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पैसों के नहीं दिल के धनवान बनिए !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 16 hours ago
  • 3 min read

June 9, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, जीवन के सबसे दुर्लभ और सबसे पवित्र सुखों में से एक है, “दूसरों की सफलता में सच्चे मन से प्रसन्न होना।” सुनने में आपको यह बात बहुत सरल लग सकती है, लेकिन वास्तव में यह आध्यात्मिक परिपक्वता और आंतरिक समृद्धि का एक उच्च स्तर है। आज का दिखावे से भरा यह युग हर क्षण तुलना में लगा रहता है। मेरी नजर में इसकी मुख्य वजह सोशल मीडिया, प्रतिस्पर्धा और दिखावे की संस्कृति का मानवीय मूल्यों पर हावी होना है। जिसके कारण आज ज्यादातर लोग दूसरों की उपलब्धि को अपनी उपलब्धि के तराज़ू पर तोलते हैं। इसीलिए दूसरों की सफलता उन्हें प्रेरित करने के स्थान पर बेचैन करने लगती है।


दोस्तों, इसी वजह से जब कोई मित्र आगे बढ़ता है, तो हम अपनी गति मापने लगते हैं। जब कोई सहकर्मी सम्मान पाता है, तो हम अपनी उपेक्षा महसूस करने लगते हैं। जब कोई पड़ोसी नया मुकाम हासिल करता है, तो हम अपनी कमियों की सूची बनाने लगते हैं और बीतते समय के साथ तुलना करने की इसी आदत की वजह से हम धीरे-धीरे दूसरों की खुशियों को अपनी उदासी का कारण बना लेते हैं। जिस तरह दोस्तों, किसी दूसरे के घर में जला हुआ दीपक हमारे घर की रोशनी कम नहीं करता, तो फिर किसी दूसरे की सफलता हमारी संभावनाएँ कैसे कम कर सकती है?


याद रखियेगा, संसार में अवसरों की कमी नहीं है। ईश्वर ने हर व्यक्ति को एक अलग यात्रा, अलग प्रतिभा और अलग उद्देश्य देकर भेजा है। किसी और की जीत आपके हारने का प्रमाण नहीं है। किसी और का सम्मान आपके मूल्य को कम नहीं करता। किसी और की उपलब्धि आपके सपनों के रास्ते को बंद नहीं करती। इस सृष्टि में सूर्य कभी चंद्रमा से प्रतिस्पर्धा नहीं करता, नदी कभी समुद्र से ईर्ष्या नहीं करती और फूल कभी दूसरे फूल की सुगंध से परेशान नहीं होता। प्रकृति हमें सिखाती है कि अपनी विशिष्टता में जीना ही सच्ची सफलता है। इसीलिए कहा गया है, “जो व्यक्ति दूसरों की सफलता का उत्सव मनाना सीख जाता है, वह अपने भीतर की ईर्ष्या, तुलना और असुरक्षा पर विजय प्राप्त कर लेता है।”


वैसे भी स्वयं पर विजय से बड़ी कोई विजय नहीं होती। जब हम किसी की सफलता पर दिल से ताली बजाते हैं, तब हम केवल उसकी उपलब्धि का सम्मान नहीं कर रहे होते, बल्कि अपने हृदय की विशालता का परिचय दे रहे होते हैं। ऐसे लोग दूसरों की रोशनी से घबराते नहीं, बल्कि उससे प्रेरणा लेते हैं। वे जानते हैं कि आकाश इतना विशाल है कि हर सितारा अपनी चमक के साथ जगमगा सकता है।


याद रखिएगा, जिस दिन आप किसी दूसरे की सफलता देखकर सचमुच खुश हो जाते हैं, उसी दिन आपकी अपनी सफलता की यात्रा भी तेज हो जाती है क्योंकि तब आपकी ऊर्जा तुलना में नहीं, विकास में लगती है; शिकायत में नहीं, सीखने में लगती है।

ईर्ष्या मन को संकुचित करती है, जबकि प्रशंसा मन को विस्तृत करती है। तुलना तनाव पैदा करती है, जबकि शुभकामनाएँ शांति देती हैं। इसलिए दोस्तों, अगली बार जब किसी को सफलता मिले, तो केवल औपचारिक बधाई मत दीजिए। पूरे हृदय से उसके लिए प्रसन्न होइए। उसकी उपलब्धि में अपनी प्रेरणा खोजिए।


वैसे भी जीवन में धनवान होने से बड़ा, दिल का धनवान होना है और जो व्यक्ति दूसरों की खुशियों में अपनी खुशी ढूँढ़ लेता है, वह कभी भीतर से गरीब नहीं रहता। उसका हृदय इतना समृद्ध हो जाता है कि वहाँ प्रेम, शांति, संतोष और आनंद का कभी अकाल नहीं पड़ता। याद रखिएगा, दूसरों की सफलता से जलना आसान है, लेकिन दूसरों की सफलता पर खिल उठना ही एक सुंदर, विकसित और वास्तव में सफल व्यक्तित्व की पहचान है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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