• Nirmal Bhatnagar

यक़ीन रखिएगा, आप वाक़ई विशेष हैं…

June 25, 2022

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, निश्चित तौर पर आपने बच्चों के मुँह से यह तो सुना ही होगा, ‘मुझसे कोई प्यार नहीं करता!’ या ‘मैं तो किसी काम का ही नहीं हूँ।’ या फिर ‘पता नहीं क्यूँ लोग मुझे समझ ही नहीं पाते हैं।’ ऐसा ही हाल ही में एक विद्यालय में बच्चों के साथ चर्चा के दौरान मेरे साथ हुआ, जब एक बच्चा मेरे पास आकर ऐसा ही कुछ बोला। मैंने उसी वक्त सभी बच्चों को गुलाब के फूल और उसकी पत्ती की कहानी सुनाई, जो इस प्रकार थी-


तालाब के किनारे एक बहुत ही सुंदर बगीचा था जिसमें तरह-तरह के सुंदर फूल खिला करते थे। इन्हीं फूलों के बीच एक बहुत ही सुंदर गुलाब का पौधा था। यह इतना अधिक सुंदर था कि जो भी इसे देखता था, देखता ही रह जाता था। गुलाब भी लोगों से मिली तारीफ को सुनकर खुश होता था और रोज़ पहले से अधिक सुंदर खिलने का प्रयास किया करता था। लोगों से मिली तारीफ की वजह से गुलाब को हमेशा बहुत अच्छा लगता था और वह रोज़ पहले से अधिक अच्छा खिलने का प्रयास किया करता था।


गुलाब के इसी पौधे पर एक सुंदर सी हरी पत्ती भी थी। वह हमेशा सोचा करती थी कि कोई ना कोई, कभी ना कभी उसकी भी तारीफ करेगा। लेकिन जब कई दिन बीत गए परन्तु किसी ने उसकी तारीफ़ नहीं करी तो उसे लगने लगा कि वह किसी काम की नहीं है, कहाँ यह खूबसूरत फूल, कहाँ मैं। इन्हीं नकारात्मक विचारों या भाव की वजह से समय के साथ पत्ती के अंदर हीन भावना बढ़ने लगी और वह हमेशा उदास रहने लगी। अब ज़्यादातर समय उसे लगता था कि मेरा जीवन किसी काम का नहीं है।


पत्ती का जीवन इन्हीं विचारों के बीच कट रहा था कि एक दिन तेज आंधी आ गई और उसकी वजह से बगीचे में मौजूद पेड़-पौधे तहस-नहस हो गए। कुछ ही पलों में गुलाब सहित सभी पौधे ज़मीन पर पड़े थे, कई पौधों की तो पत्तियाँ भी टूट कर तेज हवा के साथ उड़ गई। इन्हीं पत्तियों में गुलाब के उस पौधे की पत्ती भी थी, वह भी अपनी शाख़ से टूट कर हवा के साथ उड़ते-उड़ते तालाब में जा गिरी। अब पत्ती को पूरा विश्वास हो गया था कि उसका पूरा जीवन बर्बाद हो गया है। वह इस निराशा के साथ दम तोड़ने ही वाली थी कि उसकी नज़र हवा से उड़कर पानी में गिरी चींटी पर पड़ी, जो अपनी जान बचाने के लिए हर सम्भव प्रयास कर रही थी। हालाँकि वह इतनी थक चुकी थी कि ज़्यादा देर तक संघर्ष करना उसके लिए भी सम्भव नहीं था।


पत्ती चींटी की स्थिति को जल्द ही भाँप गई और अपनी पूरी क्षमता के साथ चिल्लाते हुए बोली, ‘घबराओ नहीं, तुम मेरे ऊपर चढ़ जाओ, मैं तुम्हारी मदद करने का प्रयास करती हूँ।’ विषम परिस्थितियों में मिली मदद की आस से चींटी की जान में जान आई और उसने अपनी ओर से थोड़ा सा अतिरिक्त प्रयास किया और पर भर में पत्ती के ऊपर चढ़ गई। आंधी थमते-थमते पत्ती भी तालाब के दूसरे छोर तक पहुँच गई।


चींटी किनारे को समीप देखकर बहुत खुश थी, उसने जान बचाने के लिए पत्ती का धन्यवाद किया और कहा, ‘मेरे ऊपर उपकार करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आप सचमुच बहुत महान हो।’ इतना सुनते ही पत्ती भावुक हो गई और बोली, ‘चींटी बहन, धन्यवाद तो मुझे तुम्हारा करना चाहिए। तुम्हारी वजह से ही मुझे अपनी उपयोगिता, अपनी क़ाबिलियत का एहसास हुआ, जिससे मैं अनजान था।’


कहानी पूरी होते ही मैंने बच्चों की ओर देखा और कहा, ‘एक बात हमेशा याद रखिएगा ईश्वर ने हम सभी को इस दुनिया में कुछ विशेष उद्देश्यों की पूर्ति के लिए भेजा है। इन उद्देश्यों को हम अच्छे से पूरा कर पाएँ, इसके लिए आवश्यक तथा अनोखी शक्तियाँ भी हमें दी है। बस कई बार हम अपने उद्देश्य या अपनी क़ाबिलियत से अनजान रहते हैं, उसे पहचान नहीं पाते हैं। इसका अर्थ यह कभी नहीं होता कि हम फ़ालतू हैं। ऐसी स्थिति में हमें बस थोड़ा सा धैर्य रखते हुए, हर परिस्थिति में अपना सर्वश्रेष्ठ देना होगा, साथ ही हमें हर पल विश्वास रखना होगा कि समय आने पर ईश्वर स्वयं हमें हमारे उद्देश्य और क़ाबिलियत का एहसास करवा देगा। याद रखिएगा दोस्तों तात्कालिक असफलता कभी भी आपको अयोग्य नहीं ठहराती है। बस ऐसी स्थिति में हमें अपनी ग़लतियों को खोजकर दूर करना होगा। जब आप अपनी क़ाबिलियत को पहचानने के साथ अपनी कमियां दूर कर लेते हैं तब आप वह काम कर पाते हैं जो आज तक किसी ने नहीं किया है।’


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

dreamsachieverspune@gmail.com

16 views0 comments