मौन की शक्ति, विजेता की सोच और दूरदृष्टि से गढ़ें भविष्य…
- Nirmal Bhatnagar

- Sep 9, 2025
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Sep 9, 2025
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

जीवन की भागदौड़ में उलझनें, परेशानियाँ का आना और उसकी वजह से हमारे मन में उपजे प्रश्नों के हल खोजना, पूर्णतः स्वभाविक है। याने हम सभी लोग रोज़ जीवन में उपजे ऐसे ही अनसुलझे हज़ारों प्रश्नों के उत्तर खोजने की भागदौड़ में लगे रहते हैं और शायद इसी वजह से यह सोच ही नहीं पाते हैं कि ऐसे गहरे प्रश्नों के उत्तर हमें कहाँ मिलते हैं? दोस्तों, अगर आप गंभीरता पूर्वक इस विषय में गहराई से सोचेंगे तो पायेंगे कि आज तक हमें ऐसे तमाम प्रश्नों के हल, न तो शब्दों के शोर में मिले हैं और ना ही तर्कों की भीड़ में मिले हैं। वे तो हमें, हमेशा मौन में मिले हैं।
जी हाँ दोस्तों, मौन उत्तरों से भरा होता है, बस हमें उसे सुनना सीखना होता है। हमेशा याद रखें कि जब हम शांत होते हैं, तब हमारा मन स्पष्ट होता है और हमें परिस्थितियों का असली समाधान दिखने लगता है। यही कारण है कि महात्मा गांधी अक्सर मौन व्रत रखते थे। वे हमेशा कहते थे कि मौन उन्हें आत्मचिंतन और आत्मबल देता है। शायद इसी वजह से वे देश के कठिन हालातों के दौर में भी सही निर्णय ले पाए और एक पूरा आंदोलन खड़ा कर सके।
याद रखियेगा दोस्तों, अगर आप कठिन परिस्थितियों में हड़बड़ाहट के साथ सोचेंगे, तो निश्चित तौर पर गलती करेंगे और अगर इन्हीं ग़लतियों को दोहराते रहेंगे तो जीवन में हार निश्चित रहेगी। याने बात इतनी सी है कि जब तक हम विजेता वाला दृष्टिकोण नहीं अपनायेंगे, तब तक जीवन में जीत सुनिश्चित नहीं हो पाएगी। इसलिए मैं हमेशा कहता हूँ, अगर आप हार मानने वाले की तरह सोचेंगे, तो हार पक्की है। लेकिन अगर आप विजेता की तरह सोचेंगे, तो आपके भीतर आत्मविश्वास जागेगा और हालात भी आपके पक्ष में मुड़ने लगेंगे। उदाहरण के लिए, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के द्वारा लांच की गई पहली सैटेलाइट असफल होने पर पूरा देश निराश हुआ था। लेकिन कलाम साहब ने निराश होने के स्थान पर वैज्ञानिकों से कहा था, “यह असफलता नहीं है, यह सफलता की तैयारी है।” अर्थात् लोगों को जवाब देने के स्थान पर मौन को अपनाओ और सोचो कहाँ कमी रह गई। यही विजेता का दृष्टिकोण था। यही आत्मविश्वास था जिसने उनकी टीम को प्रेरित किया और भारत को अंतरिक्ष विज्ञान में ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
याद रखियेगा दोस्त, समस्याओं के हल खोजने से बेहतर समस्याओं को रोकना होता है। इसीलिए कहते हैं, “बुद्धिजीवी समस्याएँ हल करते हैं, लेकिन प्रतिभाशाली लोग समस्याओं को जन्म ही नहीं लेने देते।” कलाम साहब भी समस्याओं को आने से पहले पहचान लेते थे और उनकी तैयारी कर लेते थे। यही उनकी दूरदृष्टि थी।
साथियों, उपरोक्त तीनों बातें हमें जीवन को बेहतर तरीके से जीने के तीन मंत्र सिखाती हैं-
१) मौन हमें स्पष्ट सोच और उत्तर देता है।
२) विजेता का दृष्टिकोण हमें आत्मबल देता है। और
३) दूरदृष्टि हमें आने वाली चुनौतियों से पहले ही बचा लेती है।
याद रखिएगा दोस्तों, “मौन में शक्ति है, विजेता की सोच में साहस है और दूरदृष्टि में भविष्य गढ़ने की क्षमता है।” तो आइए, हम सब आज से यह संकल्प लें कि जीवन चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, हम मौन की शक्ति को अपनाएँगे, विजेता की सोच को जियेंगे और दूरदृष्टि के साथ अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाएँगे।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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