हर परिस्थिति में खुश रहना सीखें…
- Nirmal Bhatnagar

- Jul 28, 2025
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July 28, 2025
फिर भी ज़िंदगी हसीन है...

यकीन मानियेगा दोस्तों, प्रकृति के माध्यम से ईश्वर हमें बहुत ही सरल और स्पष्ट तरीके से खुशहाल जीवन जीने के तरीक़े सिखाते हैं। चलिए अपनी इस बात को मैं आपको एक उदाहरण के माध्यम से समझाने का प्रयास करता हूँ। अगर आप गौर से प्रकृति को निहारेंगे तो पायेंगे कि कुछ फूल तेज धूप में खिलते हैं, तो कुछ फूल छाया में बेहतर खिलते हैं। जैसे, सूरजमुखी और गुलाब जैसे फूल खुले मैदान में, सीधे सूरज की किरणों के नीचे अपने रंग बिखेरते हैं, वहीं कमल और आर्किड जैसे फूल छायादार स्थानों में अपनी सुंदरता से मन मोह लेते हैं। अर्थात् दोनों ही प्रकार के फूल अलग-अलग वातावरण में खिलते हुए भी अपनी ख़ूबसूरती और खुशबू से पूरी दुनिया को आकर्षित करते हैं।
प्रकृति के इस रूप से ईश्वर हमें याद दिलाना चाहते हैं कि तुम जहाँ भी, जिस भी परिस्थिति में हो, अच्छे हो। अर्थात् हम जहां भी हैं, जिस स्थिति में भी हैं, वह हमारे लिए सबसे अच्छी जगह है। वहीं हम अपने अंदर की खूबी और गुणों को निखार सकते हैं। लेकिन अक्सर हम दूसरों की स्थितियों से तुलना कर बैठते हैं और सोचने लगते हैं, “काश मेरी परिस्थिति भी वैसी होती!” तुलना करने की हमारी यह प्रवृति हम से वो मौक़ा, वो स्थान छीन लेती हैं जहाँ हमारी सर्वश्रेष्ठ प्रगति होनी थी। दूसरे शब्दों में कहूँ तो, जिस परिस्थिति में हम हैं, उसी में हमारी सर्वश्रेष्ठ वृद्धि और सफलता की संभावना छिपी होती है।
चलिए एक उदाहरण से इसे समझने का प्रयास करते हैं। रमेश और सुरेश दो दोस्त थे। शिक्षा के पश्चात रमेश ने अपने मित्रों को देखकर शहर में बसने का निर्णय लिया और कुछ ही समय में वहाँ एक अच्छी नौकरी करने लगा। जबकि सुरेश ने अपने गांव में ही रहकर खेती-बाड़ी करने का निर्णय लिया। शुरू के कुछ सालों तक सुरेश को लगता था कि उसका जीवन मुश्किलों से भरा है, वह हमेशा सोचता कि काश वह भी रमेश की तरह शहर जाकर एक अच्छी नौकरी करता। लेकिन समय के साथ उसने महसूस किया कि उसका हुनर खेती में था, उसकी असली खुशी अपने गांव की मिट्टी में थी। जब उसने अपना मन पूरी तरह खेती में लगाया, तो उसकी उपज बढ़ने लगी और धीरे-धीरे वह अपने क्षेत्र में एक सफल किसान बन गया। दूसरी तरफ, रमेश को शहर की जिंदगी रास नहीं आई। उसने अनुभव किया कि उसकी खुशी और तरक्की गांव में है। उसने भी गांव लौटकर खेती शुरू की, और अब वह ज्यादा खुश रहने लगा।
दोस्तों, यह उदाहरण हमें सिखाता है कि भगवान ने हमें जहां भी रखा है, उस जगह पर हम सबसे बेहतर ढंग से बढ़ सकते हैं। अगर हम इस बात को स्वीकार लें और परिस्थितियों के विषय में सोचना बंद कर, इस बात पर ध्यान लगाने लगें कि हम उन परिस्थितियों में क्या कर रहे हैं और कितने खुश हैं, तो हमारा जीवन बदल सकता है।
इसलिए दोस्तों, जीवन की हर परिस्थिति को खुशी-खुशी स्वीकार करें। आपकी खुशी आपकी परिस्थिति में नहीं, बल्कि आपकी मनःस्थिति याने सोचने के तरीके में छिपी है। परमात्मा जानता है कि आपकी वृद्धि और विकास के लिए कौन-सा वातावरण सही है। हमें सिर्फ अपने अंदर झांकना है, खुद को स्वीकारना है, और अपने हिस्से की जमीन पर पूरी ईमानदारी और खुशी से खिलना है।
याद रखिए, फूल चाहे धूप में खिले या छाया में, उसकी खुशबू हमेशा दुनिया तक पहुँचती है। उसी प्रकार, आप भी जिस परिस्थिति में हों, खुशी से जियें और अपने आस-पास की दुनिया को महकाएं।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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