फिर भी ज़िंदगी हसीन हैं...

अनिश्चितता भगाएँ, जीवन बनाएँ - भाग 3

अनिश्चितता भगाएँ, जीवन बनाएँ - भाग 3
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Sep 12, 2021

अनिश्चितता भगाएँ, जीवन बनाएँ - भाग 3


दोस्तों मेरी नज़र में अनिश्चितता ज़रूरी है क्यूँकि भविष्य में हमारे जीवन में घटने वाली घटनाओं का हमें पहले से ही पता होगा तो हमारे जीवन से रोमांच और उसका आनंद दोनों ही खत्म हो हो जाएगा। अगर हम अनिश्चितता का सामना अपनी क्षमता और सामर्थ्य का उपयोग करते हुए करें तो हम उसका लाभ उठा सकते हैं अन्यथा परिस्थितियों को कोसते हुए हम अपना समय, ऊर्जा और अमूल्य जीवन बर्बाद करेंगे। तो आईए आगे बढ़ने से पहले अनिश्चितता को लाभ का सौदा बनाने वाले प्रथम 5 सूत्रों को संक्षेप में दोहरा लेते हैं-


पहला सूत्र - सपने देखें, बहुत बड़े देखें 

सपने हमारे जीवन को दिशा देकर बेहतर बनाते है। जब आप योजनाबद्ध तरीक़े से लक्ष्य पाने के लिए कार्य करते हैं तो आप अनजाने में ही स्वयं को अनिश्चितता के लिए भी तैयार कर लेते हैं। लक्ष्य बनाने के लिए स्वयं से पूछें, ‘आने वाले 10 वर्षों में आप स्वयं को शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, रिश्ते, कैरियर, आर्थिक एवं व्यक्तिगत विकास के क्षेत्र में कहाँ देखते हैं?’ इसके जवाब को लिख लें और उसके बाद खुद से दूसरा प्रश्न पूछें, ‘आने वाले 1 वर्ष में आप उक्त क्षेत्रों में स्वयं को कहाँ देखते हैं?’  इस प्रश्न के जवाब को भी लिख लें और अब स्वयं से तीसरा प्रश्न करें, ‘आपकी वर्तमान जीवनशैली आपको अपने लक्ष्यों की ओर ले जा रही है?’ अगर नहीं, तो ‘आपको अपने दैनिक जीवन में क्या बदलाव करना होंगे?’


दूसरा सूत्र - अपने सपनों व खुद पर विश्वास रखें और आत्मविश्वास बढ़ाएँ

असफलताएँ या आशानुरूप परिणाम ना मिलना मन में संदेह और डर पैदा करता है ऐसे में अपने सपनों और खुद पर विश्वास बनाए रखना आपकी और आपकी टीम की उत्पादकता बरकरार रख, व्यवहार को बेहतर बनाता है। आत्मविश्वास आपको अच्छा श्रोता बनने में, जीवन में घटने वाली घटनाओं को स्वीकारने में, सीखने की क्षमता बढ़ाने में, लोगों की मदद करने या लेने में मदद करता है। यह आपके दृष्टिकोण को सकारात्मक और मज़बूत बनाकर आपको नई ज़िम्मेदारियों और चुनौतियों के लिए तैयार करता है। इतना ही नहीं दोस्तों आत्मविश्वास आपको हर परिस्थिति के अनुसार ढलने और मूल्य आधारित कार्य करने के लिए भी तैयार करता है।


तीसरा सूत्र - असफलता के डर को दूर भगाएँ

आत्मविश्वास की अधिकता अथवा कमी असफलता के डर को बढ़ाती है। अति आत्मविश्वास अर्थात् ओवर कॉन्फिडेंस आपको अच्छे से तैयारी नहीं करने देता वहीं आत्मविश्वास की कमी आपको अपनी तैयारियों पर भरोसा नहीं करने देती। दोनों ही स्थिति आपके विश्वास और फ़ोकस अर्थात् को कम कर मन में शंका पैदा कर देती है जो अंततः असफलता का ड़र पैदा करती है। इस डर को दूर भगाने के लिए पुरानी असफलताओं को भूलकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हुए पॉजिटिव सोचें, कल्पना करें और पूर्ण तैयारी के साथ कार्य करें। लॉ ऑफ़ एवरेज को अपने फ़ेवर में मानकर परिणाम सोचना भी इस डर को दूर करता है।


चौथा सूत्र - रचनात्मक रहें और उसी तरह सोचें 

रचनात्मकता आपकी सोच को विकसित करती है और सोच आपके दृष्टिकोण को सकारात्मक बना आत्मविश्वास बढ़ाती है। यह आपके अहम या दम्भ को दरकिनार कर परिस्थिति को सही नज़रिए से देखने में मदद करती है। दोस्तों इसका एक बड़ा फ़ायदा हमें सफलता और असफलता का अपना पैमाने तय करने और वास्तविक लक्ष्य निर्धारण में मिलता है।


पाँचवाँ सूत्र - दृष्टिकोण को अपना सहयोगी बनाये

दृष्टिकोण अर्थात् चीजों को देखने का नज़रिया। अगर आप अनिश्चितता में मौके देखेंगे तो आपको मौके नज़र आएँगे और अगर समस्या देखेंगे तो समस्या नज़र आएगी। इसीलिए तो अंतराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर श्री राजेश अग्रवाल ने कहा है, ‘सफलता प्रतिभा के मुक़ाबले दृष्टिकोण पर अधिक निर्भर करती है।’ जी हाँ दोस्तों, अगर जीवन में सफल होना है तो दृष्टिकोण को अपना सहयोगी बनाए।


चलिए दोस्तों अब जानते हैं अनिश्चितता भगाकर जीवन बनाने के अगले दो सूत्र -


छठा सूत्र- कर्मठ बनें 

जीवन जीने के लिए हमारे पास दो तरीक़े रहते है। पहला, भाग्यवादी बनना और सोचना, ‘अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम। दास मलूका कह गए, सबके दाता राम।।’ अर्थात् जिस तरह अजगर और पंछियों को बिना कार्य करे भोजन मिल जाता है ठीक उसी तरह ईश्वर ने जो हमारे भाग्य में लिखा है, वह हमें मिल ही जाएगा और जो नहीं लिखा है वह कभी नहीं मिलेगा, इसलिए आराम से बैठो जो होगा देखा जाएगा।


दूसरा, कर्मवादी बन, कर्म को प्राथमिकता देते हुए, इस विश्वास के साथ हर दिन कार्य करना की क़िस्मत, मानसिक रूप से सतर्क रहते हुए मौक़ों को पहचानने की हमारी क्षमता से अधिक कुछ नहीं है। जी हाँ दोस्तों, कर्मवादी लोग संकल्प के साथ कर्म करते हैं और अपनी क़िस्मत खुद लिखते हैं। कर्मठता मुश्किल से मुश्किल या असंभव से लगने वाले कार्य को सम्भव बना देती है। इसलिए अनिश्चितता के दौर में भाग्य के भरोसे बैठने से बेहतर है, कि आप कर्मठ बनें और अपने भाग्य का निर्माण करें।


सातवाँ सूत्र - हार को जीत में बदलें

मैंने अपने जीवन में मिले थोड़े-बहुत अनुभव से एक महत्वपूर्ण बात सीखी है, ‘हार’ नाम की कोई चीज़ होती ही नहीं है क्यूँकि जब हम काम करते हैं तो कई बार परिणाम हमें अपनी इच्छानुसार मिलता है तो कई बार ईश्वर जैसा चाहता है, वैसा। जब मनमाफ़िक मिले तो सफलता की ख़ुशी बनाएँ और जब ईश्वर की योजनानुसार मिले तो परेशान या दुखी होने के स्थान पर उस अनुभव से सीखने का प्रयास करें क्यूँकि ईश्वर आपको जो आप चाहते हैं उससे कुछ बड़ा देना चाहता है और आज आपको उसके लिए तैयार कर रहा है।


याद रखिएगा दोस्तों, जैसे ही आप हार से सीख लेकर, फिर से शुरुआत करते है आप उस हार को जीत में बदलना शुरु कर देते हैं। 


आज के लिए इतना ही दोस्तों। कल हम अगले दो सूत्रों के साथ फिर मिलेंगे।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर 

dreamsachieverspune@gmail.com

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