• Nirmal Bhatnagar

रख हौंसला ए मुसाफ़िर…

June 27, 2022

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, अगर आप मुझसे पूछें कि हमारे जीवन को सबसे ज़्यादा नुक़सान कौन सी चीज़ पहुँचाती है, तो मैं कहूँगा नकारात्मकता। जी हाँ दोस्तों, नकारात्मकता ही एकमात्र ऐसी चीज़ है, जो सपनों को पाने की हमारी गति, हमारी ऊर्जा और क्षमता को लगभग ख़त्म ही कर देती है। हाल ही में मेरी मुलाक़ात एक ऐसे ही युवा से हुई जो प्रतियोगी परीक्षा में दो वर्षों तक मनवांछित अच्छा परिणाम ना ला पाने के कारण हार मानकर बैठ गया था।


काउन्सलिंग के दौरान युवा की पसंद, नापसंद, क्षमता, योग्यता आदि जानने के उद्देश्य से जब मैंने उसकी स्कूली शिक्षा के विषय में चर्चा करी तो मुझे एहसास हुआ कि शुरू से लेकर कक्षा बारहवीं तक वह हमेशा 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाकर, कक्षा में प्रथम आया है। लेकिन इसके विपरीत कक्षा बारहवीं के बाद किसी भी परीक्षा में वह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया। जब मैंने उस बच्चे से थोड़ा और गहराई से चर्चा करी तो मुझे समझ आया कि कक्षा बारहवीं के बाद मिली स्वतंत्रता और माहौल ने उसे भटका दिया था और जब उसने इन दो वर्षों में अपने साथ वालों को जीवन में आगे बढ़ते हुए देखा तो उसे खुद की असफलता का एहसास हुआ और वो नकारात्मक भावों के जाल में उलझ गया।


मैंने तुरंत उस युवा से कहा, ‘कल्पना करो कि हम बहुत कड़ाके की सर्दी में अलाव के पास बैठकर अपने हाथ ताप रहे हैं। तभी अचानक मेरे मन में कुछ ख़याल आया और मैंने जलती हुई लकड़ी या कोयले को उठाकर पास ही पड़ी मिट्टी में डाल दिया। अब तुम बताओ उस कोयले या जलती हुई लकड़ी का क्या होगा?’ युवा हल्का सा मुस्कुराया और बोला, ‘सर, वह थोड़ी देर धधकेगा और उसके बाद धीरे-धीरे बुझ जाएगा।’ मैंने उसकी मुस्कुराहट को नज़रंदाज़ करते हुए पूरी गम्भीरता से अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा, ‘अगर अब मैं उस लकड़ी या कोयले को वापस उठाकर जलते हुए अलाव में डाल दूँगा तो क्या होगा?’ बच्चा इस बार थोड़ा ज़्यादा मुस्कुराया और बोला, ‘वह वापस धधकने लगेगा।’


इस बार मैं उसका जवाब सुनते ही मुस्कुराया और बोला, ‘बस तुम वही धधकता हुआ कोयला हो, जो आग से दूर होने की वजह से अपनी तपन खो बैठा और समय के साथ मिले नकारात्मक अनुभवों ने उसकी क्षमताओं को ढक दिया। लेकिन जैसी ही इस कोयले को वापस पुराना माहौल मिलेगा, यह फिर से धधकने लगेगा।’


मेरी बात सुनते ही बच्चा पूरी तरह गम्भीर हो गया और बोला, ‘सर, मुझे थोड़ा विस्तार से बताइए।’ मैंने कहा, ‘बारहवीं कक्षा तक तुम नियंत्रित माहौल में थे अर्थात् तुम्हारे उठने से सोने तक और खेलने से पढ़ने तक, हर गतिविधि बड़ों की निगाह में थी। साथ ही तुम्हारे सभी दोस्त भी पढ़ाई-लिखाई में रुचि रखने वाले थे। लेकिन जब तुम्हें प्रतियोगी परीक्षा के लिए बाहर जाकर पढ़ने का मौक़ा मिला तो तुम ग़लत संगत, बाज़ार की चकाचौंध और अनियंत्रित जोखिम की वजह से असफल होने लगे। समय के साथ इसी असफलता के अनुभवों ने तुम्हारे अंदर की आग और जोश को ठंडा कर दिया। अगर तुम सफल होना चाहते हो तो वापस से एक बार अपने आस-पास के माहौल और रोज़मर्रा के अनुभवों को बदलो। निश्चित तौर पर तुम्हें सफलता मिलेगी।


जी हाँ दोस्तों, असफलता से सफलता की यात्रा खुद की क्षमता और ताक़त को पहचानने से शुरू होती है। जैसे ही आप अपनी क्षमताओं को पहचान पाते हैं आप अपने आसपास के माहौल को बदलने लगते हैं और नए सिरे से पूरी क्षमता के साथ फिर से प्रयास करने लगते हैं। कभी भी असफलता से घबराएँ नहीं अगर आप पूरी गम्भीरता, हिम्मत, लगन और पक्के इरादे के साथ किसी लक्ष्य के पीछे पड़ जाएँगे तो वह निश्चित तौर पूरा होगा ही। हर असफलता के आगे सफलता होती है बस आपको अपने प्रयास को जारी रखना पड़ता है। याद रखिएगा, बड़े सपनों को पाने वाले हर व्यक्ति को सफलता और असफलता के कई पड़ावों से होकर गुजरना पड़ता है। जब भी आप असफल होंगे पहले लोग आपका मज़ाक़ उड़ाएँगे, फिर वे आपका साथ छोड़ेंगे, फिर आपका विरोध करेंगे और अंत में वे ही लोग कहेंगे, ‘हम तो पहले से ही जानते थे यह एक दिन कोई ना कोई बड़ा काम करेगा, जीवन में सफल होगा।’

किसी ना सही कहा है दोस्तों, ‘रख हौंसला वो मंज़र भी आयेगा, प्यासे के पास चलकर समंदर भी आयेगा..! थक कर ना बैठ, ऐ मंजिल के मुसाफ़िर, मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी आयेगा!!!’


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

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