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  • Writer's pictureNirmal Bhatnagar

हर पल रहना हो सकारात्मक तो अपनाएँ यह सूत्र…

May 31, 2023

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, विचार हमारी सोच बनाते है, सोच नज़रिया बनाती है और नज़रिया हमारे कर्मों की दिशा तय करता है और अंत में कर्म हमारे जीवन की दशा तय करते हैं। उपरोक्त सूत्र है बड़ा साधारण और हम सब इस बात को जानते भी हैं, इसीलिए अक्सर कहते हैं कि हमेशा सकारात्मक रहो। लेकिन इंसान तो इंसान है दोस्तों, साधारण सी लगने वाली बात को भी अपनी तार्किक शक्ति से उलझन भरी बना लेता है। दूसरे शब्दों में कहूँ तो स्वभाव से सरल ना रह पाने की वजह से सीधी बातों को भी उलझाकर अपने लिए स्थिति मुश्किल या परेशानी भरा बना लेता है। इस बात को मैं आपको अपने जीवन की एक घटना से समझाने का प्रयास करता हूँ।


बात 2007 की हैं जब मैंने कम्प्यूटर का व्यवसाय छोड़, ट्रेनिंग की फ़ील्ड में आने का निर्णय लिया था। बिना किसी योजना के अचानक से लिए गए निर्णय ने मेरे ऊपर काफ़ी क़र्ज़ा बढ़ा दिया था क्योंकि व्यापार की उधारी तो आपको चुकानी ही थी लेकिन पूरी रिकवरी करना असम्भव था। शुरुआती कुछ महीनों तक तो सब कुछ किसी तरह मैनेज होता रहा। लेकिन बीतते समय के साथ स्थितियाँ बद से बदतर होती गई। आमदनी ना के बराबर थी और आपको सुबह से शाम तक आपको जिनके पैसे चुकाने थे, उन्हें डील करना था। सामान्य ज़रूरतों के लिए भी मैं परिवार पर निर्भर था। कुल मिला कर कहूँ तो जीवन के हर क्षेत्र में जूझ रहा था। फिर वह वैयक्तिक स्तर पर हो या पारिवारिक स्तर पर। इसी तरह का कुछ हाल सामाजिक, व्यवसायिक और वित्तीय क्षेत्र में भी चल रहा था।


ऐसे हालात में मेरे लिए लोगों द्वारा दी गई समझाइश, ‘सकारात्मक रहो!’ असम्भव ही लगती थी। मुझे पता था ईश्वर पर विश्वास रखने से सब ठीक हो जाएगा। ऐसी स्थितियों में धीरज धरने से चीज़ें सामान्य होने लगती हैं, हर समस्या का समाधान निकल जाता है। मैंने उस वक्त भी ‘चिंता ना करो, यह दिन भी गुजर जाएँगे…’ आदि जैसी कई कहानियाँ पढ़ी हुई थी। लेकिन यह सब पता होने के बाद भी किस तरह समस्याओं और नकारात्मक अनुभवों के बीच सकारात्मक रहूँ, समझ नहीं आ रहा था। ठीक ऐसा ही दोस्तों, जीवन के किसी ना किसी मोड पर आपमें से भी कई लोगों ने महसूस किया होगा।


यकीनन दोस्तों यह एक ऐसी समस्या है जिससे निपटना ज़्यादातर लोगों के लिए मुश्किल है। इसकी मुख्य वजह दोस्तों ‘सकारात्मक रहने’ का अर्थ ग़लत लगाना है। जी हाँ, जिस दिन मुझे उक्त बात समझ आई मेरा जीवन ना सिर्फ़ सामान्य हो गया अपितु जीवन में नई उम्मीद, नई सम्भावनाएँ नज़र आने लगी। असल में दोस्तों सकारात्मक रहने या सकारात्मक सोच रखने का ये मतलब नहीं है कि हम हर बार ये आशा करें कि सब कुछ अच्छा हो, बल्कि उसका मतलब ये स्वीकार करना है कि जो हो रहा है, वही सबसे अच्छा है।


जी हाँ दोस्तों, ‘जो हुआ अच्छे के लिए हुआ’, ‘जो हो रहा है अच्छे के लिए हो रहा है’ और ‘जो होगा वह अच्छे के लिए होगा’ का भाव रखना आपके अंदर अनावश्यक विचारों के द्वन्द को खत्म कर स्वीकारोक्ति और ईश्वर के प्रति समर्पण के भाव को विकसित करता है। जिसके कारण आप शांत और सकारात्मक रहते हुए जीवन में आगे बढ़ पाते हैं।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

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