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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

सकारात्मक परवरिश के 7 नियम…

Apr 14, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

हर माता-पिता के लिए उनकी संतान उनका पूरा संसार होती है। इसीलिए हर हर माता-पिता अपने बच्चों के 360 डिग्री डेवलपमेंट को ध्यान में रखकर अच्छी से अच्छी परवरिश करना चाहता है। इसीलिए वह उसे अच्छे से अच्छे विद्यालय भेजता है, घर पर संस्कार देने का प्रयास करता है और विभिन्न योग्यताओं के विकास के लिए उसे हॉबी क्लास भी भेजता है क्योंकि वह चाहता है कि उनका बच्चा किसी भी क्षेत्र में कमजोर ना रह जाए। लेकिन इसके बाद भी कई बार जाने-अनजाने या मज़ाक़-मज़ाक़ में ही माता-पिता बच्चों की परवरिश में ऐसी भूल कर जाते हैं जो उनके बच्चे के विकास की राह का रोड़ा बन जाती है।


जी हाँ साथियों, अक्सर माता-पिता यह भूल जाते हैं कि उनके मज़ाक़ या उनके बोले गए शब्द का असर बालमन पर क्या होगा। इसीलिए मेरा मानना है कि बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए हमेशा सत्य बोलो, लेकिन मीठा बोलो। उदाहरण के लिए जैसे कई माता-पिता अपने बच्चों को उनकी ऊँचाई के आधार पर छोटू या लम्बू कहकर तो उनकी त्वचा के रंग के आधार पर कालू कहते हैं तो कई बार अच्छे नम्बर ना लाने पर मंदबुद्धि तो देर से समझने वाले बच्चे को ट्यूबलाइट कहकर सम्बोधित करते हैं। एक-दो-चार बार ऐसा कहा जाए तो कोई बात नहीं, लेकिन अगर आप उसका नाम उपरोक्त शब्दों से बदल देंगे तो बीतते समय के साथ उसे यह सुनना बुरा लगने लगेगा।


याद रखिएगा दोस्तों, बच्चे तार्किक आधार पर नहीं सोचते अपितु उन्हें जो भी कहा जाता है वे उसे चलचित्र की माफ़िक़ अपने सामने घटित होता हुआ महसूस करते हैं। इसलिए जब आप उसे कोई बात जैसे, बड़ा होकर ठेला चलाएगा या रिक्शा चलाएगा, बार-बार कहते हैं तो वह खुद को उसी रूप में देखने लगता है। इतना ही नहीं दोस्तों, इस तरह की बातों को बार-बार कहना बच्चों को डिप्रेशन, तनाव और चिड़चिड़ेपन का शिकार भी बना सकता है। ठीक इसी तरह, जब आप किसी बच्चे को बार-बार पागल कह कर बुलाएँगे तो एक दिन वह अवश्य पागल हो जाएगा, यह एक मनोवैज्ञानिक सत्य है। इसलिए दोस्तों, मेरा हर पालक को सुझाव है कि वह बच्चों से कुछ भी कहते वक्त इस बात का विशेष ध्यान रखे कि उनके शब्दों से बच्चे के दिल पर चोट ना लगे।


वैसे भी दोस्तों, इस दुनिया में हर इंसान की एक ही इच्छा होती है कि लोग उसका सम्मान करें; उसके अच्छे कार्यों को सराहे। यही भावना स्वाभाविक रूप से हर बच्चे में भी होती है। याने हर छोटा बच्चा भी यही चाहता है कि लोग उसके द्वारा किए गए कार्यों को ध्यान से देखें याने उसकी ओर आकर्षित हों और उसके क्रिया कलाप याने किए गए कार्यों की प्रशंसा करें। ऐसी ही कई स्वाभाविक बातों या सोच या फिर अपेक्षाओं के साथ बच्चा अपने जीवन में आगे बढ़ता है; उसके सामाजिक विकास का क्रम आगे बढ़ता है। इसलिए दोस्तों, बच्चों की परवरिश के दौरान निम्न बातों का विशेष ध्यान रखें।


1) आलोचना, निंदा तथा शिकायत के स्थान पर बच्चों से कही जाने वाली हर बात को सकारात्मक भाषा में कहें। जैसे अगर उसने किसी कार्य को ग़लत तरीके से करा है, तो उसे ग़लत कहने के स्थान पर कहें कि इस कार्य को इस तरह और बेहतर तरीके से किया जा सकता था।


2) हर छोटी बात पर बच्चों को सजा ना दें और कभी सजा देना आवश्यक भी हो रहा है तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बच्चे को सजा का कारण अच्छे से समझ आ जाए। अर्थात् उसे अच्छे से समझाएँ कि उससे गलती कहाँ हुई है और अब वह उसे दोहराए नहीं। अन्यथा सजा उसमें आत्म हीनता की भावना जागृत कर सकती है।


3) जीवन में अनुशासन का अपना महत्व है, लेकिन अनुशासन सिखाने का अर्थ यह नहीं है कि आप उसे बात-बात पर डाँटें।


4) तुलना ना करें। कई बार हम अपने बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों या उसके छोटे भाई-बहन से करना शुरू कर देते है, इससे बच्चा हीन भावना से ग्रसित हो सकता है या उसका उन लोगों के साथ रिश्ता हमेशा के लिए ख़राब भी हो सकता है।


5) बच्चों के सामने वह व्यवहार ना करें जिसकी अपेक्षा आप उनसे नहीं करते हैं क्योंकि बच्चे आदेश या बातों के मुक़ाबले अपने सामने घटने वाली घटनाओं से ज़्यादा सीखते हैं।


6) बच्चों का मनोबल बढ़ाने एवं आत्मसम्मान जागृत करने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करना बहुत ज़रूरी है। अन्यथा बच्चे खुलकर कार्य नहीं कर पाते हैं और इससे कहीं ना कहीं उनकी ग्रोथ प्रभावित होती है।


7) अगर आपका बच्चा आपसे कह रहा है कि उसके दोस्त, उसे आपसे बेहतर समझते हैं या यह मेरी ज़िंदगी है मैं देख लूँगा या मैं अपने फ़ैसले लेने में सक्षम हूँ या आप बहुत पुरानी विचारधारा या जनरेशन के हो या मेरे दोस्त के मम्मी-पापा मुझे ज़्यादा बेहतर तरीके से समझते हैं या फिर इस परिवार में पैदा होकर मैं पछता रहा हूँ तो इसका अर्थ है आपके और आपके बच्चे के बीच के रिश्ते में दूरी आ गई है। इसे दूर करने के लिए आपको अपने बच्चे के साथ संवाद को बढ़ाना होगा।


आशा करता हूँ दोस्तों, उपरोक्त टिप्स को रोज़मर्रा के जीवन में काम में लेकर आप सकारात्मक पेरेंटिंग का लुत्फ़ उठाएँगे और अपने बच्चे के लिए देखे गए सपने को एक बेहतरीन रिश्ते के साथ पूर्ण करेंगे।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर


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