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विद्या नहीं, व्यवहार महान बनाता है !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • May 22, 2025
  • 3 min read

May 22, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन। है...

चलिए आज एक प्रश्न के साथ इस लेख की शुरुआत करता हूँ। मान लीजिए किसी किसान के पास खेती करने के लिए एक बेहद उपजाऊ जमीन है, सर्वश्रेष्ठ किस्म के बेहतरीन बीज, पर्याप्त पानी व अच्छी देशी खाद भी है। लेकिन अनुकूल मौसम होने के बाद भी वह इंसान सही समय पर खेत में बीज ना बोए, खाद पानी ना दे, तो फसल का क्या होगा? आप कहेंगे, “यह तो बड़ा सामान्य सा प्रश्न है, जिसका उत्तर हर कोई दे सकता है। वह बीज सब कुछ होने के बाद भी फल-फूल नहीं पाएगा।” मैं भी आपके इस उत्तर से पूरी तरह सहमत हूँ। लेकिन जरा इस प्रश्न पर गौर फरमाइये और सोच कर जवाब दीजिए, “क्या हम इस सरल से सत्य को अपने जीवन में लागू कर पा रहे हैं?”


दोस्तों, आज के युग में हम सभी शिक्षा को सफलता की कुंजी मानते हैं और इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए अच्छे से अच्छे स्कूल, कॉलेज या गुरुकुल जाकर विद्या प्राप्त करते हैं। इतना ही नहीं पुस्तकों, इंटरनेट आदि अन्य माध्यम से ज्ञान अर्जित करते हैं; डिग्रियाँ हासिल करते है और अंत में समाज में एक अच्छा और सम्मानित स्थान प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। परंतु क्या केवल पढ़ाई और ज्ञान ही किसी व्यक्ति को सम्मानित और महान बना सकता है? मेरी नजर में तो बिल्कुल भी नहीं क्योंकि शिक्षा जब तक व्यक्ति के आचरण में न झलकने लगे, तब तक वो अधूरी है।


दोस्तों, कोई भी इंसान कितना भी ज्ञानी क्यों ना हो, जब तक उसमें सभ्यता, नम्रता, अनुशासन, प्रेम, दया, सहनशीलता और परोपकार जैसे गुण नहीं होंगे, तब तक उसकी शिक्षा समाज के लिए कोई विशेष उपयोगी नहीं होगी। जैसा हमने पूर्व के उदाहरण में समझा था, एक बीज के फलने-फूलने के लिए सिर्फ़ अच्छी उपजाऊ मिट्टी, उत्तम बीज, खाद, पानी आदि का होना पर्याप्त नहीं है, ठीक वैसे ही इंसान को महान बनने के लिए केवल डिग्री और ज्ञान ही नहीं, बल्कि संस्कार और चरित्र की भी आवश्यकता होती है।


मेरी नजर में तो अच्छे संस्कार देना और चरित्र निर्माण करना ही विद्या का असली उद्देश्य है। दूसरे शब्दों में कहूँ तो विद्या का उद्देश्य सिर्फ़ जानकार नहीं बल्कि विवेकशील और संवेदनशील मानव बनाना है। इस आधार पर कहा जाए तो एक सच्चा विद्वान वही होता है जो अपने ज्ञान का प्रयोग दूसरों की भलाई के लिए करे। जो अपने व्यवहार से दूसरों को प्रेरणा दे, और समाज को बेहतर दिशा में ले जाए।


याद रखियेगा दोस्तों, अगर हमारे भीतर करुणा नहीं होगी, तो हमारी बुद्धि कठोर बन जाएगी। इसी तरह अगर हमारे पास नम्रता नहीं होगी, तो हमारा ज्ञान अहंकार में बदल जाएगा और अगर जीवन में अनुशासन नहीं होगा, तो हम अपनी क्षमताओं का भी सही उपयोग नहीं कर पायेंगे।


सच्चा विकास केवल ज्ञान से नहीं, गुणों से होता है। आज की दुनिया को विद्वानों की नहीं, संवेदनशील और चरित्रवान इंसानों की आवश्यकता है। इसलिए मेरा मानना है कि इस दुनिया को और बेहतर बनाने के लिए हमें अपने भीतर उन मानवीय गुणों को विकसित करना होगा जो समाज को एकजुट रख सकें। तभी हमारी शिक्षा सार्थक होगी। तभी हमारा जीवन वास्तव में सफल होगा। इसलिए हमेशा याद रखें, विद्या वही सार्थक है, जो विनम्रता सिखाए, ज्ञान वही उपयोगी है, जो करुणा जगाए और जीवन वही महान है, जो दूसरों के लिए कुछ कर पाए।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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