फिर भी ज़िंदगी हसीन हैं...

अनिश्चितता भगाएँ, जीवन बनाएँ - भाग 2

अनिश्चितता भगाएँ, जीवन बनाएँ - भाग 2
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Sep 11, 2021

अनिश्चितता भगाएँ, जीवन बनाएँ - भाग 2


दुनिया में आए हैं तो एक दिन जाएँगे ही, सिर्फ़ यही एक चीज़ ईश्वर ने तय करके हमें बता रखी है, बाक़ी पूरा जीवन हमारे लिए अनिश्चितताओं से भरा है। रोज़मर्रा के जीवन में आने वाली इन चुनौतियों का सामना अपना सर्वश्रेष्ठ देते हुए करना और खुश रहना ही मेरी नज़र में हमारे जीवन का एकमात्र लक्ष्य है।


वैसे अनिश्चितता ज़रूरी भी है। जीवन में आने वाले समय में कब क्या घटेगा, अगर सब कुछ पहले से ही हमें मालूम हो तो शायद हमारे जीवन में से रोमांच और उसका आनंद, दोनों ही खत्म हो जाएगा। अनिश्चितता के दौर में हमेशा हमारे पास दो रास्ते होते हैं। पहला, हम अपनी क्षमता और सामर्थ्य का उपयोग करते हुए अनिश्चितता का भरपूर लाभ उठाएँ या फिर वास्तविक रूप में उसका आनंद लें। दूसरा, अनिर्णय की स्थिति में रहकर परिस्थितियों को कोसते रहें और जो बदला नहीं जा सकता है, उस पर समय, ऊर्जा और अपना अमूल्य जीवन बर्बाद करते रहे।


दोस्तों कल हमने अनिश्चितता से फ़ायदा उठाकर अपना जीवन बेहतर बनाने के 9 सूत्रों में से प्रथम दो सूत्र सीखे थे। आइए आगे बढ़ने से पहले कल की बातों को संक्षेप में दोहरा लेते हैं-


पहला सूत्र - सपने देखें, बहुत बड़े देखें 

जीवन में बड़े सपने या लक्ष्य रखना हमारे जीवन को दिशा देता है इसलिए यह निश्चित तौर पर फ़ायदेमंद हैं। जब आप लम्बे समय तक लक्ष्य को ज़हन में रखकर योजनाबद्ध तरीक़े से उसे पाने के लिए कार्य करते हैं तो कुछ हद तक आप स्वयं को जीवन की अनिश्चितता के लिए तैयार कर लेते हैं। 


लक्ष्य बनाते समय सिर्फ़ एक बात का ध्यान रखें कि वह वास्तविक लक्ष्य हो, उधार लिया हुआ नहीं। इसके लिए अपने जीवन का खाका बनाएँ। सही खाका बनाने के लिए सर्वप्रथम स्वयं से प्रश्न करें कि आने वाले 10 वर्षों में आप शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, रिश्ते, कैरियर, आर्थिक एवं व्यक्तिगत विकास को दृष्टिगत रखते हुए स्वयं को कहाँ अथवा किस रूप में देखना पसंद करेंगे? अपने विचारों को लिख लें और उसके बाद स्वयं से दूसरा प्रश्न करें कि उपरोक्त खाके के आधार पर आने वाले 1 वर्ष में आप उक्त क्षेत्रों में स्वयं को कहाँ देखते हैं? इस प्रश्न के जवाब को भी लिख लें। अब स्वयं से तीसरा और अंतिम प्रश्न करें, ‘दैनिक जीवन में किए जाने वाले कार्य मुझे अपने लक्ष्यों की ओर ले जा रहे हैं या नहीं?’ अगर नहीं, तो ‘मुझे अपने दैनिक जीवन किए जाने वाले कार्यों में क्या परिवर्तन करना होगा?’


दूसरा सूत्र - अपने सपनों व खुद पर विश्वास रखें और आत्मविश्वास जगाएँ

कई बार बड़े लक्ष्य का पीछा करते वक्त मिलने वाली छोटी-मोटी असफलताएँ अथवा आशानुरूप परिणाम ना मिलना, मन में संदेह या डर पैदा करता है। ऐसी परिस्थिति में अपने सपनों और खुद पर विश्वास बनाए रखना ना सिर्फ़ आपकी बल्कि आपके सहकर्मियों, प्रबंधकों आदि की प्रबंधन क्षमता एवं उत्पादकता को बढ़ाकर आपके व्यवहार को बेहतर बनाता है। 


वैसे दोस्तों, आत्मविश्वासी होने के और भी कई फ़ायदे हैं। यह आपको अच्छा श्रोता बनने में मदद करता है, आप जीवन में घटने वाली घटनाओं को स्वीकारने लगते हैं, आपकी सीखने की क्षमता बढ़ जाती है, आप लोगों की मदद करने या लेने के लिए तैयार रहते हैं। यह जीवन के प्रति आपके दृष्टिकोण को सकारात्मक और मज़बूत बनाता है, इसकी वजह से आप हमेशा नई ज़िम्मेदारियों और चुनौतियों को स्वीकारने के लिए तैयार रहते हैं। इतना ही नहीं दोस्तों, आत्मविश्वास आपको हर परिस्थिति के अनुसार ढलने और सफल होने के लिए मूल्य आधारित हर तरीक़ा आज़माने के लिए तैयार करता है।


चलिए दोस्तों अब सीखते हैं अनिश्चितता भगाकर जीवन बनाने के अगले तीन सूत्र -


तीसरा सूत्र - असफलता के डर को दूर भगाएँ

सामान्यतः असफलता से कई गुना ज़्यादा असफलता का डर होता है। इस डर का सीधा-सीधा सम्बन्ध आपके आत्मविश्वास और तैयारियों के साथ होता है। आत्मविश्वास की अधिकता अथवा कमी दोनों ही इस डर को बढ़ाती है। अति आत्मविश्वास अर्थात् ओवर कॉन्फिडेंस के चलते जब हम अच्छे से तैयारी नहीं कर पाते हैं और अंत समय में जब स्थिति हाथ से निकलती हुई लगती है तब हमें असफलता का डर सताने लगता है।ठीक इसी तरह जब आत्मविश्वास अर्थात् कॉन्फिडेंस बहुत कम होता है तब हमें अपनी तैयारियों पर भरोसा नहीं होता है और अंत समय में हम ज़्यादा ग़लतियाँ करने लगते हैं। अनिश्चित समय में दोनों में से किसी भी स्थिति में करी गई गलती हमें नुक़सान पहुँचाती है।


इस डर को दूर भगाने के लिए पुरानी असफलताओं को भूलकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हुए पॉजिटिव सोचना, कल्पना करना और तैयारी करना फ़ायदेमंद रहता है। अंत में लॉ ऑफ़ एवरेज को अपने फ़ेवर में मानकर कार्य करें।


चौथा सूत्र - रचनात्मक रहें और उसी तरह सोचें 

रचनात्मक दृष्टिकोण रखना एवं उसी आधार पर कार्य करना हमेशा लाभदायक रहता है। रचनात्मकता आपको अपनी सोच विकसित करने का मौक़ा देती हैं, जो अंततः आपका आत्मविश्वास बढ़ाता है। इसके साथ ही रचनात्मकता अहम को कम करते हुए आपको हर परिस्थिति को अलग नज़रिए से देखने का मौक़ा देती है। यह आपको वास्तविक लक्ष्य निर्धारण करने में मदद करते हुए सफलता और असफलता के अपने पैमाने तय करने का मौक़ा देती है। 


पाँचवाँ सूत्र - दृष्टिकोण को अपना सहयोगी बनाये

दृष्टिकोण अर्थात् चीजों को देखने का नज़रिया अर्थात् आप जिस नज़रिए से किसी वस्तु या विषय को देखेंगे आपको वह विषय या वस्तु वैसी ही नज़र आएगी। अगर आप अनिश्चितता में मौके देखेंगे, तो आपको मौके नज़र आएँगे और अगर समस्या देखेंगे तो समस्या नज़र आएगी। इसीलिए तो अंतराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर श्री राजेश अग्रवाल ने कहा है, ‘सफलता आपकी प्रतिभा के मुक़ाबले आपके दृष्टिकोण पर अधिक निर्भर करती है।’ जी हाँ दोस्तों, अगर जीवन में सफल होना है तो दृष्टिकोण को अपना सहयोगी बनाना होगा।


आज के लिए इतना ही दोस्तों। कल हम अगले दो सूत्रों के साथ फिर मिलेंगे।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर 

dreamsachieverspune@gmail.com

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