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सच्ची सफलता अकेले ऊपर उठने में नहीं बल्कि उठने के बाद भी जमीं से जुड़े रहने में है…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Jun 12
  • 3 min read

June 12, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, जीवन की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक यह है कि हम अक्सर उन चीज़ों को लेकर सबसे अधिक चिंतित रहते हैं जिन्हें हम पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकते, और उन चीज़ों की उपेक्षा कर देते हैं जो वास्तव में हमारे हाथ में होती हैं। हम दूसरों के व्यवहार को नियंत्रित करना चाहते हैं, भविष्य को सुनिश्चित करना चाहते हैं और हर परिस्थिति को अपने अनुसार देखना चाहते हैं। लेकिन जीवन का वास्तविक सौंदर्य अनिश्चितताओं के बीच भी विश्वास बनाए रखने में है। कहा गया है कि जीवन सबसे कमजोर तब होता है जब हमारे भीतर विश्वास से अधिक संदेह होता है, और जीवन सबसे मजबूत तब होता है जब संदेहों के बावजूद विश्वास करना सीख जाते हैं। ध्यान दीजिए, विश्वास का अर्थ यह नहीं कि हमारे पास सभी प्रश्नों के उत्तर हों। विश्वास का अर्थ है कि उत्तर न होने पर भी हम आगे बढ़ने का साहस रखें।


एक किसान जब बीज बोता है, तो उसे यह निश्चित रूप से नहीं पता होता कि फसल कैसी होगी। फिर भी वह बीज बोता है। एक विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी करता है, उसे परिणाम नहीं पता होता। फिर भी वह प्रयास करता है। एक माता-पिता बच्चे का पालन-पोषण करते हैं, उन्हें भविष्य दिखाई नहीं देता। फिर भी वे प्रेम और विश्वास के साथ अपना कर्तव्य निभाते हैं। यही विश्वास जीवन को आगे बढ़ाता है।


दोस्तों, लेकिन विश्वास केवल दूसरों पर ही नहीं, स्वयं पर भी होना चाहिए। दुर्भाग्य से हम अक्सर स्वयं के सबसे कठोर आलोचक बन जाते हैं। छोटी-सी गलती पर स्वयं को दोषी ठहराते हैं। अपनी कमियों को बढ़ा-चढ़ाकर देखते हैं और अपनी अच्छाइयों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। जरा सोचिए, यदि आपका कोई प्रिय मित्र कोई गलती कर दे तो क्या आप उससे उसी कठोरता से बात करेंगे, जिस तरह आप स्वयं से करते हैं? शायद नहीं। फिर स्वयं के प्रति इतनी कठोरता क्यों? अपने साथ दया, समझ और धैर्य का व्यवहार कीजिए। अपनी कमियों को स्वीकार कीजिए। याद रखिए, पूर्णता केवल कल्पना में होती है, वास्तविक जीवन में नहीं। हर व्यक्ति में कुछ कमियाँ होती हैं। हर व्यक्ति कभी न कभी गलत निर्णय लेता है। हर व्यक्ति जीवन की यात्रा में सीखता है, गिरता है और फिर उठता है। इसलिए अपनी गलतियों को अपनी पहचान मत बनाइए। उन्हें अपनी शिक्षा बनाइए।


दोस्तों, जीवन में एक समय ऐसा भी आता है जब हर तरफ से सलाह मिलने लगती है। लोग बताएँगे कि आपको क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, किस रास्ते पर चलना चाहिए और किससे बचना चाहिए। सलाह सुनना अच्छी बात है, लेकिन अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। यदि आपका मन शांत है, आपका उद्देश्य स्पष्ट है और आपकी नीयत सही है, तो हर आवाज़ के पीछे भागने की आवश्यकता नहीं है। दुनिया का शोर अक्सर हमें भ्रमित करता है, लेकिन अंतरात्मा की आवाज़ हमें दिशा देती है और अंत में, प्रकृति हमें प्रतिदिन एक गहरा संदेश देती है। क्या आपने कभी सोचा है कि पृथ्वी में गुरुत्वाकर्षण क्यों है? वैज्ञानिक इसका उत्तर भौतिकी में देंगे, लेकिन जीवन हमें इसका एक और अर्थ सिखाता है। शायद प्रकृति हमें हर दिन याद दिलाना चाहती है कि चाहे हम कितनी भी ऊँचाइयाँ क्यों न छू लें, हमारे पैर हमेशा ज़मीन पर रहने चाहिए। सफलता आए तो विनम्र रहिए। सम्मान मिले तो संतुलित रहिए। प्रशंसा मिले तो अहंकार से बचिए। क्योंकि वृक्ष पर फल जितने अधिक लगते हैं, उसकी शाखाएँ उतनी ही अधिक झुक जाती हैं।


दोस्तों, विश्वास आपको आगे बढ़ने की शक्ति देता है। आत्मस्वीकृति आपको भीतर से मजबूत बनाती है और विनम्रता आपको महान बनाती है। जीवन की सच्ची सफलता ऊँचा उठने में नहीं, बल्कि ऊँचा उठकर भी ज़मीन से जुड़े रहने में है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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