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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

सफलता के लिए जिएँ मूल्य आधारित जीवन…

May 25, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, इस दुनिया में हर कोई सफल और श्रेष्ठ बनकर लोगों से प्रशंसा प्राप्त करना चाहता है, जो स्वाभाविक भी है। पद, पैसे, प्रतिष्ठा, नाम ,मान-सम्मान, पहचान के लिए काम करना कहीं से भी ग़लत नहीं है दोस्तों, लेकिन गलती तब हो जाती है जब आप अपने जीवन मूल्यों से समझौता करते हुए अपने मूल चरित्र से खिलवाड़ करने लगते हैं। किसी भी मूल्य पर सफलता पाने की चाह में आजकल कई लोग साम, दाम, दंड और भेद के सिद्धांत पर चलते हुए उपरोक्त सभी चीजों को जल्द प्राप्त करना चाहते हैं, जो हक़ीक़त में सम्भव ही नहीं है। अपनी बात को मैं आपको एक उदाहरण से समझाने का प्रयास करता हूँ।


लगभग एक वर्ष पूर्व गुजरात की एक संस्था, जो एक नया शैक्षणिक संस्थान खोलना चाहती थी, के द्वारा मुझे कंसलटेंसी के कार्य के लिए बुलाया गया। वहाँ पहुँचने पर जब मैंने उनसे इसका उद्देश्य पूछा तो वे सज्जन बोले, ‘पैसा कमाना!’, जो पूरी तरह ग़लत भी नहीं था क्योंकि हम सब भी अपने जीवन या परिवार को आरामदायक तरीके से चलाने के लिए पैसा कमाते हैं; पैसे के लिए कार्य करते हैं। लेकिन उनके कहने का लहजा कुछ ऐसा था, जिसमें मूल्यों की कमी साफ़ झलकती नज़र आ रही थी। मैंने बात आगे बढ़ाते हुए उनसे अगला प्रश्न पूछा, ‘कैसे?’, तो वे बोले, ‘सर, बड़ा आसान है आप सिर्फ़ हमारा साथ दीजिए, योजना तो हमारे पास है। मैंने मुस्कुराते हुए कहा, ‘आप पहले योजना तो बताइए।’ इस पर वे सज्जन खिलखिलाए और बोले, ‘सर, सिलेक्शन नहीं तो पैसा नहीं, कैम्पेन चलाएँगे और लोगों को मनीबैक गारंटी देंगे।’


आगे बढ़ने से पहले बाता दूँ कि वे सज्जन प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराने के लिए संस्थान खोल रहे थे। इसलिए मुझे गारंटी से सिलेक्शन करवाना असम्भव लग रहा था। पहली मुलाक़ात के आधार पर मैंने खुद को संयमित करते हुए सीधे मना करने के स्थान पर उनसे कहा, ‘फिर तो हमें बच्चों को चुनकर प्रवेश देना पड़ेगा और साथ ही अच्छे शिक्षकों को नौकरी पर रखना होगा।’ मेरी बात सुन वो जोर से खिलखिलाए और बोले, ‘सर हम तो हर किसी को प्रवेश देंगे और जो शिक्षक मिलेंगे उनसे काम चलाएँगे। रही बात गारंटी की, तो हम मान कर ही चल रहे हैं कि हमें कम से कम 75% बच्चों की फ़ीस लौटानी पड़ेगी। हमारी मुख्य कमाई कोचिंग से नहीं होस्टल फ़ीस, मेस और बच्चों को दी जाने वाली अन्य सुविधाओं से होगी। जिस डमी विद्यालय में हम उनको प्रवेश दिलवाएँगे वो भी हमें 50% कमीशन देगा। बाक़ी सारा खेल विज्ञापन का है।’


व्यापारिक नज़रिए से विचार अच्छा था लेकिन इसमें किसी के जीवन के साथ खिलवाड़ होने की सम्भावना थी। इसलिए योजना सुनने के बाद मैंने दूरी का बहाना बना कर, उनसे दूर रहने का निर्णय लिया। वैसे भी दोस्तों, मेरा मानना है की बिना जीवन मूल्य और अच्छे चरित्र के बड़ी सफलता पाना असम्भव है क्योंकि सफलता पद, पैसा, प्रतिष्ठा, नाम-पहचान, मान-सम्मान आदि लक्ष्य नहीं अपितु मूल्यों को आधार बना कर किए गए अच्छे कार्यों का परिणाम होता है। जिस तरह इत्र की ख़ुशबू अपने आप ही वातावरण को महका देती है, ठीक वैसे ही अच्छे चरित्र और मूल्य आधारित कार्यों की महक अपने आप पद, पैसा, प्रतिष्ठा आदि दिलवा देती है।


याद रखिएगा, जीवन में शॉर्टकट नाम की कोई चीज़ नहीं होती। आपके हर अच्छे-बुरे कर्म का साक्षी ईश्वर होता है और वो अंत में आपको उसी के आधार पर परिणाम भी देता है। इसलिए जीवन के इस शाश्वत नियम को आज ही आधार बना लीजिए कि जिस तरह असली फूलों को सेंट या ख़ुशबू लगाकर महकाना नहीं पड़ता है, ठीक उसी तरह अच्छे लोगों को महकने के लिए प्रशंसा या लोगों द्वारा दिए गए अलग-अलग ‘टैगों’ अर्थात् विशेषणों की ज़रूरत नहीं होती है। वो तो अपने श्रेष्ठ कर्मों से खुद के जीवन सहित पूरी दुनिया को सफल बनाने का साहस रखते हैं। याद रखिएगा, जिस तरह पानी पीने से प्यास स्वतः बुझती है, अन्न खाने से भूख स्वतः मिटती है और औषधि खाने से आरोग्यता की प्राप्ति स्वतः हो जाती है। इसी प्रकार अच्छे कर्म करने से जीवन में श्रेष्ठता आती है और समाज में आपका सम्मान स्वतः बढ़ जाता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com


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