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शक्ति संगति की…

Writer: Nirmal Bhatnagar
Nirmal Bhatnagar
Aug 20, 2025
3 min read

Aug 20, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, जीवन में हर इंसान अपने भीतर अच्छाइयों और बुराइयों का संगम लिए चलता है। कभी वह अपनी आदतों से जकड़ा होता है, तो कभी परिस्थितियाँ उसे जकड़ लेती हैं। लेकिन इन सब जकड़नों के बीच भी एक चीज़ है, जो इंसान के व्यक्तित्व को गहराई से गढ़ती है – संगति।


जी हाँ दोस्तों, संत समान लोगों का संग हर इंसान के लिए एक दिव्य अवसर होता है। अगर भाग्य से किसी व्यक्ति को संत या संत समान व्यक्ति का सानिध्य मिल जाए तो यह जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है क्योंकि ऐसे लोग केवल उपदेश नहीं देते, वे अपनी उपस्थिति, अपनी कार्यशैली से ही हमें बदल देते हैं। वे एक आईने की तरह होते हैं, जिसमें हम अपनी कमियों को साफ देख सकते हैं और उन्हें दूर करने की प्रेरणा पा सकते हैं। इसलिए ही भारतीय दर्शन में कहा जाता है, “संत इत्र की तरह होते हैं – वे पास से गुजरें तो भी जीवन महक जाता है।” आइए इसी बात को हम एक प्रसंग से समझने का प्रयास करते हैं-


एक बार एक व्यक्ति एक संत के पास पहुँचा और उन्हें अपने जीवन की सारी ग़लतियाँ बताने लगा। उस शिष्य की कमजोरियों और ग़लतियों को सुनने के बाद संत ने उसे सीधे डांटा नहीं, बल्कि प्रेम से उसका मार्गदर्शन किया और अंत में कहा, “तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो, आज से यदि तुम पाप करोगे तो उसका दंड मैं भोगूँगा।” यह वाक्य शिष्य के भीतर गहरे तक उतर गया। अब हर बार जब वह बुरी आदत में फँसने वाला होता, उसे यह याद आता कि उसका किया हुआ पाप गुरु पर बोझ बनेगा। धीरे-धीरे उसकी आत्मा बदलने लगी और उसकी कमजोरियाँ ढीली पड़ गईं।


दोस्तों, उस व्यक्ति में आया बदलाव बाहरी दबाव नहीं बल्कि संगति की वजह से भीतर से उपजी सजगता और शक्ति थी। जी हाँ दोस्तों, हमारे जीवन की दिशा और दशा इस बात पर निर्भर करती है कि हम किसके संपर्क में रहते हैं। अगर संगति अच्छी होगी तो हमें ऊँचाई तक ले जाएगी और अगर बुरी होगी तो हमें धीरे-धीरे नीचे गिरा देती है। याद रखियेगा, इंसान अक्सर अपने मित्रों और परिवेश से ही आदतें अपनाता है। यही कारण है कि महापुरुषों ने कहा है, “जैसी संगत, वैसा रंगत।” यदि हम अच्छे विचारों और सत्संग का हिस्सा बनते हैं तो हमारी सोच स्वाभाविक रूप से सकारात्मक होती जाती है।


वैसे दोस्तों, हम सब उपरोक्त बात को जानते हैं लेकिन आज की व्यस्त और प्रतिस्पर्धी दुनिया में कई बार तनाव और गलत आदतों का शिकार हो जाते हैं। उदाहरण के लिए नशा, आलस्य या नकारात्मक सोच जैसी आदतें हमारे जीवन को बांध लेती है। ऐसे में संतों या अच्छे मित्रों का संग और प्रेरणादायक पुस्तकों का साथ ही हमें सही रास्ता दिखा सकता है; हमारे जीवन को नया मोड़ दे सकता है।


यह भी सच है दोस्तों कि हम अपना परिवार नहीं चुन सकते, लेकिन मित्र और संगति चुनने का अधिकार हमारे पास होता है। इसलिए मित्र या साथ चुनते वक्त ध्यान रखें कि जो इंसान हमें ऊपर उठा रहा है, ग़लतियाँ करने से बचा रहा है, वह संगति करने योग्य है और जो इंसान हमें नीचे खींच रहा है, वह संगति त्यागने योग्य है। दूसरे शब्दों में कहूँ तो, “यदि आप सफल और खुशहाल होना चाहते हैं, तो ऐसे लोगों के साथ समय बिताइए जो आपको प्रेरित करें, गिराएँ नहीं।”


याद रखिएगा दोस्तों, जीवन का वास्तविक उत्थान बाहर से नहीं, भीतर से होता है और भीतर जागृति जगाने में संतों, अच्छे मित्रों और सकारात्मक विचारों का संग सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि संत हमारे भीतर के सत को जगाते हैं। अच्छे मित्र हमारी अच्छाइयों को पोषित करते हैं और अच्छी संगति हमें वह बना देती है जो हम बनना चाहते हैं। इसलिए जीवन में हमेशा संगति का ध्यान रखें। क्योंकि “संगति बदलती है, तो पूरा जीवन बदल जाता है।”


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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