सफलता को बुलाना हो अपने पास, तो चरित्रवान बनो…
- Nirmal Bhatnagar

- Jun 22, 2025
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June 22, 2025
फिर भी ज़िंदगी हसीन है...

आइए दोस्तों, आज के लेख की शुरुआत एक कहानी से करते हैं। बात कई साल पुरानी है, एक संत के प्रवचन पूरे होते ही एक श्रद्धालु ने जिज्ञासा वश उनसे प्रश्न किया, “महात्मन! दिखने में सभी मनुष्य एक समान होते हैं। अर्थात् उनका शरीर, कद-काठी, रंग-रूप, आदि सब कुछ एक जैसा लगता है। लेकिन उसके बाद भी जीवन में उनकी उपलब्धियों में बड़ा अंतर होता है। कुछ लोग उन्नति कर लेते हैं और कुछ लोग जीवन में असफल होकर पतन की ओर बढ़ जाते हैं।”
श्रद्धालु का प्रश्न सुनते ही संत मुस्कुराए और बोले, “वत्स! कल सुबह तुम सूर्योदय के समय नदी किनारे पर आ जाना। इस प्रश्न का उत्तर मैं तुम्हें वहीं दूँगा।” अगले दिन ठीक समय पर वह व्यक्ति नदी किनारे पहुंचा, जहाँ संत दोनों हाथों में दो कमंडल लिए, उसका इंतज़ार पहले से ही कर रहे थे। दिखने में वो दोनों कमंडल एक समान थे, याने उनका रंग, आकार, बनावट सब कुछ बिल्कुल एक समान था।
श्रद्धालु के कमंडल देखते ही संत ने दोनों कमंडलों को नदी में फेंक दिया। कुछ देर तो दोनों कमंडल तैरते रहे, लेकिन बीतते समय के साथ एक कमंडल पानी में डूब गया। यह देख श्रद्धालु कुछ कहता उसके पहले ही संत बोले, “वत्स! दिखने में तो दोनों कमंडल एक समान थे। लेकिन पानी में फेंके जाने पर दोनों में से एक ही तैर पाया। जानते हो क्यों?” शिष्य पूर्ण गंभीरता के साथ बोला, “गुरुजी दोनों कमंडल दिखने में ज़रूर एक समान थे। लेकिन दोनों में से एक कमंडल फूटा हुआ था। जिसके कारण उसमें पहले पानी भरा और फिर उसी के भार से वह डूब गया।”
श्रद्धालु का जवाब सुन गुरुजी मुस्कुराते हुए बोले, “तुमने बिल्कुल सही कहा वत्स! दिखने में भले ही दोनों कमंडल समान थे, लेकिन छेद वाला कमंडल पानी में डूब गया और अच्छा वाला तैर गया। ठीक इसी तरह सभी मनुष्य शरीर, कद-काठी, रंग-रूप, पढ़ाई, बुद्धिमत्ता आदि में समान हो सकते हैं, अगर उनके चरित्र में दोष हो, तो वे धीरे-धीरे जीवन की गहराई में डूब जाते हैं। इसके विपरीत जिन मनुष्यों का का चरित्र दृढ़, सच्चा और पवित्र होता है, वे जीवन के हर तूफान को पार कर जाते हैं।”
दोस्तों, यह प्रेरणादायक कहानी हमें जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण सूत्र सिखाती है, “चरित्र ही व्यक्ति की असली पहचान और सबसे बड़ी पूंजी होता है।” इसलिए ही दोस्तों, इस समाज में सच्चरित्र व्यक्ति ही सम्मान पाता है। जी हाँ, इंसान कितना भी ताकतवर या बुद्धिमान क्यों ना हो, अगर उसके चरित्र में दोष होगा तो एक ना एक दिन उससे वह सब छीन जाएगा। और हाँ इस विषय में यह ज़रूर याद रखियेगा कि दोष कितना बड़ा या छोटा है, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। एक गलत आदत, झूठ या बेईमानी भी पूरा जीवन प्रभावित कर सकती है।
अब ऐसे में मुख्य सवाल आता है कि अच्छे चरित्र का निर्माण कैसे किया जाये। तो मैं इतना ही कहूँगा दोस्तों कि चरित्र निर्माण एक सतत् प्रक्रिया है। अर्थात् जिस तरह एक दिन जिम जाने से बॉडी नहीं बनती, उसी तरह से चरित्र भी एक दिन में नहीं बनता। यह तो दिन-प्रतिदिन में लिए गए छोटे-छोटे निर्णय, हमारी संगति, हमारे व्यवहार और विचार, आदि सभी का मिलाजुला प्रभाव होता है। अर्थात् उपरोक्त सभी चीजें मिलकर हमारे चरित्र को गढ़ते हैं। इसलिए दोस्तों, हर क्षण ख़ुद को जानने का प्रयास करो और ख़ुद को सुधारो। अगर हम अपने भीतर के दोषों को पहचान लें और उन्हें दूर करने का प्रयास करें, तो हम भी उन्नति के मार्ग पर चल सकते हैं।
अंत में दोस्तों सिर्फ इतना ही कहूँगा कि दूसरों की नजर में महान बनने से पहले अपने चरित्र को महान बनाओ, क्योंकि सफलता क्षणिक हो सकती है, पर सच्चा चरित्र जीवन भर साथ देता है। इसलिए सच्चाई को अपनाओ, चरित्रवान बनो और जीवन में सफलता को ख़ुद चलकर अपने पास आता हुआ देखो।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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