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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं…

June 24, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, सफलता एक ऐसा फल है जिसे हर कोई, हर हाल में चखना चाहता है। लेकिन भागमभाग भरे इस युग में, समय से पूर्व इस फल को चखने की चाह में वह कई बार भटक जाता है और सफलता सही नहीं, किसी भी मूल्य पर पाने का प्रयास करता है। जी हाँ साथियों, अवास्तविक समय सीमा में अवास्तविक लक्ष्यों को पाने की चाह ही सामान्यतः किसी भी व्यक्ति की असफलता का प्रमुख कारण बनती है और कई बार किसी एक व्यक्ति की नादानी का मूल्य पूरा परिवार चुकाता है। अपनी बात को मैं आपको सोशल मीडिया पर पढ़ी एक कहानी से समझाने का प्रयास करता हूँ।


झील के समीप एक पेड़ के नीचे एक साँप रहता था। बुढ़ापे के कारण वह साँप इतना कमजोर हो गया था कि उसके लिए रोज़ शिकार करना तक असम्भव हो गया था। कमजोरी का आलम यह था कि वह फुफकारता भी था तो उसकी साँस फूल ज़ाया करती थी। इसी वजह से वह अब ज़्यादातर समय अपने बिल या पेड़ के नीचे ऐसे ही पड़ा रहता था। जो चूहे उससे पहले डरा करते थे अब वे उसके ऊपर से कूद कर निकल ज़ाया करते थे।


अब साँप रोज़ इसी उधेड़बुन में रहता था कि किसी तरह रोज़ भोजन का प्रबंध हो जाए। एक दिन इसी उधेड़बुन में साँप चलते-चलते झील के किनारे पहुँच गया और वहाँ उसकी नज़र झील में रहने वाले ढेर सारे मेंढकों पर पड़ी। उन्हें देख वह सोचने लगा किसी तरह अगर में इनका विश्वास जीत लूँ तो मेरी समस्या का हल हमेशा के लिए निकल जाएगा। अभी वह इसी विचार को लिए टहल रहा था कि उसकी नज़र पास ही पड़ी एक चट्टान के ऊपर बैठे मेंढकों के राजा पर पड़ी। साँप ने उन्हें देखते ही जोर से कहा, ‘मेंढकों के राजा की जय हो।’


दुश्मन के मुँह से अपनी जय-जयकार सुन मेंढक राजा चौंक गए और बोले, ‘तुम तो हमारे बैरी हो, फिर हमारी जय-जयकार क्यों कर रहे हो?’ साँप ने मनगढ़ंत कहानी बनाते हुए कहा, ‘महाराज, भूल जाइए पुरानी बातों को, अब तो मैं आप लोगों की सेवा कर अपने पुराने पापों को धोना चाहता हूँ। यही मेरे नाग गुरु का आदेश है।’ साँप की बात सुन मेंढक राजा बोले, ‘तुम अपने पापों का प्रायश्चित क्यों करना चाहते हो और तुम्हें नागराज ने ऐसा विचित्र आदेश क्यों दिया है?’ साँप ने एक कहानी गढ़ते हुए कहा, ‘महाराज एक रात भगवान कृष्ण ने मुझे सपने में दर्शन देते हुए कहा, मैं तुम्हें श्राप देता हूँ कि तुम एक साल में पत्थर के बन जाओगे।’ जब मैंने उनसे इसकी वजह पूछी तो वे बोले, ‘तुमने मेंढकों को बहुत परेशान किया है ना इसलिए।’ अगले दिन जब मैंने अपने गुरु से इस विषय में बात करी तो उन्होंने बताया कि ईश्वर का श्राप हमेशा सच होता है। जब मैं उनके सामने बहुत गिड़गिड़ाया तो उन्होंने बड़ी मुश्किल से श्राप से मुक्त होने का उपाय बताते हुए कहा कि अगर मैं वर्ष के अंत तक मेढकों की सेवा करूँ, उन्हें अपनी पीठ पर बैठाकर सैर कराऊं तो मैं श्राप से मुक्त हो सकता हूँ।’


साँप की बात सुन मेंढकों के राजा आश्चर्यचकित थे। वे सोच रहे थे कि अगर यह बात सच हो गई तो इस अनोखे कार्य के कारण मैं समाज में सम्मान का अधिकारी हो जाऊँगा। सांप की पीठ पर सवारी करने और सभी मेंढकों को कराने का श्रेय मुझे मिल जाएगा। विचार मन में आते ही मेंढकों के राजा ने झील में डुबकी लगाई और सभी मेंढकों को इकट्ठा कर सारी बात कह सुनाई। सभी मेंढक भौंचक्के रह गए, कोई विरोध कर रहा था, तो कोई समर्थन। अंत में जब एक बुजुर्ग मेंढक ने समर्थन किया तो कुछ मेंढक साँप की पीठ की सवारी करने को राज़ी हो गए। मेंढकों के राजा कुछ मेंढकों के साथ बाहर आए और साँप को सारी बात कह सुनाई। साँप ने धन्यवाद कहते हुए राजा सहित सबको अपनी पीठ पर बैठा लिया और उन्हें आस-पास के इलाक़े में घुमाने लगा और अंत में झील के समीप वापस लाकर सबसे निवेदन किया कि वे उसके मुँह कि तरफ़ से उतरें। सभी मेंढकों ने वैसा ही किया। लेकिन जैसे ही अंतिम मेंढक उतरा साँप ने उसे गप्प से खा लिया। अब यही क्रम रोज़ चलने लगा। रोज़ साँप की पीठ पर मेंढकों की सवारी निकलती और पीठ से उतरते समय सबसे पीछे वाले मेंढक को वह खा जाता।


हालाँकि साँप के साथियों ने उसे इस तरह शिकार करने के लिए टोका लेकिन वह नहीं माना। साँप के दिन मज़े से कटने लगे और दूसरी और मेंढकों की संख्या कम होने लगी। एक दिन राजा मेंढक ने इस विषय में साँप से बात करी तो उसने बताया कि बाक़ी मेंढक आस-पास के तालाबों में इस किस्से को साझा करने में लगे है और इसी कारण आपकी ख्याति आस-पास भी बढ़ती जा रही है। मेंढकों का राजा एक बार फिर साँप की बातों में उलझ गया और एक दिन वह भी अपनी नादानी का शिकार बन गया।


जिस तरह दोस्तों, मेंढकों के राजा ने अपना प्रभाव जताने के लिए एक असम्भव सी कहानी पर विश्वास करते हुए खुद के समेत मेंढकों के सारे कुनबे को खत्म करवा दिया था, ठीक इसी तरह आज ज़्यादातर युवा कर रहे हैं। दोस्तों अगर आप उन्हें इससे बचाना चाहते हैं तो हमें उनका सामना समय के साथ जीवन की हक़ीक़तों से करवाना होगा। एक बार विचार कीजिएगा।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर


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