सफलता के लिए संकल्प शक्ति है ज़रूरी…
- Nirmal Bhatnagar

- Oct 13, 2023
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Oct 13, 2023
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, इस दुनिया में ज़्यादातर लोग अपने लक्ष्य को क्षमता, योग्यता और साधन होने के बाद भी सिर्फ़ इसलिए नहीं पा पाते हैं क्योंकि वे समय से पहले हार मान कर, बैठ जाते है और अपने सही लक्ष्यों या अपने सही निर्णय को बीच में ही बदल लेते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाये तो मन में उठने वाले विचारों के द्वन्द के कारण अपने लक्ष्य, अपने संकल्प, अपनी क्षमता, अपनी योग्यता, अपनी मेहनत आदि पर ख़ुद ही प्रश्न चिन्ह लगाते हैं और ख़ुद की राह में ख़ुद ही रोड़े बन जाते हैं। यह स्थिति कुछ ऐसी है, जैसे, पानी को उबालने के लिए रखने के बाद उसे 99 डिग्री के तापमान पर यह सोच कर उतार लेना कि यह तो उबल ही नहीं रहा है। अब आप सोच कर देखिए अगर हमने कुछ पलों तक और इंतज़ार कर लिया होता तो क्या होता? निश्चित तौर पर पानी का तापमान 100 डिग्री तक पहुँच जाता और वह उबलने लगता। ठीक इसी तरह दोस्तों जीवन में हार स्वीकारने से पहले सिर्फ़ एक कदम और सही दिशा में चलना आपको सफल या विजेता बना देता है।
जी हाँ दोस्तों, अंतिम समय में उठाया गया अंतिम कदम वाक़ई इतना महत्वपूर्ण होता है। लेकिन यह कदम आदमी सिर्फ़ और सिर्फ़ तब उठा पाता है, जब वह अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्पित हो। इसीलिए कहा जाता है, ‘दृढ़ संकल्पित होने का अर्थ अपने लक्ष्य को आधा प्राप्त कर लेने के समान है और दृढ़ संकल्पित ना होना अपनी सफलता की राह में ख़ुद अवरोध बनना है’ क्योंकि दृढ़ संकल्प रहित व्यक्ति बार-बार अपने निर्णय बदलता है, जो निश्चित तौर पर उसकी अपनी सफलता को प्रभावित करता है। आप स्वयं सोच कर देखिए अगर भगवान राम ने हनुमान, सुग्रीव और वानरों की सेना की क्षमता पर प्रश्न चिन्ह लगाया होता तो क्या होता? समुद्र को लांघना असंभव माना होता तो क्या होता? असल में वे अपने विचार के प्रति संकल्पित थे, इसलिए अपने लक्ष्य को पा पाये। यही वो शक्ति थी जिसके बल पर वानरों द्वारा समुद्र पर सेतु बनाया गया। जी हाँ दोस्तों वानरों ने संकल्प शक्ति के प्रयोग से ही समुद्र पर सेतु बनाने में सफलता प्राप्त करी थी।
संकल्प शक्ति का एक और बेहतरीन उदाहरण हमें महाभारत के युद्ध में भी देखने को मिलता है। कौरवों की सेना में कई नामी योद्धा और स्वयं पाण्डवों के गुरु भी थे। कौरवों के साथ भगवान कृष्ण की चतुरंगिणी सेना भी थी। बस उनके पास कुछ नहीं था तो वह था स्पष्ट नज़रिया, जिसके कारण वे सब दृढ़ संकल्पित नहीं हो पाये। इसके विपरीत पाण्डवों ने अपने सभी संशय युद्ध के मैदान में जाने से पहले दूर करे। अर्जुन ने भी अपनी सभी दुविधा को युद्ध से पहले कृष्ण के सानिध्य में दूर करा, जिसे आज हम गीता के रूप में देखते हैं और उसके पश्चात दृढ़ संकल्पित हो युद्ध के मैदान में उतरे और नतीजा हम सभी के सामने है।
ऐसा नहीं है साथियों कि दृढ़ संकल्प से लक्ष्य प्राप्ति के उदाहरण हमें रामायण या महाभारत में ही देखने को मिलेंगे। इन्हें तो आप अपने आस-पास मौजूद सफल लोगों के जीवन में झांककर भी देख सकते हैं या फिर आप भारतीय खिलाड़ी नीरज चोपड़ा, अनिल कुंबले, सचिन तेंदुलकर, रिंकु सिंह, धीरूभाई अंबानी आदि के जीवन को बारीकी से देखकर भी समझ सकते हैं।
दोस्तों, अगर आप वाक़ई सफल होना चाहते हैं; अपने लक्ष्यों को हक़ीक़त में बदलना चाहते हैं तो सबसे पहले संकल्प की शक्ति को स्वीकारें और फिर अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर संकल्प लें। बस संकल्प बनाते समय एक बात अपने मन में रखियेगा, आपका संकल्प शुभ और श्रेष्ठ हो याने वह आपके और समाज के हित में हो। जी हाँ साथियों, अगर आपका संकल्प शुभ, श्रेष्ठ और दृढ़ हुआ तो ऐसा कोई सा भी लक्ष्य नहीं है जिसे पाया ना जा सके। याद रखियेगा आज तक महान और सफल लोगों ने जो भी किया है या जो भी लक्ष्य पाए हैं या फिर उनके द्वारा इस धरती पर जो भी सृजन किया गया है, वह अनुकूल परिस्थितियों के कारण नहीं बल्कि मज़बूत संकल्प शक्ति के आधार पर किया गया है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर
nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com




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