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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

यक़ीन मानिए आप विशेष हैं !!!

July 22, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, जिस तरह हर माता-पिता अपनी पूरी क्षमता के साथ अपने बच्चों को सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए पूरा ज़ोर लगाता है, ठीक उसी तरह ईश्वर भी हमें अपनी सर्वश्रेष्ठ शक्तियों से रूप और असीम क्षमता देकर इस दुनिया में भेजता है। जैसे हम अपने बच्चों के हित में सोचते हैं ठीक वैसे ही ईश्वर हमारे हित में सोचता है क्योंकि हम सब भी तो उस परम पिता परमेश्वर की संतान हैं। लेकिन इसके बाद भी अक्सर आपने लोगों को सफलता के लिए परेशान या असफल होते हुए देखा होगा। इसकी मुख्य वजह ईश्वर प्रदत्त क्षमताओं का हमारे अंदर बीज रूप में होना है। अर्थात् जिस तरह एक बीज अपने अंदर एक पेड़ को छिपाए रहता है, ठीक उसी स्वरूप में हम सभी के अंदर भी असीम क्षमताएँ होती हैं। अगर हम उस बीज को ज़मीन में बोने के पश्चात समय पर खाद-पानी देते हैं तो ही उस बीज से पेड़ बनता है। ठीक इसी तरह ईश्वर प्रदत्त असीम क्षमताओं को भी ध्यान देकर बढ़ाया जा सकता है।


दोस्तों उपरोक्त बात इस दुनिया में जन्में हर इंसान पर समान रूप से लागू होती है। फिर चाहे वह इंसान मंदबुद्धि ही क्यों ना हो। दोनों तरह के लोगों में बस अंतर इतना सा होगा कि ऐसे मनुष्यों के अंदर छिपी असीमित क्षमता अत्यधिक श्रम और प्रयत्न के बाद निखर कर आएगी। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो ऐसे सभी मनुष्य भी उतने ही सफल हो सकते हैं, जितने जन्मजात प्रतिभा वाले देखे जाते हैं। इन्हें बस थोड़ा अधिक समय तक मेहनत करना पड़ सकती है।


यह बात साथियों धर्म, जात-पाँत, अमीर-गरीब सभी के लिए समान रूप से लागू होती है। इसलिए किसी भी इंसान को हेय, हीन या छोटा समझना इंसानियत और अध्यात्मवाद के सर्वथा विपरीत है। इसलिए साथियों किसी भी इंसान को धर्म-जाति के नाम पर नीच मानना भी सर्वथा अनुचित है। इसलिए मेरा मानना है कि इंसानों में अंतर सिर्फ़ और सिर्फ़ दुष्टता और सज्जनता अथवा इंसानियत और हैवानियत के आधार पर किया जा सकता है। जी हाँ साथियों, सिर्फ़ और सिर्फ़ इसी आधार पर हम कुकर्मी और सत्पुरुष का भेद कर सकते हैं और उनके कर्मों के आधार पर उनका तिरस्कार या सम्मान कर सकते हैं।


सभी इंसानों में असीम क्षमता वाली मेरी इस धारणा को आप बिजली याने लाइट के उदाहरण से भी समझ सकते हैं। जिस प्रकार एक छोटा सा नाइट या ज़ीरो वॉट का बल्ब भी आँखें चुंधियाने वाले सौ किलोवाट के बल्ब के समान ऊर्जा लेता है। ठीक उसी तरह जिन शक्तियों और साधनों से एक विशिष्ट योग्यता वाला इंसान सफल होता है, उन्हीं शक्तियों और साधनों से एक मंदबुद्धि इंसान भी सफल हो सकता है; अपने जीवन की तमाम परेशानियों को दूर कर सकता है, सफल बन सकता है। पर सामान्यतः मैंने देखा है कि ऐसे लोग इतना अधिक उधेड़बुन में लगे रहते हैं कि उन्हें ज़ीरो वॉट के बल्ब को ऊर्जा देने वाली बिजली पर ही शक होने लगता है अर्थात् ऐसे लोगों को ईश्वर पर ही शक होने लगता है और वे क़िस्मत व परिस्थितियों को दोष देना शुरू कर देते हैं।


दोस्तों, आप और मैं, अर्थात् सभी इंसान दोनों उपरोक्त में से किस कैटेगिरी से हैं, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। अगर आपका लक्ष्य अपनी असीमित क्षमताओं और योग्यताओं को पहचान कर सफल होना है तो आपको बुद्धि, शक्ति, स्वास्थ्य और समय का सदुपयोग करना सीखना होगा या सबसे पहले इन्हें ठीक रखना होगा। इसके बिना असीम क्षमताओं को पहचानना और उससे सफल होना सम्भव नहीं होगा। आईए साथियों उपरोक्त विचार पर सर्वप्रथम मंथन करते हैं और इसपर अमल कर अपने जीवन को सफल बनाते हैं।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

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