फिर भी ज़िंदगी हसीन हैं...

खूबियाँ या ख़ामियाँ - नज़रिया आपका

खूबियाँ या ख़ामियाँ - नज़रिया आपका
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Aug 25, 2021

खूबियाँ या ख़ामियाँ - नज़रिया आपका!!!


राखी के पर्व के दौरान मुझे अमेरिका से वापस हिंदुस्तान लौटे अपने एक मित्र व उसके परिवार से मिलने का मौक़ा मिला। इस मुलाक़ात में मैंने महसूस करा कि मेरे मित्र का बच्चा अपने देश, अपने परिवार के पास वापस आकर खुश तो बहुत था। उसे यहाँ के बच्चों के संस्कार, अपनापन, संस्कृति आदि आकर्षित कर रहे थे लेकिन फिर भी वो हर चीज़ की तुलना अमेरिका से कर परेशान होता था और साथ ही परिवार के अन्य बच्चों को अमेरिका के बारे में बताकर नीचा दिखाता था। 


इसी वजह से परिवार के दूसरे बच्चे अमेरिका न जा पाने की वजह से खुद को पिछड़ा हुआ मान हीनभावना के शिकार हो गए थे। वे अमेरिका से आए बच्चे की भाषा, गैजेट्स और तरक़्क़ी से प्रभावित थे और वे सोचते थे कि वे जीवन में बहुत पिछड़ गए हैं और कभी भी अमेरिका वाले बच्चे की बराबरी नहीं कर पाएँगे। 


तुलनात्मक दृष्टिकोण से होने वाले नुक़सान से बेख़बर बच्चे रोज़ इसी विषय पर सोच-सोच कर इस दूरी को और बढ़ा  हीनभावना के शिकार होते जा रहे थे। हालाँकि मेरा मित्र उन्हें समझाने का प्रयास कर रहा था लेकिन फिर भी कहीं ना कहीं उसे लगता था कि उसे सफलता नहीं मिल पा रही है। उसके कहने पर मैंने बच्चों को एक कहानी सुनाई, जो इस प्रकार थी-


पहाड़ के ऊपर एक बड़ा सुंदर सा गाँव था लेकिन उस गाँव में पानी की काफ़ी कमी थी। गाँव में रहने वाले सभी लोग पहाड़ी के नीचे बहने वाली नदी से पानी लेकर आया करते थे। इन्हीं लोगों में एक महिला भी थी जो धोबी का काम किया करती थी। इसी वजह से उसे रोज़ पहाड़ी से नीचे पानी लेने जाना पड़ता था।


नीचे से पानी लाने के लिए उस महिला ने एक छड़ी के सिरों के ऊपर घड़े लटका रखे थे। छड़ी को कंधे पर रख वह आसानी से दो घड़े पानी ले आया करती थी। समय के साथ उसके एक घड़े में दरार आ गई। दरार का पता चलने के बाद भी महिला ने उस ख़राब घड़े को बदला नहीं और पूर्व की तरह, छड़ी से बंधे उन घड़ों को ऊपर तक पानी से भरके, पूर्ण संतुलन के साथ गाँव लाने लगी। घर पहुँचते-पहुँचते दोनों में से एक घड़े में दरार की वजह से आधा ही पानी बच पाता था, जबकि दूसरा घड़ा पूरा भरा रहता था।


रोज़ उसे आधा भरा देख, दूसरा घड़ा अपनी उपलब्धि पर गर्व करने लगा और रोज़ किसी ना किसी तरह से दरार वाले घड़े को नीचा दिखाने लगा। इसी वजह से दरार वाला घड़ा लज्जित और दुखी रहने लगा। उसे लगता था कि वह अपने कार्य को अच्छे से पूरा नहीं कर पा रहा है।


दरार वाले घड़े को इस हाल में देख महिला ने उससे इसकी वजह पूछी। घड़े ने उदासी का कारण पूछे जाने पर कहा, ‘सबसे पहले तो अपनी ख़ामियों की वजह से मैं आपसे माफ़ी चाहता हूँ। मैं अच्छे से अपना कार्य नहीं कर पा रहा हूँ क्यूंकि आधा पानी तो मैं रास्ते में ही गिरा देता हूँ। मैं एक अच्छा साथी नहीं हूँ।’ 


महिला को घड़े पर दया आ गई, वह बोली, ‘घड़े, तुम ग़लत समझ रहे हो!’, तुमने अपनी योग्यता, क्षमता और किए गए कार्य को ध्यान से नहीं देखा है। ऐसा करना कल जब हम पानी लेने के लिए नदी की तरफ़ जाएँगे, तब तुम अपनी ओर वाले रास्ते को ध्यान से देखना। अगले दिन घड़े ने वैसा ही किया, जैसा उसकी मालिक महिला ने उसे बताया था।


घर वापस आने के बाद महिला ने दरार वाले घड़े से पूछा, ‘घड़े, रास्ते में तुमने क्या देखा?’ घड़ा बोला, ‘पगडंडी के एक ओर तो बिलकुल सूखा है लेकिन उसके दूसरे किनारे पर बहुतायत में सुंदर फूल उग रहे हैं।’ उसका जवाब सुनते ही महिला बोली, ‘वह सुंदर फूल सिर्फ़ तुम्हारी ही वजह से हैं।’ घड़ा आश्चर्यचकित था, उसने तुरंत उस महिला से अगला प्रश्न किया, ‘मैं समझ नहीं पाया, क्या आप मुझे इसे समझाएँगी?’ महिला बोली, ‘मैं उसे पथरीले और वीरान रास्ते को देख परेशान थी। मैं वहाँ अच्छे फूल-पौधे लगाना चाहती थी, पर उन्हें रोज़ सींचना मेरे लिए मुश्किल था। उस मुश्किल और असम्भव से लगने वाले उस कार्य को तुमने बड़ी आसानी से कर दिया।’ महिला के मुँह से अपनी तारिफ़ सुन दरार वाला घड़ा बहुत खुश था, उसका सारा दुःख मानो दूर हो गया था। उसे आज समझ आ गया था जिस चीज़ को वह अपनी ख़ामी, कमजोरी समझ रहा था वही ख़ामी रास्ते के फूलों के लिए वरदान साबित हुई।


जी हाँ दोस्तों, हम सभी भाषा, विचार, संस्कृति, शारीरिक बनावट, योग्यता के आधार पर अलग-अलग हैं। हम सभी में कुछ ना कुछ कमियाँ या ख़ामियाँ हैं लेकिन उन सभी ख़ामियों के बावजूद भी हम अपने आप में अद्वितीय है। वैसे अगर आप गहराई से सोचकर देखेंगे तो पाएँगे कि यह भिन्नताएँ या विभिन्न विशेषताएँ, जिन्हें कई बार हम अपनी कमियाँ या दोष मानते हैं वही हमें और दुनिया को इतना दिलचस्प, सुंदर और बेहतर बनाते हैं। इसे आप तितली के उदाहरण से भी समझ सकते हैं। 


तितली अपने पंखों का रंग नहीं जानती लेकिन इंसान की आँखें जानती है कि वह कितनी खूबसूरत है। इसी तरह आप नहीं जानते कि आप कितने अच्छे हैं, लेकिन दूसरे देख सकते हैं कि आप खास हैं।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर 

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