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खुशहाल परिवार बनाने के 7 सुनहरे नियम - भाग 1

खुशहाल परिवार बनाने के 7 सुनहरे नियम - भाग 1
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April 18, 2021
खुशहाल परिवार बनाने के 7 सुनहरे नियम - भाग 1

दोस्तों मेरा मानना है बच्चों के लालन-पालन में समाज की भूमिका बड़े शहरों में छोड़िए, छोटे शहरों से भी दूर होती जा रही है। इसे आप मेरे इस उदाहरण से बेहतर तरीक़े से समझ पाएँगे। जब हम छोटे थे तो हमें जीवन जीने के लिए आवश्यक बातें घरवालों के साथ-साथ हमारे रिश्तेदारों, पड़ोसी और पिता के दोस्त द्वारा भी सिखाई जाती थी और तब हमारे फ़र्स्ट, सेकंड कज़िंस नहीं सिर्फ़ भाई और बहन होते थे। अगर इनमें से कोई भी हमें गलती से भी, गलती करते हुए देख लेता था तो आप निश्चित तौर पर अंदाज़ा लगा सकते हैं कि हमारा क्या हाल होता था?

लेकिन आज परिवार और समाज का स्वरूप तेज़ी से बदल रहा है। इस बदलते आधुनिक समाज में कई तरह के परिवार मौजूद हैं जैसे आज कुछ सामूहिक, कुछ एकल तो कुछ एकल से भी छोटे परिवार हैं अर्थात् समाज में अब सिंगल पेरेंट और इकलौते बच्चे वाले भी बहुत सारे परिवार हैं।

परिवारों में विविधता की वजह से एक जैसा सामाजिक माहौल बनाना भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। वयस्कों का अपने व्यवसायिक कार्यों में अत्यधिक व्यस्त होना एवं बच्चों का प्रतियोगी माहौल की वजह से तनाव में होना इसे और मुश्किल बना देता है। आईए, आज हम खुशहाल परिवार बनाने के सुनहरे 7 नियम में से प्रथम चार नियम सीखते हैं।

पहला नियम - परिवार को सिर्फ़ पैसा नहीं समय भी दें 
अकसर हम परिवार से कहते हैं, ‘मैं काम किसके लिए कर रहा हूँ? तुम्हारे लिए ही तो…’ लेकिन अगर आप परिवार से पैसे और आपके समय में से चुनने के लिए कहेंगे तो वो निश्चित तौर पर आपके समय को चुनेंगे। खुशहाल परिवार एक दूसरे के साथ सिर्फ़ टाइम नहीं, बल्कि क्वालिटी टाइम बिताते हैं। इसका अर्थ जब आप उनके साथ होते हैं तब आप सिर्फ़ उनके साथ होते हैं ना कि लैपटॉप, कंप्यूटर, वीडियो गेम और टीवी के साथ।

अगर आप दोनों के बीच सामंजस्य बैठाना चाहते हैं तो कम से कम रात का खाना साथ खाना शुरू कर दीजिए। खाने के दौरान अपने पूरे दिन व भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करें। माता-पिता से उनके स्वास्थ्य और अन्य आवश्यकताओं के बारे में चर्चा करें और बच्चों से मज़ाक़-मस्ती के साथ भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करें। यह हमें एक-दूसरे के जीवन में शामिल होने का मौक़ा देगा। इसके अलावा सैर के लिए जाये, खेल में भाग लें, या एक परिवार के रूप में एक साथ बोर्ड गेम खेलें।

दूसरा नियम - एक परिवार के रूप में समाज को बेहतर बनाने के लिए अपना योगदान दें
जैसा मैंने आपको पहले बताया, एक संगठन के रूप में पेरेंटिंग खत्म होती जा रही है। ऐसे में सप्ताह या पंद्रह दिन में एक दिन समाज के लिए निकालना आपके परिवार को सुखी व समाज के प्रति ज़िम्मेदार बनाता है। एकल परिवार के जमाने में बच्चों की परवरिश में समाज की भूमिका सुनिश्चित करता है। समाज से जुड़े रहना बच्चों को ज़िम्मेदार व कमज़ोर और जरूरतमंद लोगों के प्रति सहानुभूति का भाव रखना सिखाकर, उनमें इंसानियत का भाव बढ़ाता है। इसके अलावा यह उन्हें अपना सामुदायिक दायरा बढ़ाकर नए मौके तलाशने का अवसर भी देता है।

तीसरा नियम - परिवार में बच्चों सहित सभी को अच्छी शिक्षा और अपनी बात रखने का मौक़ा दें
एक चीज़ जो आपके परिवार से कभी भी कोई छीन नहीं सकता है और दूसरी बात जो आपके परिवार को सब कुछ दिलवा सकती है, वह है ‘शिक्षा।’ अच्छी शिक्षा भविष्य की बहुत सारी परेशानियों से बचा लेती है।

शिक्षा के साथ ही दूसरी सबसे महत्वपूर्ण चीज़ जो आपके परिवार में आत्मीयता बढ़ा सकती है वह है, सबको अपनी बात बोलने का, अपने विचार रखने का मौक़ा देना। खुशहाल परिवार में यह मायने नहीं रखता कि किसने क्या किया है या कौन क्या कर रहा है? खुशहाल परिवार के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि घर के काम और जिम्मेदारियों का ध्यान रखते हुए मज़बूत नींव कैसे तैयार की जाए? यह आपसी बातचीत से ही सम्भव है।

आपसी बातचीत का सबसे महत्वपूर्ण नियम है, ‘व्यक्ति के बारे में बात करने के स्थान पर व्यक्ति से बात करें।’

चौथा नियम - सभी के लिए एक समान नियम बनाएँ एवं पारिवारिक परम्पराओं का विकास करें
परिवार को खुश और सुखी रखने के लिए एक दूसरे से की जाने वाली अपेक्षा और व्यवहार को लेकर स्पष्ट नियम होना अत्यंत लाभकारी होता है। यह मन में पड़ने वाली अनावश्यक गाँठों से रिश्तों को बचा लेता है। अगर परिवार में छोटे बच्चे हों तो नियमों की सूची लिखकर प्रदर्शित करना ज़्यादा फ़ायदेमंद रहता है।

नियम इस प्रकार के होने चाहिए जो एक दूसरे का सम्मान और एक समान व्यवहार करने के लिए प्रोत्साहित करें। जिन्हें मानना परिवार के हर सदस्य के लिए ज़रूरी हो। नियम बनाते समय पूरे परिवार की भागीदारी सुनिश्चित करना आपसी विश्वास को बढ़ाता है।

नियम के समान ही पारिवारिक परंपराएँ परिवार को एकजुट रखने में मदद कर सकती हैं। परम्पराओं को सिर्फ़ छुट्टी में घूमने जाना या त्यौहार साथ मनाने तक सीमित रखने के स्थान पर इसे दैनिक या साप्ताहिक बनाने का प्रयास करें। जैसे शनिवार या रविवार की रात को कोई बोर्ड गेम खेलना, सामूहिक भोजन बनाना या सोने से पहले अपने दिन के सबसे मज़ेदार संस्मरण या दिन के मुख्य आकर्षण को एक दूसरे को सुनाना। याद रखिएगा दोस्तों, परम्पराएँ आपको परिवार से जोड़े रखती हैं।

दोस्तों, आज हमने खुशहाल परिवार बनाने के प्रथम 4 नियम सीखे। कल हम खुशहाल परिवार बनाने के 7 सुनहरे नियम - भाग 2 में बचे हुए 3 नियमों पर चर्चा करेंगे।

-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर
dreamsachieverspune@gmail.com

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