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खुशहाल परिवार बनाने के 7 सुनहरे नियम - भाग 2

खुशहाल परिवार बनाने के 7 सुनहरे नियम - भाग 2
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April 19, 2021
खुशहाल परिवार बनाने के 7 सुनहरे नियम - भाग 2

दोस्तों, कल हमने खुशहाल परिवार बनाने के सुनहरे 7 नियमों में से प्रथम 4 नियम सीखे थे। आगे बढ़ने से पहले आईए उन चारों नियमों को संक्षिप्त में दोहरा लेते हैं-

पहला नियम - परिवार को सिर्फ़ पैसा नहीं समय भी दें 
मैं मानता हूँ परिवार की ज़रूरतें पूरा करने के लिए पैसा ज़रूरी है लेकिन हमें पैसे और परिवार को देने वाले समय के बीच सामंजस्य बैठाना होगा। खुशहाल परिवार के सभी सदस्य एक दूसरे के साथ सिर्फ़ टाइम नहीं, बल्कि क्वालिटी टाइम बिताते हैं। अर्थात् पारिवारिक समय में परिवार का हर सदस्य शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक तीनों ही रूप में वहाँ मौजूद रहता है। इसके लिए आप एक टाइम साथ खाना खाना शुरू कर सकते हैं, रोज़ सैर पर जा सकते हैं, सोने के पहले साथ बैठकर चर्चा कर सकते हैं या बोर्ड गेम खेल सकते हैं।

दूसरा नियम - एक परिवार के रूप में समाज को बेहतर बनाने के लिए अपना योगदान दें
आज समाज में संगठन के रूप में पेरेंटिंग खत्म होती जा रही है। इसे बढ़ाने के लिए सप्ताह या पंद्रह दिन में एक बार दोस्तों, रिश्तेदारों से मिलने के लिए समय निकालना या सामाजिक कार्यों को करना बच्चों को ज़िम्मेदार व कमज़ोर और जरूरतमंद लोगों के प्रति सहानुभूति का भाव रखना सिखाता है।

तीसरा नियम - परिवार में बच्चों सहित सभी को अच्छी शिक्षा और अपनी बात रखने का मौक़ा दें
‘शिक्षा’ ही एकमात्र ऐसी चीज़ है जो आपके परिवार से कभी भी कोई छीन नहीं सकता है और वह आपको सब कुछ दिलवा सकती है।  अच्छी शिक्षा हमें परेशानियों से बचाकर, भविष्य के लिए तैयार करती है। अच्छी पारिवारिक नींव तैयार करने के लिए परिवार में सभी को बोलने का मौक़ा देना एक अच्छा विचार है। यह परिवार के सदस्यों के बीच आत्मीयता को बढ़ाता है।

चौथा नियम - सभी के लिए एक समान नियम बनाएँ एवं पारिवारिक परम्पराओं का विकास करें 
परिवार को खुश और सुखी रखने के लिए एक दूसरे से की जाने वाली अपेक्षा और व्यवहार को लेकर स्पष्ट नियम बनाएँ और परिवार में छोटे बच्चे हों तो नियमों की सूची को लिखकर प्रदर्शित करें। नियम इस प्रकार के होने चाहिए जो एक दूसरे का सम्मान और एक समान व्यवहार करने के लिए प्रोत्साहित करें और जिन्हें हर सदस्य माने।

नियम के समान ही पारिवारिक परंपराएँ बनाएँ। परम्पराओं में घूमने जाने या त्यौहार मनाने के साथ, शनिवार या रविवार की रात को बोर्ड गेम खेलना, सामूहिक भोजन बनाना, सोने से पहले अपने दिन के सबसे मज़ेदार संस्मरण या दिन के मुख्य आकर्षण को एक दूसरे को सुनाना शामिल कर सकते हैं। याद रखिएगा दोस्तों परम्पराएँ आपको परिवार से जोड़े रखती हैं।

पाँचवाँ नियम - एक दूसरे की मदद करें
इस दुनिया में हर व्यक्ति अलग है। हर किसी का सोचने का, कार्य करने का अपना तरीक़ा होता है। सबकी पसंद-नापसंद अलग-अलग होती है, हो सकता है आपको क्रिकेट या फुटबॉल पसंद हो और अन्य सदस्यों को पिक्चर या गाने देखना। वैचारिक भिन्नता तब तक नुक़सान दायी नहीं है जब तक वह आपके दिलों में दूरी ना बना रही हो। खुशहाल परिवार एक दूसरे के प्रयासों का समर्थन करते हैं, एक दूसरे को अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करते हैं। याद रखिएगा परिवार से मिला पूर्ण समर्थन आपकी बाहरी लोगों पर निर्भरता कम करता है और आपके रिश्ते को भावनात्मक रूप से मज़बूत बनाता है।

छठा नियम - नियमित पारिवारिक बैठकें करें 
व्यक्ति के बारे में बात करने के स्थान पर व्यक्ति से बात करना बेहतर पारिवारिक माहौल बनाता है और नियमित रूप से पारिवारिक बैठक करना आपको आपस में चर्चा करने का मौक़ा देता है। मासिक पारिवारिक बैठक में आप सामान्य बातों पर चर्चा करने के साथ-साथ क्या अच्छा चल रहा है और एक परिवार के रूप में किन समस्याओं के समाधान खोजने हैं, किन कार्यों को मिलकर पूरा करना है, क्या संसाधन जुटाने हैं आदि पर भी चर्चा कर सकते है। पारिवारिक बैठक आपसी सामंजस्य बढ़ाती है और परिवार के सदस्य को विपरीत परिस्थिति में अकेलेपन और तनाव से बचाती है। दोस्तों पारिवारिक बैठक के दौरान समस्या का हल खोजना, बच्चों को समस्या सुलझाने का कौशल सिखाने का सबसे बेहतरीन तरीक़ा है।

सातवाँ नियम - स्वीकारें, समझौता करें और पीठ थपथपाएँ
दोस्तों इतना सब करने के बाद भी आपको कई बार ऐसा महसूस होगा कि पारिवारिक स्तर पर कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। हो सकता है बहु और सास की ना बनती हो, दो भाइयों या पति-पत्नी के बीच कुछ वैचारिक मतभेद हों, घर की दो बहुओं में झगड़ा हो, लेकिन चिंता मत कीजिएगा। अगर आपके घर में सास-ससुर की या बेटे-बहु की चलती है तो चलने दें। क्या फ़र्क़ पड़ता है?

याद रखिएगा दोस्तों हमारे यहाँ रिश्तों में एक्सचेंज ऑफ़र नहीं मिलते हैं कि पत्नी पसंद नहीं है तो बदल लो या सास पसंद नहीं है तो पुरानी देकर नई ले जाओ। आप खुश रहेंगे तो भी इन्हीं के साथ रहेंगे और दुखी रहेंगे तो भी इन्हीं के साथ। इसलिए सबसे पहला काम, रिश्तों को स्वीकारें, जो है जैसा है, आपका है।

सामने वाला अपनी ग़लतियाँ दोहराएगा लेकिन उसे उसकी ग़लतियों के साथ स्वीकार करें। जो बातें आपको ग़लत लगती हैं उनके साथ थोड़ा समझौता करें। वैसे मैं बहुत अच्छे से समझता हूँ कि ज़्यादा लम्बे समय तक समझौता करना मुश्किल होता है और कभी-कभी हमारे सब्र का बांध टूट जाता है और हम सामने वाले की ग़लतियाँ निकालना और गिनाना दोनों शुरू कर देते हैं। लेकिन दोस्तों ऐसा कभी मत करिएगा। मान लीजिए सामने वाला 7 ग़लतियाँ और 3 अच्छे काम करता है तो उसकी ग़लतियाँ निकालने या गिनाने के स्थान पर 3 अच्छी बातों की तारीफ़ कीजिएगा। आपका पीठ थपथपाना उसे और बेहतर बनने के लिए प्रेरित करेगा।

परिवार में सभी का साथ होना बच्चों के लिए बड़ा फ़ायदेमंद होता है। बड़े परिवार में रहने वाले बच्चे भावनात्मक रूप से मज़बूत रहते हैं और परिवार का ध्यान रखने के लिए हमारे पास हमेशा अनुभवी अतिरिक्त हाथ और आँखें रहती हैं। तो दोस्तों उपरोक्त सातों सुनहरे नियम को काम में लें और रिश्तों को बेहतर बनाकर अपने परिवार को खुशहाल बनाएँ।

-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर
dreamsachieverspune@gmail.com

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