फिर भी ज़िंदगी हसीन हैं...

जीवन को सौ प्रतिशत जीने के 5 तरीक़े - भाग 2

जीवन को सौ प्रतिशत जीने के 5 तरीक़े - भाग 2
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June 10, 2021

जीवन को सौ प्रतिशत जीने के 5 तरीक़े - भाग 2



मेरा मानना है कि अपने जीवन को सौ प्रतिशत जीना बहुत ही आसान है बस हमें अपने हर पल में जीवन को देखना और उसे जीना शुरू करना होगा क्यूँकि हमारा पूरा जीवन इन पलों में मिले अनुभवो में ही तो छिपा हुआ है। ‘हर पल को जीना’ कहना जितना आसान है उतना ही आसान इसे अपने जीवन में उतारना है। इसके लिए हमें सिर्फ़ अपने नज़रिए को सकारात्मक बनाना  होगा और समस्याओं या परेशानियों की जगह सम्भावनाओं को खोजना होगा। 


सम्भावनाओं को खोजने वाले लोग विपरीत परिस्थितियों या परेशानियों के दौर में भी क़िस्मत पर दोष देते हुए, रोने के स्थान पर मुस्कुराते हुए, जीवन का आनंद लेते हुए दिख जाएँगे। वे जानते हैं कि जीवन छोटा है और हमें ना तो पूर्व जन्म के बारे में कुछ पता है, ना ही अगले जन्म के बारे में हम कुछ जानते हैं। इसलिए हमारे पास जीवन को पूर्ण रूप से जीने और उसका अधिकतम लाभ उठाने के सिवाय कोई अन्य विकल्प है ही नहीं और जब विकल्प है ही नहीं तो क्यूँ ना इसे ही 100 प्रतिशत जिया जाए। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए कल हमने जीवन को सौ प्रतिशत जीने के पाँच तरीक़ों में से प्रथम 2 तरीक़े सीखे थे। आईए आगे बढ़ने से पहले कल सीखी गई बातों को दोहरा लेते हैं।


पहला सूत्र - आप के लिए क्या महत्वपूर्ण है तय करें

हमारे द्वारा लिए गए निर्णय ही हमारा भविष्य तय करते हैं। इसलिए सर्वप्रथम अपनी प्राथमिकताओं को तय करें और उसके आधार पर अपने अगले दिन को प्लान करें। जैसे मैं अपनी लिस्ट में सबसे पहले वे कार्य लूँगा जो मेरे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखे, उसके बाद अपने परिवार को, फिर व्यवसाय, फिर दोस्ती और अंत में समाज को। इसके बाद इन प्राथमिकताओं के आधार पर काम की लिस्ट बनाऊँगा और उसमें से शुरुआत के 5-7 काम पर कार्य करूँगा।


दूसरा सूत्र - अधिक जोखिम लें, दिल से नहीं अपने दिमाग़ से

सोच समझ कर उठाया हुआ जोखिम ही जीवन में सफलता और ख़ुशी लाकर जीवन को बेहतर बनाता है। इसलिए हर उस जोखिम को लें जो आपके जीवन को बेहतर या आनंददायक बनाता हैं। मेरी नज़र में जीवन में नीरसता सिर्फ़ और सिर्फ़ जोखिम के डर की वजह से ही आती है। अगर मेरी बात से सहमत ना हों तो उस ख़ुशी, उस उत्साह को याद करके देखिएगा जिस दिन आपने कोई जोखिम या कठिन कार्य करने का निर्णय लेकर उसमें सफलता पाई हो।


तीसरा सूत्र - जिनकी परवाह करते हैं, उनके प्रति अपना प्यार दिखाए

दोस्तों यह एक ऐसी चूक थी जिसे मैंने अपने जीवन में लम्बे समय तक किया। आमतौर पर हम अपने लोगों को अपनी दैनिक प्राथमिकताओं में रखते ही नहीं हैं। इसलिए नहीं कि हम उन्हें प्यार नहीं करते या हमारे जीवन में उनका महत्व नहीं है बल्कि सिर्फ़ इसलिए कि यह तो हमारे अपने हैं, हमेशा हमारे साथ हैं तो फिर अलग से इस बात का एहसास करवाने की आवश्यकता क्या है। ठीक इसी तरह की एक गलती हम और करते हैं, हम इंसानों से ज़्यादा चीजों से प्यार करना शुरू कर देते हैं। 


जीवन में दोस्तों, दोनों तरह के लोग मिलेंगे घृणा करने वाले भी और प्यार करने वाले भी। घृणा करने वालों को नज़रअंदाज़ करें और अपने लोगों को, जो आपको प्यार करते हैं उन्हें एहसास कराए कि आप उनका ख़याल रखते हैं, उनसे प्यार करते हैं।


चौथा सूत्र - अपने मूल्यों से समझौता न करें 


याद रखिएगा दोस्तों, भले ही किसी को पता हो या ना हो लेकिन जो कार्य आपने किया है वह आपको पता है। इसलिए हर उस कार्य को करने से बचें जिसके लिए आपको किसी से भी मुँह छुपाना पड़े और सबसे महत्वपूर्ण आईने से। इसलिए याद रखें हमें सफल होना है, जीवन को सौ प्रतिशत जीना है लेकिन सही मूल्य पर, किसी भी मूल्य पर नहीं।


पाँचवाँ सूत्र - दूसरों के प्रति दयालु बनें 

जिस तरह के व्यवहार की अपेक्षा आप दूसरों से खुद के लिए करते हैं, वैसा ही व्यवहार आप उनके साथ करें। पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के अनुसार, ‘एक मजबूत आदमी दयालु होता है। दया और करुणा कोई कमजोरी नहीं है। ईमानदारी के साथ, दूसरों के साथ सम्मान का व्यवहार करना आपका बचपना नहीं है।’


यूसीएलए के बेडारी काइंडनेस इंस्टीट्यूट के द्वारा किया गया शोध बताता है कि दयालु बनने से आपका जीवनकाल बढ़ सकता है। इंस्टीट्यूट के निदेशक फेस्लर कहते हैं, "आपकी अवहेलना करने वाले या कम चिंता करने वाले और आपके साथ खुलेआम दुश्मनी करने वाले लोगों के साथ रहना आपके लिए बुरा है। यह आपके जीवनकाल को छोटा करता है। इसके उलट एक दूसरे के प्रति दया दिखाने और प्यार दर्शाने से तनाव कम होता है।” दोस्तों शोध में तो यह भी पता चला है कि सिर्फ़ दूसरे लोगों से हाल-चाल पूछना उनका सुख बढ़ा देता है और लोगों के प्रति दयालु रहने से आपका ब्लड प्रेशर भी सामान्य रहता है।


जी हाँ दोस्तों, इसीलिए तो कहता हूँ, अगर आप अच्छा जीवन जीना चाहते हैं तो लोगों के लिए नहीं बल्कि खुद की बेहतरी के लिए दयालु बनें। आशा करता हूँ दोस्तों उपरोक्त 5 सूत्रों को प्रयोगकर आप अपने वर्तमान को 100 प्रतिशत जीते हुए, उपयोगी बनाएँगे और अपने भविष्य को उज्ज्वल और ज़्यादा सुखमय बनाएँगे।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर 

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