फिर भी ज़िंदगी हसीन हैं...
गर्व ना की शर्म आधारित राष्ट्रवाद बनाएगा आपको विकसित राष्ट्र


Aug 15, 2021
गर्व ना की शर्म आधारित राष्ट्रवाद बनाएगा आपको विकसित राष्ट्र!!!
सर्वप्रथम आप सभी को ग्लोबल हेराल्ड परिवार की ओर 75वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ।
दोस्तों हमें शारीरिक आज़ादी तो आज से 75 वर्ष पूर्व मिल गई थी, लेकिन हमें अभी मानसिक रूप से आज़ाद होना बचा है। जी हाँ दोस्तों, मैं सही कह रहा हूँ। इतिहास की ग़लत जानकारी, जो पता नहीं क्यूँ हमको दी गई है, की वजह से हम आज भी मानसिक ग़ुलामी में जी रहे है। इस पावन मौक़े पर, थोड़ा ग़लत लहजे में सच बोलने के लिए सबसे पहले तो माफ़ी चाहता हूँ।
अपनी बात के समर्थन में आपसे इतिहास के पन्नों से ली गई कुछ जानकारी साझा करता हूँ, जो हममें से कई लोग नहीं जानते हैं। अकसर हमें बताया जाता है कि अंग्रेजों ने हमारे ऊपर 200 वर्ष तक शासन किया था, लेकिन दोस्तों यह बिलकुल भी सच नहीं है। उन्होंने मात्र 98 वर्ष तक भारत के एक छोटे से हिस्से पर राज किया था।
जी हाँ दोस्तों, 200 वर्ष नहीं मात्र 98 वर्ष। आईए थोड़ा सा सही इतिहास समझ लेते हैं। वर्ष 1757 में रॉबर्ट क्लाइव ने भारत के एक प्रांत बंगाल (आज की भाषा में राज्य) पर विजय प्राप्त करी थी। हालाँकि कूटनीतिक दृष्टि से बंगाल पर जीत प्राप्त करना बड़ी बात थी क्यूँकि बंगाल आर्थिक दृष्टि से हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण था। ज़्यादातर व्यापारिक गतिविधियाँ वहाँ से संचालित होती थी। लेकिन उसके बाद भी इसे ‘भारत जीत लेना’ कहना पूरी तरह ग़लत है।
इसके बाद 1799 में अंग्रेजों ने मैसूर, फिर 1818 में मराठों पर व 1849 सिख साम्राज्य पर जीत हासिल करी। अगर इस आधार पर देखा जाए तो अंग्रेजों को भारत के बड़े हिस्से पर जीत प्राप्त करने में लगभग 92 वर्ष लगे और उसके बाद वे लगभग 98 वर्षों तक हमारे देश के उस हिस्से पर राज कर सके।
1857 के विद्रोह को रोकने के बाद अंग्रेजों ने भारत को आधिकारिक रूप से ब्रिटिश साम्राज्य में शामिल किया। उसके पहले ईस्ट इंडिया कम्पनी भारतीय उप-महाद्वीप की महान शक्तियों में से एक थी, लेकिन निश्चित रूप से इनका शासन नहीं था। लेकिन फिर भी सिर्फ़ बंगाल के आधार पर कहा जाए तो भी ग़ुलामी 190 वर्षों की थी। अंग्रेज इसे 200 वर्षों की ग़ुलामी कहें तो समझ आता है क्यूँकि यह उनके लिए गर्व की बात थी, लेकिन हमारे लिए तो बिलकुल भी नहीं।
दोस्तों इसके बाद सबसे बड़ा सवाल आता है, फिर आख़िर क्या कारण था कि हमने इतिहास में इसे 200 वर्षों की ग़ुलामी बताया? वैसे इसका कारण बताने से पहले मैं आपको ऐसी ही एक और ग़लत धारणा से अवगत करा देता हूँ, ‘हम 1200 वर्षों तक ग़ुलाम रहे।’
अगर आप इतिहास की कड़ियों को जोड़कर देखेंगे, तो पाएँगे कि दोनों ही धारणाएँ ग़लत हैं। अब आप निश्चित तौर पर इसके पीछे क्या कारण है जानने के लिए उत्सुक होंगे, तो दोस्तों मेरी नज़र में यह ‘शर्म पर आधारित राष्ट्रवाद’ खड़ा करने का एक प्रयास था। वैसे इस नज़रिए को आप बेनेडिक्ट एंडरसन के कथन से भी समझ सकते हैं, ‘शर्म राष्ट्रीयता का एक महत्वपूर्ण आधार है।’
दोस्तों आज़ादी के पिछत्तर वर्षों में हमने बहुत सारी उपलब्धियाँ प्राप्त करी हैं, फिर चाहे क्षेत्र कोई सा भी क्यूँ ना हो। आप चाहें तो कम्प्यूटर, साइंस, टेक्नॉलजी, कृषि, शिक्षा, साहित्य, खेल इत्यादि किसी भी क्षेत्र की बात करके देख लें। लेकिन इतना करने के बाद भी हमारी गिनती अभी भी विकासशील देशों में ही होती है। अगर विकासशील से विकसित राष्ट्र की श्रेणी में जाना है तो दो मुख्य कार्य करने होंगे। पहला, अपराध, भ्रष्टाचार, हिंसा, नक्सलवाद, आतंकवाद, ग़रीबी, बेरोज़गारी, अशिक्षा आदि पर विजय प्राप्त करना होगी और दूसरा, इसे पूरा करने के लिए शर्म नहीं गर्व पर आधारित राष्ट्रवाद खड़ा करना होगा।
दोस्तों गर्व पर आधारित राष्ट्रवाद की कल्पना मानसिक ग़ुलामी से आज़ादी पाकर ही पाई जा सकती है और इसके लिए हमें अपनी अगली पीढ़ी को पूर्ण सच्चाई के साथ, सही इतिहास पढ़ाना होगा। जी हाँ, हमें उन्हें हमारे देश के गौरवशाली इतिहास को बार-बार बताना होगा। तो चलिए देर किस बात की, कुछ बातें संक्षेप में अभी बता देते हैं।
दोस्तों, मुग़ल शासन काल लगभग 250 वर्षों का था और अंग्रेजों का 190 वर्षों का। लेकिन हमारा देश या समाज इससे कहीं ज़्यादा पुराना और समृद्ध है। बस फ़र्क़ इतना सा है कि हमने मुग़ल और अंग्रेज़ी शासन के बारे में विस्तार से पढ़ा है लेकिन मोर्य काल जो लगभग 550 वर्षों का था, गुप्त काल जो लगभग 400 वर्षों का था और चोल वंश जो लगभग 1000 वर्षों का था, के बारे में इतना विस्तार से नहीं पढ़ा और इसीलिए ग़लत धारणा को हमने सही मान लिया। वैसे यह सूची यहाँ खत्म नहीं होती कुछ नाम और भी हैं, सातवाहन का इतिहास लगभग 500 वर्ष का है, पण्ड्या का लगभग 800 वर्ष का, पल्लव वंश का 600 वर्ष का एवं अहोम का भी लगभग 650 वर्ष का।
दोस्तों, 75वें स्वतंत्रता दिवस पर बधाई देने के साथ सिर्फ़ एक बात कहना चाहूँगा, विकसित राष्ट्र बनने के लिए मानसिक ग़ुलामी छोड़ें और उसके लिए बच्चों को सही शिक्षा देना प्रारम्भ करें क्यूँकि जिस तरह स्वयं को खोजने के लिए इंसान को अपने अंदर झांकना होता है ठीक उसी तरह राष्ट्र को मज़बूत बनाने के लिए उसके गौरवशाली पलों में झांकना होता है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर