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मौन से पाएँ आत्मिक शांति…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • May 28, 2025
  • 2 min read

May 28, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, मौन सिर्फ़ चुप रहने या आवाज ना करने का नाम नहीं है। यह तो एक बहुत ही गहरा अनुभव है, जहाँ हर विचार या हर रचना या फिर हर सृजन की शुरुआत होती है। अगर आप ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे कि इस दुनिया की हर सुंदर चीज की नींव मौन में ही रखी गई है। अगर सहमत ना हों तो जरा विचार कर देखिए कि एक चित्रकार अपनी कल्पना को कैसे और कहाँ से आकार देता है? आपका जवाब होगा, ‘एकदम शांत माहौल में, कुछ विचारों के साथ, सफेद पृष्ठभूमि वाले खाली कैनवास पर।’ सही कहा ना मैंने? इसी तरह जब कोई संगीतकार संगीत रचता है, तो सुरों के बीच का मौन ही उसे प्रभावशाली बनाता है। ठीक इसी तरह, हमारे मन में जो विचार आते हैं, वे भी एक गहरी चुप्पी से ही जन्म लेते हैं।


इसलिए मेरा बड़ा स्पष्ट मानना है कि मौन के बिना किसी भी विषय की साधना अधूरी ही रहती है। अर्थात् अगर आप किसी क्षेत्र विशेष में विशेषज्ञता चाहते हैं, तो मौन की ताक़त को आज़माइये। लेकिन उससे पहले आपको मौन को साधना होगा; उस तक पहुँचना होगा। इसका सर्वश्रेष्ठ तरीका ध्यान है क्योंकि ध्यान के माध्यम से जब आप ख़ुद से जुड़ते हैं याने बाहरी दुनिया के शोर से कटकर, ख़ुद की साँसों से जुड़ते हैं, तब आप मौन की शक्ति का अनुभव करते हैं। यही वे क्षण होते हैं जब मौन हमें सच्ची स्वतंत्रता और भीतर की शक्ति का अनुभव कराता है।


वैसे ध्यान के अतिरिक्त अनावश्यक बोलने से बचना याने चुप रहना भी आपको बेहतर बनने में मदद करता है। दूसरे शब्दों में कहूँ तो चुप याने मौन रहना हमें वह समझ देता है, जो अनावश्यक शोर या प्रतिक्रियात्मक लहजे में नहीं मिलता है। यह हमें निम्न बातें सिखाता है -

1) हमें कब बोलना है और कब चुप रहना है।

2) सच बोलना क्यों ज़रूरी है.

3) माफी कैसे माँगनी चाहिए।

4) और सबसे अहम, बिना दूसरों को दोष दिए अपनी गलतियों की जिम्मेदारी कैसे लेनी चाहिए।


दोस्तों, मौन का एक लाभ और है, यह हमें ख़ुद से मिलने का मौक़ा देता है। जी हाँ! मौन ही हमें अपनी सोच, अपनी भावनाओं और अपनी कमजोरियों को पहचानने का अवसर देता है। ख़ुद को पहचानने का यही पल, आत्म-जागरूकता लाता है, जो सच्ची परिपक्वता की निशानी है। लेकिन आज की भागदौड़ और शोरगुल भरी इस दुनिया में मौन एक दुर्लभ चीज़ बन गई है। हम भूल गए हैं कि यही मौन हमें स्थिरता, स्पष्टता और आंतरिक बल देता है। जब हम थोड़ी देर के लिए रुकते हैं, आँखें बंद करते हैं और भीतर की शांति को सुनते हैं, तब हमें असली आज़ादी महसूस होती है।


इसलिए दोस्तों, आज, एक मिनट के लिए अपनी सोच को, काम को, बातचीत को याने सब चीजों को रोकिए और बस शांति से बैठिए और अपने अंदर के मौन को सुनिए। वहीं से सच्चा आनंद, सच्ची समझ और सच्ची शक्ति जन्म लेती है। इसलिए, शांत रहिए, सजग रहिए, और अपने भीतर की शक्ति को महसूस कीजिए।


याद रखिएगा, मौन कोई कमजोरी नहीं, बल्कि वह ताक़त है जहाँ से जीवन की सबसे बड़ी समझ और बदलाव शुरू होते हैं। इसलिए मौन को अपनाइए, खुद को जानिए और दुनिया को एक नए नज़रिए से देखिए।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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