• Nirmal Bhatnagar

सफलता के लिए हमेशा रहें उत्साहित…

Sep 18, 2022

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, स्थिति-परिस्थिति-हालात कैसे भी क्यूँ ना हो, एक बात जो हर हाल में आपके जीवन को बेहतर बना सकती है वह है, जीवन में उत्साह का होना। जी हाँ दोस्तों, अगर आप अपने सपने, अपनी क्षमता पर विश्वास करते हैं, तो आप जीवन में उत्साह बरकरार रख स्थिति-परिस्थिति-हालात सभी से निपट सकते हैं क्यूँकि जब आप अपनी क्षमता और खुद पर विश्वास रखते हैं, तो आप कुछ करने या पाने की इच्छा या ललक को, कभी हार ना मानने वाले दृष्टिकोण के साथ बरकरार रख पाते हैं, जो अंततः आपको सफल बनाता है।


मेरी बात को आप इतिहास में जितने भी महापुरुष हुए हैं, फिर चाहे वे धार्मिक, राजनैतिक, समाज सुधारक, वैज्ञानिक, खिलाड़ी आदि कोई भी क्यूँ ना हों, के जीवन को देखकर, समझ सकते हैं। इन सभी लोगों ने अपने जीवन में कभी ना कभी विपरीत परिस्थितियों, असफलताओं का सामना अपने उत्साह को बरकरार रखते हुए किया है। हाँ, अगर आपको लगता है महापुरुष तो जन्म से ही विशेष प्रतिभाओं के धनी होते हैं, तो आप एक काम कीजिएगा अपने विद्यालय के दिनों को याद कीजिएगा और देखिएगा कि उस समय अंतिम बेंच पर बैठ कर मस्ती करने वाले बच्चे, जो कभी किसी परीक्षा में अच्छे अंक नहीं ला पाते थे, आज किस स्थिति में हैं। आप पाएँगे कि उनमें से ज़्यादातर आज अपने जीवन में सफल हैं। साथियों, यह ‘बैक बेंचर', जिनके लिए शिक्षकों द्वारा यहाँ तक कहा गया था कि, ‘तुम इस जीवन में कुछ नहीं कर पाओगे…’ या ‘बड़ा होकर ठेला चलाओगे…’ आज जीवन में विभिन्न परिस्थितियों में उत्साह के साथ किए गए लगातार प्रयत्नों के कारण सफल हुए। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो उत्साह बरकरार रखने के कारण वे आज सफल हैं।


जीवन में स्थितियाँ कितनी भी दुखदायक या विषम क्यों ना हो, ‘उत्साह’ सदैव आपका सकारात्मक सहायक होता है। अर्थात् उत्साह हर हाल में आपको जीवन में आगे बढ़ने में मदद करता है। अब सबसे महत्वपूर्ण बात आती है, ‘उत्साह’ होता क्या है और वह आता कहाँ से है? मेरी नज़र में ‘उत्साह’ का अर्थ है अपनी मान्यताओं के प्रति दृढ़ता। दूसरे शब्दों में कहूँ तो, अपने जीवन को अपने नियमों या मान्यताओं के साथ दृढ़ता से जीना, आपके जीवन में उत्साह पैदा करता है।


हम जो कहते हैं, उसे किस तरह पूरा करते हैं अर्थात् आप जो कह रहे हैं, उसके प्रति कितनी दृढ़ता दिखाते हुए कर्म कर रहे हैं

से ही पता चलता है कि हमारा उस कार्य के प्रति कितना विश्वास है। जितना हमारा विश्वास होगा, उतना ही उसका कार्य करने के तरीके पर प्रभाव होगा और उसके अनुरूप ही परिणाम होगा। इस आधार पर देखा जाए तो उत्साह कहने या दिखाने की नहीं अपितु कार्य करने की शैली का नाम है।


धन, साधनों या किसी और की कृपा से उत्साही बन पाना या इस महान गुण को अपने अंदर आत्मसात् करना सम्भव नहीं है। अगर ऐसा सम्भव होता तो हर इंसान में उत्साही बनने की क्षमता नहीं होती और यह कुछ ही लोगों की विरासत बनकर रह जाता। यक़ीन मानिएगा दोस्तों, सीमित शक्ति, सामर्थ्य और साधनों वाले व्यक्ति भी अपने अंतर का "उत्साह" जगा सकते हैं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि उत्साही होना मानवीय व्यक्तित्व का सहज गुण है, जिसे प्रयत्न और परिस्थितियों द्वारा जगाया जा सकता है।


इस आधार पर देखा जाए तो उत्साही बनने के लिए दोस्तों, हमें सबसे पहले अपने लक्ष्य पर विश्वास पैदा करना होगा और साथ ही उसी आधार पर अपने जीवन को जीने के नियम बनाने होंगे और अंत में उन नियमों के आधार पर कर्म करना होंगे। तो आइए दोस्तों आज से हम उपरोक्त बातों को अमल में लाकर अपने जीवन में उत्साह पैदा करते हैं और उसे और बेहतर बनाते हैं।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

nirmalbhatnagar@dreamsachievers.com

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