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शायद जरूरत समझाने की नहीं, समझने की हो…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Jun 3, 2025
  • 3 min read

June 3, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है...

आइए दोस्तों, आज के लेख की शुरुआत एक बड़े ही फेमस किस्से से करते हैं। बात कई साल पुरानी है, रॉल्फ़ नाम के एक सज्जन व्यक्ति को लगा कि उसकी पत्नी आजकल ऊँचा सुनने लगी है अर्थात् उसे अब कम सुनाई देने लगा है और अब उसे हियरिंग ऐड की जरूरत है। लेकिन यह बात वे अपनी पत्नी को नहीं कह पा रहे थे और इसीलिए उलझन में रह रहे थे। काफ़ी सोच-विचार करने के बाद, एक दिन उन्होंने इस विषय में अपने पारिवारिक डॉक्टर से सलाह लेने का निर्णय लिया और उन्हें फ़ोन पर सारी स्थिति से अवगत करवाया।


डॉक्टर बोले, “इसमें ज्यादा चिंता करने की कोई बात नहीं है, हम एक ग़ैर-आधिकारिक टेस्ट से समस्या की गंभीरता का अंदाजा लगा सकते हैं। आप 40 फीट की दूरी से अपनी पत्नी से सामान्य आवाज में कुछ पूछना, अगर उन्होंने सही जवाब दिया तो सब-कुछ सामान्य है और अगर वे कोई प्रतिक्रिया ना दें तो फिर 30 फीट, फिर 20 फीट, फिर 10 फीट से प्रयास करना और तब तक करते रहना जब तक वे जवाब ना दे दें।”


उन सज्जन को डॉक्टर का विचार पसंद आया। शाम को जब वे ड्राइंग रूम में बैठे थे और पत्नी खाना बना रही थी तब उन्होंने सोचा, मैं अभी लगभग 40 फीट दूर हूँ। चलो अब देखते हैं कि पत्नी सामान्य आवाज को सुन पाती है या नहीं। विचार आते ही उन्होंने सामान्य आवाज़ में पत्नी से प्रश्न किया, “डार्लिंग, आज खाने में क्या बना रही हो?” लेकिन उन्हें पत्नी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सुनाई नहीं दी।


फिर वे 30 फीट की दूरी तक गए और बोले, “डार्लिंग, आज खाने में क्या बना रही हो?” इस बार भी पत्नी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसके बाद उन्होंने 20 फीट की दूरी से यही सवाल दोहराया, “डार्लिंग, आज खाने में क्या बना रही हो?” लेकिन इस बार भी उन्हें पत्नी से कोई उत्तर नहीं मिला। अंत में वे 10 फीट की दूरी पर स्थित किचन के दरवाज़े तक गए और बोले, “डार्लिंग, आज खाने में क्या बना रही हो?” इस बार भी उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।


रॉल्फ़ को अब विश्वास हो गया था कि उनकी पत्नी की सुनने की क्षमता काफ़ी कम हो गई है और अब उन्हें डॉक्टर से सलाह लेकर हियरिंग ऐड लगवा लेना चाहिए। इन विचारों के साथ वे अपनी पत्नी के बिल्कुल पास गए और अपना प्रश्न दोहराते हुए बोले, “डार्लिंग, आज खाने में क्या बना रही हो?” प्रश्न सुनते ही पत्नी गुस्से में आ गई और पलटकर गुस्से में चिढ़ते हुए ज़ोर से बोली, “राल्फ! पाँचवीं बार कह रही हूँ, चिकन!!!”


दोस्तों, कहने की जरूरत नहीं है कि आगे क्या हुआ होगा और कौन डॉक्टर के पास जाकर हियरिंग ऐड लगवा कर आया होगा। खैर इस किस्से को यहीं छोड़िये और जरा गंभीरता से सोच कर देखिए कहीं ना कहीं, ऐसा ही कुछ सामान्य ज़िंदगी में हम सभी के साथ होता है। हम भी अक्सर यही मान कर चलते हैं कि समस्या सामने वाले व्यक्ति में है या सारी गलतियों का ज़िम्मेदार दूसरा व्यक्ति है। लेकिन सच्चाई अक्सर इसके ठीक विपरीत होती है अर्थात् कई बार समस्या हमारे भीतर ही होती है, और हमें उसका अंदाज़ा तक नहीं होता।


हम दूसरों को दोष देते हैं, उनके रवैये को ग़लत ठहराते या समझते हैं, लेकिन आत्ममंथन और चिंतन करके नहीं देखते कि कहीं गलती हमारी सोच या व्यवहार में तो नहीं है। ठीक उपरोक्त किस्से की तरह जिसमें पति को लगा कि पत्नी को सुनाई नहीं देता, जबकि सुनने की कमी उसके अपने कानों में थी। तो दोस्तों, अगली बार जब भी आपको लगे कि सामने वाले आपकी बात नहीं समझ पा रहे हैं तो एक बार ख़ुद को टटोल कर देखियेगा, शायद जरूरत समझाने की नहीं, समझने की हो।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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