सिर्फ़ सफल नहीं, सही तरीके से सफल बनें !!!
- Nirmal Bhatnagar

- 19 hours ago
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Feb 20, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, “सफलता”, एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आँखों में चमक आ जाती है क्योंकि सफल इंसान बनना हर इंसान का सपना होता है, और इसीलिए हर इंसान इसे पाने का अपना तरीका ढूंढ़कर, कड़ी मेहनत करता है। कुछ लोग इसे जल्दी पाने की चाह में “सफलता किसी भी कीमत पर” की विचारधारा चुनते हैं। जबकि कुछ लोग सफलता के साथ शांति को चुनते हुए “सफलता सही कीमत” पर की विचारधारा चुनते हैं।
पहले वाले लोग जल्दी चमकते हैं, लेकिन अक्सर जल्दी बुझ भी जाते हैं। दूसरे लोग धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं, लेकिन टिकते हैं और इतिहास बनाते हैं क्योंकि सच्चाई यह है, सफलता कोई मंज़िल नहीं, एक यात्रा है और इस यात्रा का किराया रोज़ देना पड़ता है। इसीलिए कहा गया है, “Success is never owned, it’s rented, and the rent is due every day.” याने सफलता कभी आपकी स्थायी संपत्ति नहीं बनती। वह रोज़ की मेहनत, ईमानदारी, अनुशासन और धैर्य से ही आपके पास रहती है। चलिए, एक सच्ची कहानी से इसे समझने का प्रयास करते हैं, जिसमें मैंने पहचान छुपाने के लिए नाम बदल दिए हैं।
एक छोटे शहर में आरव और निखिल नाम के दो दोस्त रहा करते थे। शिक्षा पूर्ण करने के बाद दोनों ने एक साथ में व्यापार शुरू किया। शुरुआती मेहनत और चुनौतियों के दौर के दौरान सफलता की चाह में एक दिन निखिल बोला, “आरव, अगर हम थोड़ा शॉर्टकट अपनाएँ, तो जल्दी अमीर बन सकते हैं।” इस पर आरव मना करते हुए बोला, “मैं सफलता तो चाहता हूँ, लेकिन सही रास्ते पर चल कर।” लेकिन निखिल की तो सोच ही अलग थी इसलिये उसने शॉर्टकट चुना और नकली बिल, गलत वादे, झूठे प्रचार करके अधिक मुनाफा बनाने लगा। कुछ ही दिनों में उसने अपना नाम शहर के सफल लोगों में शामिल करवा लिया।
दूसरी तरफ पूरी ईमानदारी कायम रखते हुए आरव धीरे-धीरे आगे बढ़ा। उसकी कमाई कम और मेहनत ज्यादा थी, लेकिन वह ईमानदारी के अपने निर्णय पर अडिग रहा। कुछ सालों बाद दोनों का सच सामने आया। गलत रास्तों पर चलने के कारण निखिल का कारोबार गिर गया और लोगों का भरोसा उससे टूट गया, जिसकी वजह से उसकी पहचान प्रभावित हुई। लेकिन आरव का बिज़नेस धीरे-धीरे मजबूत होता गया क्योंकि लोग जानते थे, यह व्यक्ति भरोसेमंद है। दोनों को सफलता मिली, एक को किसी भी कीमत पर, दूसरे को सही कीमत पर।
इसी सिद्धांत के साथ रतन टाटा ने भी अपना जीवन जिया था। उन्होंने कई बार ऐसे मौके ठुकराए जहाँ सिद्धांतों से समझौता करते हुए तेज़ लाभ मिल सकता था। लेकिन उन्होंने लाभ के स्थान पर हमेशा सिद्धांतों को चुना और लोगों का विश्वास जीता। दोस्तों, उनकी सफलता सिर्फ़ उद्योग में नहीं थी, बल्कि सामान्य जन के विश्वास में थी। इसलिए ही कहा जाता है, “विश्वास से बड़ी सफलता कोई नहीं।”
याद रखिएगा, गलत रास्ते से मिली सफलता ताली तो दिला सकती है, लेकिन शांति नहीं। इसके विपरीत सही रास्ते से मिली सफलता थोड़ा समय तो लेती है, लेकिन साथ ही हर हाल में, हमेशा सम्मान देती है। इसलिए मेरा मानना है कि जब हर दिन हम ईमानदारी से मेहनत करते हैं, तब आप सफलता का किराया भरते हैं और जिस दिन आप मेहनत, अनुशासन और सिद्धांत छोड़ते हैं, उसी दिन सफलता भी आपका घर छोड़ने लगती है।
इसलिए आज खुद से एक वचन लीजिए, “मैं सफलता चाहूँगा, लेकिन सही कीमत पर क्योंकि अंत में सिर्फ़ सफल व्यक्ति को नहीं, बल्कि सही तरीके से सफल हुए व्यक्ति को याद रखा जाता है और वही सच्ची जीत है।”
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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