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सीखते रहें, बढ़ते रहें…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Nov 18, 2025
  • 3 min read

Nov 18, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, जीवन में कोई भी इंसान पूर्ण नहीं होता। हम सभी लोग जीवन में कभी ना कभी गलतियाँ करते हैं। कई बार यह गलतियाँ छोटी होती हैं, तो कई बार बड़ी। मैंने भी अपने जीवन में छोटी-बड़ी कई ग़लतियाँ करी हैं, लेकिन यह ग़लतियाँ जीवन में हमें कभी गिराती नहीं हैं, लेकिन हाँ, अगर आप अहंकार के शिकार हैं, तो आपका गिरना तय है। अर्थात् गलती नहीं आपको अहंकार गिराता है।



इसी तरह गलती आपको सफल होने से नहीं रोकती है, गलती होने के बाद आपका रुक जाना, आपको सफल होने से रोकता है। इसलिए गलती करने को शर्म की बात मानने के स्थान पर, सीख की पहली सीढ़ी मानना चाहिए। जो लोग अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं, उन पर हँस लेते हैं और सबसे महत्वपूर्ण उससे सीखते हैं, वे भविष्य की हर चुनौती का सामना और अधिक मजबूती से कर पाते हैं।


मेरी बात से सहमत ना हो तो किसी भी सफल व्यक्ति की कहानी उठाकर देख लीजिएगा। आप पाएँगे कि हर सफलता के पीछे अनगिनत गलतियों, ठोकरों और गलत फैसलों की लंबी सूची होती है। बस फ़र्क़ सिर्फ़ इतना होता है कि वे अपनी गलतियों को छिपाने या उस पर रोने के स्थान पर उन्हें अपना शिक्षक बनाते हैं और जो लोग गलती स्वीकार करने से डरते हैं, वे अपने जीवन में बड़ी सफलता नहीं पा पाते हैं। याने उनके जीवन में विकास वहीं रुक जाता है और जो खुले मन से कहते हैं, “हाँ, यह मेरी भूल थी, और मैं इसे सुधारूँगा।”, वे अपने व्यक्तित्व को हर दिन थोड़ा और ऊँचा उठा लेते हैं।


इसलिए मैं हमेशा कहता हूँ परिस्थिति नहीं, मन:स्थिति आपके जीवन को दिशा देती है। इसी बात को समझाते हुए चार्ल्स स्विंडोल ने कहा था, “फैक्ट्स, आपका अतीत, शिक्षा, आर्थिक स्थिति, परिस्थिति, असफलताओं या सफलताओं से ज़्यादा आपका दृष्टिकोण मायने रखता है।” दोस्तों ये शब्द साधारण नहीं है, यह तो जीवन का एक गहरा सत्य हैं। हमारे पास रोज़ एक विकल्प होता है, हम दिन को कैसे देखेंगे?; हम अपनी असफलताओं को दाग मानेंगे या अपनी कोशिशों का प्रतीक? या हम चुनौतियों को रोकने वाली दीवार समझेंगे या और ऊँचा उठाने वाला मंच? याने हमारा दृष्टिकोण ही तय करता है कि हमारा दिन कैसा होगा, साल कैसा होगा और अंततः जीवन कैसा होगा?


जी हाँ, हमारा नजरिया हमारी किस्मत बनाता है। कई बार हालात हमारे विरुद्ध होते हैं। जैसे अक्सर बड़े सपनों के साथ हमारे पास पैसे और मौके कम होते हैं। पर ऐसे में भी जीत उसी की होती है, जिसकी सोच परिस्थितियों से बड़ी होती है। आपके पास कितना ज्ञान है, यह महत्वपूर्ण नहीं। आपने कौन-सी डिग्री ली, यह निर्णायक नहीं। आपने कितना कमाया, यह जीवन को परिभाषित नहीं करता। जीवन तो तब बदलता है जब आप सुबह उठने से लेकर रात सोने तक, हर क्षण सीखते हैं। 
जिस दृष्टि से हम सुबह उठते हैं और रात को सोते हैं। अगर आपकी नज़र में हर गलती नया पाठ है, हर समस्या नया अवसर है, और हर दिन एक नई शुरुआत है तो कोई भी असफलता आपको लंबे समय तक रोक नहीं सकती।


दोस्तों, जीवन जीने के नियम बड़े सरल हैं-

गलती हुई? — मुस्कुराइए, स्वीकार कीजिए।


● आलोचना मिली? — शांत रहिए, सीखिए।


● संकट आया? — घबराइए मत, एक कदम आगे बढ़ाइए।


● रास्ता कठिन हुआ? — दृष्टि बदलिए, रास्ता अपने आप बदल जाएगा।


कुल मिलाकर कहूँ तो “गलती जीवन की दुश्मन नहीं, गलतियों से भागना जीवन का दुश्मन है।” जो लोग अपनी गलतियों से सीखते हैं और हर दिन एक सकारात्मक दृष्टि चुनते है, वे कहीं भी हों, किसी भी स्थिति में हों, उनके भीतर सफलता का बीज हमेशा जीवित रहता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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