उतार-चढ़ाव में संबल प्रदान करता है।’
शायद इसी एहसास को महसूस कर महान दार्शनिक अरस्तू ने कहा होगा, ‘दो मित्र एक आत्मा के समान होते हैं, जो दो शरीरों में निवास करती है।’ वैसे अरस्तू का यह कथन हमें इस बात का भी एहसास करवाता है कि सच्ची दोस्ती आत्मीय जुड़ाव पर आधारित होती है। इसलिए ही तो हम अपने दोस्तों के सामने सहज रह पाते हैं अर्थात् उनके साथ हम बिना किसी डर या दिखावे के अपने वास्तविक रूप में रह पाते हैं। उनके सामने हमें कभी खुद को छुपाने की जरूरत महसूस नहीं होती क्योंकि वहाँ हमें अस्वीकृति का भय नहीं सताता। इसी बात को समझाते हुए अमेरिकी दार्शनिक राल्फ वाल्डो इमर्सन ने भी कहा है, ‘एक दोस्त वह व्यक्ति होता है, जिसके सामने मैं पूरी ईमानदारी से अपने विचार व्यक्त कर सकता हूँ।’ इसी बात को दूसरे शब्दों में कहूँ तो सच्चे दोस्त हमारी भावनाओं को समझते हैं और बिना किसी पूर्वाग्रह के हमें सुनते हैं।
जी हाँ दोस्तों, सच्ची दोस्ती सिर्फ आनंद और हँसी-मजाक तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह जीवन के कठिन क्षणों में भी हमारी ढाल बनती है। इसलिए दोस्तों को जीवन की नींव माना जाता है, जो जीवन भर हमें सहारा देते हैं और हमें कठिन परिस्थितियों में गिरने से बचाते हैं। इसी बात को समझाते हुए महान विचारक अल्बर्ट श्वाइट्ज़र ने कहा था, ‘दोस्ती ही वह सीमेंट है, जो इस दुनिया को जोड़े रख सकती है।’ जी हाँ, जब दुनिया में अराजकता, कठिनाइयाँ और मतभेद होते हैं, तब दोस्ती ही वह शक्ति है, जो हमें जोड़कर रखती है और दुनिया को बेहतर स्थान बनाती है।
दोस्ती का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसमें गलतियों को माफ करने की क्षमता होनी चाहिए। अगर कभी आपका कोई दोस्त कोई गलती कर दे तो तत्काल उसे माफ करे दें और उनके साथ बिताए गए खूबसूरत पलों को याद कर जीवन में आगे बढ़ जाएँ। इसी बात को समझाते हुए किसी ने क्या खूब कहा है, ‘दोस्त की गलती रेत पर लिखो, ताकि पानी उसे मिटा दे और दोस्त के अहसास पत्थर पर लिखो, ताकि कोई उसे मिटा न सके।’ अगर आप ऐसा कर पाये तो यकीन मानियेगा इससे आपकी दोस्ती और अधिक मजबूत हो जाएगी और जीवन में सकारात्मकता बनी रहेगी।
लेकिन इस सबके बाद भी हमें एक बात को स्वीकार कर जीवन में आगे बढ़ना चाहिए, ‘हमारे दोस्तों की भी कुछ सीमाएं होती है। कई बार वे व्यवहारिक कारणों से चाहते हुए भी हमारा साथ नहीं दे पाते हैं, जैसे भौगोलिक दूरी, कार्यालयीन व्यस्तता, उनके अपने पारिवारिक कमिटमेंट आदि। प्राचीन भारतीय साहित्य के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘सुभाषितम’ में भी इस बारे में बताते हुए कहा गया है, ‘विद्या मित्रं प्रवासेषु, भार्या मित्रं गृहेषु च। व्याधितस्यौषधं मित्रं, धर्मो मित्रं मृतस्य च॥’ अर्थात्, यात्रा में विद्या मित्र होती है, जो हमारा मार्गदर्शन करती है। घर में पत्नी मित्र होती है, जो सुख-दुःख में साथ निभाती है। जब हम बीमार होते हैं, तो औषधि मित्र बनकर हमारी रक्षा करती है और मृत्यु के बाद भी धर्म ही हमारा सच्चा मित्र होता है। कुल मिलाकर कहा जाए तो अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग चीजें और लोग हमारे मित्र होते हैं।
अंत में दोस्तों मैं इतना ही कहना चाहूँगा कि दोस्ती जीवन का सबसे अनमोल रिश्ता है, जो हमें सहारा देता है, हमारी खुशी को दोगुना करता है और दुखों को बांटकर कम करता है। सच्चे दोस्त हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा होते हैं, लेकिन हमें यह भी समझना चाहिए कि कई बार पारिस्थितिक कारणों से दोस्त अपर्याप्त लग सकते हैं और कई बार चाहते हुए भी उनके लिए तत्काल मदद करना संभव नहीं हो पाता है। इसलिए उनपर संदेह करने के स्थान पर उन्हें संजोकर रखिए। एक-दूसरे की गलतियों को माफ कर जीवन में आगे बढ़िए और याद रखिए सच्ची दोस्ती ही इस दुनिया को जोड़कर रख सकती है। इसलिए, अपने दोस्तों को महत्व दें, उनकी भावनाओं को समझें और अपने जीवन को इस रिश्ते से और भी सुंदर बनाएं।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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