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सच्चे साहस और क्षमा की शक्ति…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • May 23, 2025
  • 3 min read

May 23, 2024

फिर भी ज़िंदगी हसीन है...

दोस्तों, आपने सामान्य बातचीत के दौरान निश्चित तौर पर किसी व्यक्ति विशेष के लिए इस तरह की टिपण्णी सुनी होगी, “अरे! वह तो बड़ा साहसी है…” या “वह तो बड़ा बहादुर है…” या फिर “वह तो बड़ा दम वाला है…” लेकिन दोस्तों, क्या साहस का एक ही रूप होना संभव है? या एक ही व्यक्ति हर परिस्थिति में एक समान साहसी या निडर रह सकता है? मेरी नजर में तो नहीं।


जी हाँ, किसी भी इंसान में साहस, बहादुरी या कोई भी गुण हर परिस्थिति में समान नहीं हो सकता है। उदाहरण के लिए एक सैनिक दुश्मन की गोली के सामने सीना तान कर खड़ा हो सकता है, लेकिन डॉक्टर के ऑपरेशन के चाकू से डर सकता है। ठीक इसी तरह एक इंसान कठिन से कठिन सर्जरी के दौरान सामान्य रह सकता है लेकिन युद्ध के नाम से ही डर जाता है।


इसलिए दोस्तों, कभी भी, किसी की भी आलोचना करने या उसे कायर, डरपोक या कमजोर समझने से पहले यह समझ लेना ज्यादा जरूरी है कि उस व्यक्ति के अंदर भी कोई ऐसी योग्यता, विशेषता या ताक़त हो सकती है जो हमारे अंदर ना हो। कुल मिलाकर कहूँ तो किसी भी इंसान को कमजोर या ताकतवर ठहराने या उसका किसी भी तरह से मूल्यांकन करने के पहले स्पष्ट पैमाना परिभाषित करना जरूरी है। याद रखियेगा, सच्ची महानता इसमें नहीं है कि हम दूसरों से बेहतर हैं, बल्कि इसमें है कि हम रोज़ खुद से बेहतर बनने की कोशिश करते हैं।


ठीक इसी तरह क्षमा याने माफ़ करना भी एक ऐसा गुण है जो हमें बेहतर बनाता है। क्षमा बीते हुए कल को तो नहीं बदल सकती है, लेकिन वह हमारे वर्तमान को आसान बनाकर, हमारे भविष्य को बेहतर और सुनहरा बना देती है। जब हम किसी को माफ करते हैं, तो हम अपने दिल से बोझ हटाते हैं। हम खुद को एक नई शुरुआत करने की अनुमति देते हैं। इसलिए मैं माफ करने की क्षमता को हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी सबसे बड़ी ताकत मानता हूँ।


ठीक ऐसी ही विरोधाभासी सोच हम मुश्किल या चुनौती भरे वक्त के समय में भी रखते हैं। जब हम कठिनाइयों भरे या चुनौती भरे दौर से गुजरते हैं, तब हमें लगने लगता है कि संभवतः हम कहीं ना कहीं ग़लतियाँ कर रहे हैं। पर वास्तव में हमेशा ऐसा होता नहीं है। कई बार हम बड़े लक्ष्यों का पीछा कर रहे होते हैं और हमारा रास्ता सही, लेकिन कठिन होता है। इसलिए ही हमारे जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं। दूसरे शब्दों में कहूँ, तो सही रास्ते पर चलते वक्त भी आपका सामना मुश्किलों से हो सकता है। वैसे भी कहा ही जाता है, “सच्चाई का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता। अच्छाई के मार्ग पर चलने वालो की परीक्षा अक्सर कड़ी होती है।” इसलिए दोस्तों, जब जीवन कठिन और चुनौतीपूर्ण लगे, तब रुकियेगा नहीं, बस अपने लक्ष्यों को याद कर समझियेगा कि आप सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।


दोस्तों, अंत में इतना ही कहना चाहूँगा कि जीवन में अगर वाक़ई सफलता चाहते हैं तो लोगों को माफ करते हुए जीवन में आगे बढ़िए, फिर भले ही उन्होंने आपको नुक़सान ही क्यों ना पहुंचाया हो। हाँ, बस माफ़ करते वक्त याद रखियेगा कि ऐसा आपने सिर्फ़ अपने मन की शांति के लिए करा है। इसी तरह जो लक्ष्य आपको डरा रहा है, उसे ही पाने के लिए मेहनत कीजिए, वही संभवतः आपको जीवन के सबसे सुनहरे दौर की ओर ले जायेगा। आपका आज का धैर्य ही कल की महानता का बीज है। याद रखियेगा, डर के बावजूद आगे बढ़ना, तकलीफ़ के बाद मुस्कुराना और चोट खाने के बाद भी माफ कर देना ही जीवन का असली साहस है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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