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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

सिर्फ़ लक्ष्य याद रखें…

June 29, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

आईए दोस्तों आज के लेख की शुरुआत एक बहुत ही प्यारी कहानी से करते हैं जो मुझे हाल ही में सोशल मीडिया पर पढ़ने को मिली थी। यह कहानी है एक बहुत ही छोटे से जीव जुगनू की। जुगनू याने अपनी ही रोशनी से चमकने वाला एक नन्हा सा जीव। तो चलिए शुरू करते हैं।


बात कुछ दिन पुरानी है घने जंगल के बीच में रहने वाला जुगनू रोज़ की ही भाँति रात्रि में उड़ने, रोशनी फैलाने के लिए निकला। अभी वह कुछ ही दूर गया था कि उसे अपने पीछे से सरसराहट की आवाज़ सुनाई दी। उसने पलट कर देखा तो पाया कि एक बड़ा सा साँप बड़ी तेजी से उसकी ओर बढ़ता चला आ रहा है। इतने बड़े साँप को अपनी ओर आता देख एक पल के लिए तो वह छोटा सा जुगनू सहम सा गया। लेकिन तत्काल अपनी पूरी ऊर्जा को इकट्ठा कर साँप से बचने के लिए अपने नन्हे पंखों को फड़फड़ा कर तेजी से उड़ने लगा।


जुगनू की गति बढ़ते देख साँप ने भी अपनी गति बढ़ा ली और यही क्रम कुछ देर तक चलता रहा। आख़िरकार वह समय भी आ गया जब जुगनू को लगने लगा कि अब साँप उसका पीछा नहीं छोड़ेगा और साथ ही अत्यधिक थकान के कारण उसके लिए अब और उड़ना भी असम्भव हो गया था अर्थात् उसे एहसास हो गया था कि इस तरह भागकर बचना तो मुश्किल है। उसने अपनी पूरी हिम्मत जुटाकर साँप से बात करने का निर्णय लिया और एक थोड़ी सुरक्षित सी जगह देखकर रुक गया और साँप से बोला, ‘क्या मैं आपसे तीन प्रश्न पूछ सकता हूँ, जिससे मेरी दुविधा का समाधान हो सके?’ साँप ने कहा, ‘बिलकुल पूछो, लेकिन ज़रा जल्दी!’ जुगनू पूरी गम्भीरता के साथ बोला, ‘सामान्यतः आप जिस तरह के जीव खाते हो, क्या मैं उनमें से एक हूँ?’ साँप हंसते हुए बोला, ‘नहीं, बिलकुल नहीं!’ जुगनू ने साँप को धन्यवाद कहते हुए उसी गम्भीरता के साथ दूसरा प्रश्न पूछा, ‘क्या जाने-अनजाने में मैंने आपको किसी तरह का नुक़सान पहुँचाया है?’ साँप ने पूर्व की ही तरह इस प्रश्न का उत्तर भी ना में दिया। जवाब सुनते ही जुगनू एकदम गम्भीर एवं फ़र्म होते हुए बोला, ‘फिर मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि आप मेरा शिकार क्यों करना चाहते हैं?’ तीसरा प्रश्न सुनते ही साँप खिलखिलाकर जोर से हंसा और बोला, ‘क्योंकि तुम हमेशा इस जंगल में चमकते नज़र आते हो और तुम्हें ऐसे चमकते देखना मुझे नहीं सुहाता।’


वैसे तो दोस्तों, आप इस कहानी का सार समझ ही चुके होंगे। इस जहां में उपरोक्त साँप के समान कई लोग हैं जो अकारण ही आपकी सफलता, समाज में आपके बढ़ते प्रभाव, बढ़ते सुख को देख आपके ख़िलाफ़ काम करते रहते हैं। इन लोगों की एक ही समस्या है, ‘आप सुखी, शांत, संतुष्ट, सकारात्मक और सफल कैसे हैं?’, जबकि वे नहीं हैं। ऐसे लोग अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए नहीं अपितु आपको नीचा गिराने के लिए आपके विरुद्ध ज़हर उगलते रहते हैं।


लेकिन दोस्तों इससे फ़र्क़ क्या पड़ता है? आपको क्या लगता है, जुगनू की बात सुन साँप को कुछ समझ आया होगा? मेरी नज़र में तो नहीं क्यूंकि साँप तो अंतिम प्रश्न का जवाब देते हुए ही कुटिल हंसी हंस चुका था। तो फिर क्या जुगनू ने इस घटना के बाद चमकना छोड़ दिया होगा? सवाल ही नहीं उठाता। सोच कर देखिएगा दोस्तों वह नन्हा सा जुगनू तमाम विषमताओं, परेशानियों और तो और अपनी जान के जोखिम के बाद भी बिना किसी सरपरस्ती या सुरक्षा के जंगल में रोशनी बिखेरता रहता है, क्योंकि उसका काम ही चमकना है। तो फिर हम क्यूँ ईर्ष्या करने वालों के कारण अपने लक्ष्यों से भटकें? जी हाँ साथियों, हो सकता है उनका लक्ष्य हमारे जैसे लोगों को चमकने या सफल होने से रोकना हो। लेकिन इससे हमें क्या फ़र्क़ पड़ता है, हमें तो बस अपने लक्ष्य याने शांत, सुखी और सफल बनने को हमेशा याद रखना है और उसी की पूर्ति के लिए काम करना है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर


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