• Nirmal Bhatnagar

शिक्षित होना याने नम्बर लाने वाली मशीन बनना नहीं…

Nov 20, 2022

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, हाल ही में एक प्रतिष्ठित विद्यालय के कक्षा दसवीं के छात्रों से ‘भविष्य के सुरक्षित व्यवसाय’, विषय पर चर्चा करने का मौक़ा मिला। इसी चर्चा के दौरान एक बच्चे ने मुझसे प्रश्न करा, ‘सर, क्या ऑनलाइन कम्प्यूटर गेमिंग के क्षेत्र में कैरियर बनाया जा सकता है?’ हालाँकि मैं पूर्व में कम्प्यूटर के क्षेत्र में ही कार्यरत था और साथ ही आज भी इस क्षेत्र में उपलब्ध नवीन सम्भावनाओं को अच्छे से जानता था, इसलिए प्रश्न का उत्तर देना मेरे लिए बिलकुल भी मुश्किल नहीं था। लेकिन इस प्रश्न के सामने आते ही कक्षा के बदले हुए माहौल ने मुझे कुछ ओर ही इशारा किया और मैंने जवाब देने के स्थान पर बच्चों से ही प्रश्न पूछ, इस परिचर्चा को आगे बढ़ाया। परिचर्चा के आगे बढ़ते ही मुझे पता चला कि उस कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र ने ऑनलाइन गेमिंग के माध्यम से पिछले माह एक लाख रुपए कमाए थे। बिना ज़्यादा पढ़ाई और मेहनत के अपने पसंद का कार्य कर अच्छी ख़ासी रक़म कमाने की वजह से अन्य छात्र उसे ‘रोल मॉडल’ समान देख रहे थे और इसी वजह से इस क्षेत्र में भविष्य की सम्भावनाओं को जानना चाह रहे थे।


प्रश्न पूछने की असली वजह सामने आते ही मेरे विचार बदल गए। अब मुझे लग रहा था कि मुझे बच्चों को इस फ़ील्ड में उपलब्ध सम्भावनाओं के बारे में बताने के साथ-साथ यह भी बताना ज़रूरी है कि किसी की आमदनी, सम्पत्ति, पोजीशन अथवा वैभव को देख प्रेरणा लेना या प्रेरित होना तो ठीक है, लेकिन बिना विचारे उस लक्ष्य को अपना लक्ष्य मानना ग़लत है। ऐसा करना उनके जीवन की एक बड़ी भूल साबित हो सकता है। मैंने उसी पल सभी बच्चों को कैरियर या लक्ष्य चुनने से पहले ध्यान रखने वाली बातों के विषय में बताया।


लेकिन बात अभी यहीं ख़त्म नहीं हुई थी, अभी तो मेरे सामने एक नया प्रश्न और खड़ा था। उस परिचर्चा में भाग ले रहे शिक्षकों को ऑनलाइन गेमिंग से पैसे कमा रहे छात्र से सम्बंधित एक बड़ी समस्या और थी। उनके अनुसार वह बच्चा बिलकुल ग़लत राह पर चल रहा था क्यूँकि इस उम्र में शिक्षकों की बातों को नज़रंदाज़ करना, पढ़ाई में ध्यान ना देना, अनुशासन में ना रहना, उनके अनुसार बिलकुल ग़लत था। वैसे ऊपरी तौर पर देखा जाए तो शिक्षक सही भी थे। लेकिन मेरा मत थोड़ा अलग बन रहा था। मैंने परिचर्चा पूरी होने के बाद शिक्षकों से एक प्रश्न किया, ‘बच्चों को शिक्षा क्यूँ दी जाती है?’ जवाब के तौर पर अन्य कारणों के साथ जो मुख्य बात निकल कर आई वह थी कि, शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को शिष्टाचारी और आत्मनिर्भर बनाना है। ताकि वह अपने और अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित बना सकें।


मैंने तुरंत उन सभी शिक्षकों से कहा, ‘इसी में से तो एक कार्य वह बच्चा आज कर रहा है और रही बात अनुशासन और आपकी बातों को ना मानने की, तो उसकी वजह आप लोग ही हैं। मेरा इतना कहते ही वहाँ कुछ पलों के लिए शांति छा गई। मैंने बात आगे बढ़ाते हुए कहा, ‘हम सभी बच्चों को पढ़ने का कहते हुए बताते हैं कि अच्छा पढ़ोगे तो अच्छा कैरियर बना पाओगे और आज जब वह बच्चा उस लक्ष्य को किसी और तरीके से पूरा कर रहा है तो हमें उचित नहीं लग रहा है। बताइए इस उम्र में कमाने में समस्या क्या है? क्या उसे सिर्फ़ इसलिए ग़लत ठहराना उचित है कि उसके विचार, उसका चुना हुआ रास्ता हमारे विचारों या हमारे द्वारा बताए जाने वाले रास्तों से नहीं मिलता है?’ शायद नहीं…


जी हाँ साथियों, मैंने अक्सर देखा है कि जब भी नई पीढ़ी का कोई बच्चा लीग से हटकर कोई नया कार्य करता है तो हम उसके मत, उसकी सोच को समझे बिना ही पहली बार में ही उसे ग़लत ठहरा देते हैं और इसी वजह से वह हमसे दूर हो जाता है। मैंने शिक्षकों को सुझाव दिया कि सबसे पहले वे उस बच्चे के साथ बैठें और विस्तृत चर्चा कर समझने का प्रयास करें कि वह बच्चा जिस तरह कमाई कर रहा है क्या वह रास्ता नियमों के मुताबिक़ सही है और साथ ही उसमें भविष्य की कितनी सम्भावनाएँ हैं और अगर वे इसे सुरक्षित और सम्भावनाओं से भरा मानते है तो उसके माता-पिता से इस विषय में बात करके इस क्षेत्र में कैरियर बनाने में मदद करें।


याद रखिएगा दोस्तों, शिक्षा या बच्चों के लालन पालन का उद्देश्य कभी भी बच्चे को किताबों में लिखी बातों को याद रखने वाली या अच्छे नम्बर लाने वाली मशीन बनाना नहीं था। उन्हें अच्छा-बुरा समझने, मानवता और इंसानियत के रास्तों पर चल, उच्च जीवन मूल्यों के साथ जीवन जीने लायक़ बनाना था। ताकि वे सीख सकें कि उन्हें जीवन में सफलता किसी भी मूल्य पर नहीं, सिर्फ़ सही मूल्य पर प्राप्त करना है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

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