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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

विवेकपूर्ण जिएँ, मस्त रहें !!!

Mar 11, 2024

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…



चलिए दोस्तों, आज के लेख की शुरुआत एक काल्पनिक स्थिति से करते हैं। मान लीजिए अतिरिक्त बारिश के कारण एक शहर में बाढ़ आ गई। बाढ़ का तेज गति से बहता पानी अपने साथ राह में आने वाली हर चीज को बहा कर ले जा रहा था। फिर चाहे वह गाड़ी हो या जानवर अथवा कोई अन्य सामान। बाढ़ का बहाव अचानक ही नदी के कच्चे किनारे को तोड़कर अपने साथ बहा कर ले जाने लगा। अचानक आई इस मुसीबत के कारण एक बच्चा और एक युवा नदी में गिर गये और बाढ़ के पानी के साथ बहने लगे। संयोग से युवा एक कुशल तैराक था। उसने तुरंत स्थिति की गंभीरता को समझा और अपने कौशल का उपयोग कर तैरते हुए बाढ़ में बहते या यूँ कहूँ डूबते बच्चे को बचाकर किनारे ले आया।


इस क़िस्से के माध्यम से दोस्तों मैं सिर्फ़ इतना कहना चाहता हूँ कि एक कुशल तैराक अपनी तैरने की कला से बाढ़ को मात देते हुए ना सिर्फ़ ख़ुद की जान बचाता है अपितु अन्य कई लोगों के जीवन को भी बचाने में सहायक होता है। ठीक यही स्थिति विवेकवान और बुद्धिमान लोगों की होती है। वे विवेक और बुद्धि से ना सिर्फ़ ख़ुद इस भवसागर को सफलता पूर्वक पार कर लेते हैं, बल्कि अपने संपर्क में रहने वाले लोगों को भी इस भवसागर को पार करने में मदद करते हैं।


इसीलिए दोस्तों मेरा मानना है कि सिर्फ़ और सिर्फ़ विवेकवान और बुद्धिमान बन कर ही जीवन को पूर्णता के साथ जिया जा सकता है; इस दुनिया को बेहतर बनाया जा सकता है क्योंकि विवेकवान और बुद्धिमान व्यक्ति ही समस्या को चुनौती के रूप में देख पाता है। इसीलिए वह जीवन की प्रत्येक परिस्थिति, फिर चाहे वह किसी वस्तु या व्यक्ति या फिर अवस्था के कारण बनी हो, को अपने अनुकूल कर पाता है। इसलिए दोस्तों, प्रत्येक क्षण ईश्वर से एक ही प्रार्थना करो कि आप मुझे अपने आशीर्वाद के साथ सिर्फ़ और सिर्फ़ बुद्धि और विवेक दो। जिससे मैं ख़ुद को इतना क्षमतावान बना सकूँ कि मुझे सभी समस्याएँ चुनौती लगने लगें और मैं उन पर विजय पा सकूँ।’


वैसे भी दोस्तों, समस्याओं को चुनौती मानना, उनपर पहली विजय प्राप्त करना है। इसलिए मेरा मानना है कि जीवन में आने वाली सभी विपरीत परिस्थितियों, समस्याओं और अभावों को आधार बनाकर रोना और भीड़ का हिस्सा बनने से बेहतर है, उन्हें चुनौतियाँ मान कर, उनका सामना करना। जब आप विपरीत परिस्थितियों और समस्याओं को चुनौती मान कर उनका सामना करते हैं तो हारने पर आपको अनुभव मिलता है और जीतने पर आत्मविश्वास बढ़ता है। वैसे विवेक पूर्ण जीवन जीने का एक और फ़ायदा है, आप अपने जीवन को कुशलता पूर्वक जी पाते हैं और कुशलतापूर्वक जिया गया जीवन; समाज के लिए आदर्श स्थापित कर पाता है।


याद रखियेगा दोस्तों, विवेक कभी भी आपका नुक़सान नहीं होने देता है; आपका पतन नहीं होने देता है। इसीलिए कहा गया है, ‘जीवन में विवेकयुक्त होकर कार्य करना ही मनुष्यता है अथवा जो विवेक पूर्ण कार्य करे वही मनुष्य है।’ इसलिए दोस्तों आइये आज हम सब मिलकर ये प्रेरणा लेते हैं कि अब हम हर स्थिति-परिस्थिति में विवेकपूर्ण जीवन जिएँगे।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

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