फिर भी ज़िंदगी हसीन हैं...
छोटे प्रयासों को सराहना बच्चे को बड़ी सफलता के लिए तैयार करता है

Feb 28, 2022
छोटे प्रयासों को सराहना बच्चे को बड़ी सफलता के लिए तैयार करता है !!!
भोपाल में शिक्षकों के लिए की गई ट्रेनिंग के बाद एक शिक्षिका ने मुझसे अपने मातृत्व के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनकी बिटिया पर किस तरह ईश्वर का विशेष आशीर्वाद है और वो कितनी भाग्यवान है। उसने समय से पहले बैठना, चलना सीखा है। 2 साल से भी कम उम्र में वह बिलकुल समय से सोती और उठती है, ना ज़्यादा रोती है, ना ज़्यादा परेशान करती है। उसे जो भी सिखाने का प्रयास किया जाए वह जल्दी से सीख जाती है।
उनकी बातों में अपने बच्चे के प्रति उनका प्यार साफ़ झलक रहा था। वे मुझसे उसे अद्वितीय योग्यता वाला बच्चा बनाने में सहायता चाहती थी। वैसे एक माँ होने के नाते अपने बच्चे के लिए अच्छा सोचना, उसके 360 डिग्री विकास के लिए सचेत रहना, कहीं से भी ग़लत नहीं था। लेकिन मुझे उस बच्चे को लेकर ज़रूर चिंता हो रही थी क्यूंकि मात्र 2 वर्ष से कम की उम्र में ही उसे लेकर अपेक्षाएँ सेट की जा रही थी और आने वाले समय में उनकी अपेक्षा भरी पेरेंटिंग बच्चे को तनाव और दबाव में ला सकती थी।
वैसे दोस्तों यह कहानी उस शिक्षिका और बच्ची की ही नहीं है बल्कि इस उम्र के ज़्यादातर पैरेंट्स की है और मेरी नज़र में अपने बच्चे से शिक्षा के साथ-साथ कई क्षेत्रों में ट्राफ़ी, पदक या प्रथम स्थान पाने की आशा रखना उनमें ग़ुस्सा, तनाव, दबाव, आक्रामकता, चिड़चिड़ापन जैसे नकारात्मक भाव पैदा करता है। अगर आप पेरेंटिंग के अनुभव और साथ ही बच्चे के बचपन को सुखद बनाना, उसे खुश देखना चाहते हैं तो सबसे पहले स्वीकारें कि हर बच्चे को ईश्वर ने पहले ही अनूठा और अनोखा बनाया है। वह पहले से ही कुछ क्षेत्रों में अव्वल है लेकिन हो सकता है कि आपकी अपेक्षित फ़ील्ड में वह उतना अच्छा नहीं कर पा रहा है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि आप उसके दूसरे क्षेत्रों की उपलब्धियों को नज़र अन्दाज़ कर दें, फिर भले ही वह बहुत ही छोटी क्यूँ ना हो।
इसके लिए दोस्तों आपको बच्चे के नज़रिए से चीजों को देखना, समझना शुरू करना होगा। जैसे अकेले अंधेरे में जाना, ऊँचाई पर चढ़ना, अकेले घर पर रहना आपके लिए सामान्य हो सकता है लेकिन एक बच्चे के लिए बड़ी सफलता। इतना ही नहीं स्कूल जाने के लिए समय पर उठना, सॉरी कहना, जो विषय पसंद नहीं है उसे पढ़ना, जो भाषा नहीं आती उसमें बात करना, समय पर होमवर्क करना, पहली बार अपनी पसंद की चाकलेट दूसरे के साथ साझा करना, परिवार में किसी परिजन को खोने के दुःख को जीतना, विपरीत या चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संघर्ष करना सीखना, नए दोस्त बनाना आदि भी एक बड़ी सफलता है।
याद रखिएगा साथियों जब आप बच्चे की छोटी-छोटी सफलताओं को पहचानना, उसका जश्न या ख़ुशी बनाना, उसकी तारीफ़ करना शुरू करते हैं, वह बड़ी सफलता पाने के लिए तैयार होता जाता है। उदाहरण के लिए अगर आप बच्चे द्वारा चाकलेट साझा करके अथवा किसी की मदद करके मिले आनंद का जश्न बनाएँगे, उसकी तारीफ़ करेंगे तो आप आने वाले समय के लिए उसके दिल में दया या मदद करने, दूसरे की पीड़ा समझने का बीज बोएँगे और जिस बच्चे के दिल में दया होगी वह आने वाले दिनों में जरूरतमंद, मूक पशुओं या प्रकृति की तकलीफ़ों, परेशानियों को भी समझेगा।
जी हाँ साथियों, बच्चे खुश रहने, बड़ों की आशाओं या आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बहुत कुछ करते हैं पर अकसर बड़े या वयस्क लोग अपनी अपेक्षाओं के चलते उनके प्रयासों को पहचान नहीं पाते हैं और इसी वजह से बच्चों से भावनात्मक तौर पर दूर होते जाते हैं।
तो आईए दोस्तों आज से ही हम अपने बच्चों को बड़ी सफलता के लिए तैयार करने के लिए, उसकी छोटी-छोटी सफलताओं का आनंद मनाएँ और साथ ही समाज या दर्शकों से उसके लिए ढेर सारी तालियों की अपेक्षा करने के स्थान पर, खुद उसके लिए ताली बजाना शुरू करें।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर



