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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

विचारों की शक्ति !!!

Nov 22, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, अगर आप मुझसे पूछें कि आपकी नज़र में सबसे शक्तिशाली क्या है? तो मैं कहूँगा, ‘विचार!’, जी हाँ साथियों, ‘विचार’, बहुत शक्तिशाली होते हैं। उनमें किसी व्यक्ति को बनाने की, तो किसी को मिटा देने की शक्ति होती है। इतना ही नहीं दोस्तों, विचारों को सही दिशा देकर आप असाध्य रोगियों को स्वस्थ बना सकते हैं तथा मरणासन्न व्यक्तियों को नया जीवन दे सकते हैं। इतिहास में ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं, जहाँ विचारों के ज़रिए सोच में परिवर्तन लाकर लोगों ने अपने जीवन को नई दिशा दी है। अपनी बात को मैं आपको एक उदाहरण से समझाने का प्रयास करता हूँ।


बात २२ जून २०११ की है, जब मैं दिल्ली के श्री फोर्ट ऑडिटोरियम में एक ट्रेनिंग प्रोग्राम अटेंड कर रहा था। ट्रेनिंग के दौरान मध्यप्रदेश के मंदसौर शहर में रहने वाले मेरे मित्र श्री संजय गोठी जी का फ़ोन मुझे आया। मैंने प्रोग्राम की महत्ता और गरिमा को देखते हुए फ़ोन को काट दिया। संजय जी ने एक बार फिर प्रयास किया लेकिन इस बार भी मैंने पूर्व की ही तरह फ़ोन काट दिया। इसके बाद भी संजय जी रुके नहीं, वे बार-बार मुझे कॉल करते रहे। चूँकि संजय जी सहित, मेरे सभी मित्र या परिचित बहुत अच्छे से जानते हैं कि जब मैं ट्रेनिंग या वर्कशॉप में होता हूँ, तो मैं फ़ोन अटेंड नहीं करता। ऐसी स्थिति में उनका बार-बार फ़ोन करना किसी विशेष स्थिति की ओर इशारा करता था। मैं तुरंत हॉल से बाहर आया और उनके फ़ोन को अटैंड किया। सामने से संजय जी गुड मॉर्निंग विष करते हुए बोले, ‘सर, एक नया चैलेंज आया है।’ मैंने कहा, ‘बताइए।’ तो वे बोले, ‘सर, फुल बॉडी चेकअप के दौरान पता चला है कि मुझे कैंसर है।’


संजय जी की बात सुन मैं अवाक था। एक पल के लिए तो मुझे समझ ही नहीं आया कि मैं क्या प्रतिक्रिया दूँ। संजय जी शायद मेरी दुविधा समझ गए थे, इसलिए मैं कुछ कहता उसके पहले ही बात आगे बढ़ाते हुए बोले, ‘सर, चिंता की कोई बात नहीं है। मैंने सब पता कर लिया है, मैं जल्द ही पूरी तरह स्वस्थ हो जाऊँगा। आप आराम से अपने वर्कशॉप को अटेंड कीजिए। हम बाद में बात करते हैं।’ संजय जी के कहे शब्द ‘एक नया चैलेंज आया है।’, मुझ पर जादू कर रहे थे। मैं उनकी ऊर्जा और आत्मविश्वास देख हैरान था। सेशन के बाद जब मैंने उनसे थोड़ा विस्तार से बात करी तो मुझे पता चला कि अहमदाबाद में फ़ुल बॉडी चेकअप के दौरान उन्हें इस बीमारी का पता चला था। मैंने तत्काल उनसे प्रश्न किया कि मात्र ४१ साल की उम्र में फ़ुल बॉडी चेकअप करवाने का विचार आपके मन में आया कैसे? तो वे बोले, ‘सर, आप भूल गए कि आपने राजेश सर की जो वर्कशॉप आयोजित करवाई थी उसमें सर ने ४० वर्ष के बाद हर वर्ष फ़ुल बॉडी चेकअप करवाने के लिए कहा था।’


संजय जी के इतना कहते ही मुझे अपने गुरु याने राजेश सर द्वारा उस वर्कशॉप में बताई गई सारी बातें याद आ गई। असल में वर्कशॉप के दौरान राजेश सर ने सभी पार्टिसिपेंट्स को विचारों की महत्ता बताते हुए, चुनौतियों के दौर में सकारात्मक नज़रिये के महत्व को समझाया था। इसके साथ ही उन्होंने सभी को जीवन की प्राथमिकताएँ बनाना और अपने मन को प्रोग्राम कर, मनचाहे लक्ष्य या परिणाम पाने का तरीक़ा भी बताया था। जीवन की प्राथमिकताओं के विषय में समझाते वक़्त सर ने बताया था कि हम सभी को पहली प्राथमिकता अपने स्वास्थ्य को देना चाहिये और ४० वर्ष की उम्र के बाद हर वर्ष फ़ुल बॉडी चेकअप करवाना चाहिए। इसके बाद ही आप अन्य लक्ष्यों याने पारिवारिक, प्रोफ़ेशनल, सामाजिक और आध्यात्मिक क्षेत्रों को प्राथमिकता दे सकते हैं। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि बिना स्वस्थ मन और तन के जीवन के प्रति सकारात्मक नज़रिया बनाना असंभव है। अर्थात् सबसे पहले स्वस्थ मन, फिर स्वस्थ तन, उसके बाद आवश्यकतानुसार बढ़ती हुई आमदनी का साधन और अच्छे रिश्ते ही आपको जीवन में खुश और संतुष्ट रख पाएँगे और जब सब कुछ व्यवस्थित होगा तब आपका नज़रिया जीवन के प्रति अपने आप ही सकारात्मक बन जाएगा।’


वर्कशॉप से मिले इस एक विचार को संजय गोठी जी ने अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाया और रूटीन बॉडी चेकअप के दौरान प्रथम स्टेज में ही कैंसर जैसी घातक बीमारी को पहचान लिया। इसके बाद उन्होंने सकारात्मक विचारों के साथ अपने आत्मबल को ऊँचा रखते हुए डॉक्टर की सलाह अनुसार ट्रीटमेंट लिया और आज पूर्णतः स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। इसीलिए दोस्तों, मैं हमेशा कहता हूँ कि विचारों का प्रभाव कभी व्यर्थ नहीं जाता, वे आपको बना सकते हैं, तो आपको मिटा भी सकते हैं। इसलिए हमेशा ध्यान रखें, आपके विचार दूसरों को बाद में, पहले ख़ुद को प्रभावित करते हैं। इसलिए अगर आपके विचार ख़ुद के या दूसरे के प्रति तुच्छ, ओछे या नकारात्मक हैं, तो उसे तुरंत बदल दें और उनके स्थान पर अच्छे, सकारात्मक, जीवन को नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाले; उसे बेहतर बनाने वाले विचारों को दें। कुल मिलाकर कहा जाए साथियों, तो यथार्थवादी विचारों का सृजन कर अपना जीवन जीना प्रारंभ करें।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com


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