फिर भी ज़िंदगी हसीन हैं...

तीन आदतें अपनाएँ, राष्ट्रीय स्तर पर ख़ुशी बढ़ाएँ

तीन आदतें अपनाएँ, राष्ट्रीय स्तर पर ख़ुशी बढ़ाएँ
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Mar 22, 2021
तीन आदतें अपनाएँ, राष्ट्रीय स्तर पर ख़ुशी बढ़ाएँ…


दोस्तों निश्चित तौर पर आप सभी मेरी इस बात से सहमत होंगे कि आज दुनिया भारतीय दर्शन, आध्यात्मिक शक्ति के साथ-साथ भारतीयों के द्वारा स्वास्थ्य एवं शांति के लिए किए गए वैश्विक योगदान के महत्व को स्वीकारती है। इसीलिए भारतीय अर्थव्यवस्था तेज़ी के साथ बढ़ती जा रही है। कोविद से लड़ने के लिए भारत के द्वारा पूरी दुनिया को वैक्सीन उपलब्ध करवाना उसकी इन्हीं प्राथमिकताओं को प्रदर्शित करता है। लेकिन इन सबके बावजूद भी प्रसन्नता के मामले में हमारा समाज काफ़ी पीछे है। जी हाँ दोस्तों, हर क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी प्रसन्न समाज की सूची में ना सिर्फ़ नीचे रहना बल्कि और नीचे सरक जाना चिंतनीय विषय है।

संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी की गई वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2021 के अनुसार 149 देशों में हमारा स्थान 139 वां है, जो निश्चित तौर पर हमारे लिए चिंता का विषय है। हमारे पड़ोसी देश चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि सभी हमसे इस मामले में आगे हैं। इसके विपरीत फिनलैंड ने एक बार फिर सबसे खुशहाल देश के अपने तमग़े को बरकरार रखा हैं।

प्रसन्नता सूचकांक नापने के लिए यूनाइटेड नेशंस सस्टेनेबल डेवलपमेंट सॉल्यूशंस नेटवर्क ने तीन मुख्य इंडिकेटर्स को आधार बनाया। यह तीन इंडिकेटर्स निम्नानुसार थे-
1) जीवन का मूल्यांकन (life evaluations)
2) सकारात्मक भावनाएं (positive emotions)
3) नकारात्मक भावनाएं (negative emotions)
जैसा मैंने पूर्व में आपसे साझा किया था कि भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज़ी को पूरी दुनिया ने न सिर्फ़ स्वीकार किया है बल्कि हमारी पीठ भी थपथपाई है। खुद संयुक्त राष्ट्र ने मानव विकास के क्षेत्र में भारतीय उपलब्धियों को रेखांकित किया है।

लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की यह तेज़ी पिछले दो-ढाई दशकों में विकास प्रक्रिया के साथ हर मामले में बहुत ज्यादा विषमता लेकर आई है। जो पहले से समर्थ थे, वे इस प्रक्रिया में और ताकतवर हो गए हैं। यानी लखपति करोड़पति हो गए और करोड़पति अरबपति बन गए। एकदम साधारण आदमी के जीवन का स्तर भी बदला है लेकिन बराबरी की होड़ की आदत हर वर्ग में नई तरह की समस्याएँ लेकर आई है। जी हाँ दोस्तों बराबरी की यह दौड़ हमें, जो हमारे पास है उसका आनंद लेने नहीं देती और जो नहीं है उसके पीछे दौड़ने के लिए मजबूर करके मानसिक अस्थिरता पैदा करती है। निम्नलिखित तीन दैनिक आदतें आपको प्रसन्नता का स्तर ऊपर उठाने में मदद करेंगी-

तुलना से बचें और आभारी रहें जीवन एक यात्रा है और हम ईश्वर की अनूठी कृति। ऐसे में इसे किसी अन्य से प्रतिस्पर्धा करने में या उसके जैसा बनने में बर्बाद ना करें, बल्कि खुद को खोजें। तुलना से बचें और फिर भी करना ही है तो अपने से कमजोर लोगों से तुलना करें और जो आपके पास है उसके लिए ईश्वर के आभारी रहें।
अध्यात्म का अभ्यास करें
आध्यात्मिकता सूत्र जिसे हमने पूरी दुनिया को दिया है उसका अभ्यास हमें खुद करना होगा। आध्यात्मिकता, मेरी नज़र में विज्ञान ही है। लेकिन यह वो विज्ञान है जो ज्ञान, तकनीकों और खुशी को बढ़ावा देने की प्रक्रियाओं को बताता है। आध्यात्मिकता मन को शांत करने और जीवन के तनावों से निपटने का एक अचूक हथियार है। यह हमें जीवन की वास्तविकताओं का सामना करने के लिए तैयार करता है और साथ ही देखभाल, करुणा और साहस के साथ जीवन जीना सिखाता है। असल में दोस्तों हमने दुनिया को खुशी का सूत्र तो दे दिया है लेकिन इसे अपने ही घर में लागू करने में विफल रहे।

सकारात्मक विचार रखें हम सभी वैसे ही होते हैं जैसे हमारे विचार। सकारात्मकता हमें भयमुक्त बनाकर, ऊर्जा और आत्मविश्वास को बढ़ाती है और नई शुरुआत करने के लिए प्रेरित करती है।

याद रखिएगा दोस्तों ख़ुशी का विकास से कोई ज़्यादा लेना देना नहीं है, इसलिए सिर्फ़ जीडीपी आँकड़ों को ही सरकार या देश की सफलता और ख़ुशी का पैमाना मानना गलत ही होगा। अगर प्रसन्नता सूचकांक में ऊपर आना है तो राष्ट्रीय स्तर पर व्यक्तिगत आनंद के ऊपर काम करना होगा और इसके लिए उपरोक्त तीनों बिंदुओं को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाए और याद रखें आनंद कहीं खोजने या बाजार में मिलने वाली चीज नहीं है, यह हमारे अंदर ही है। जब तक हम आनंद और ख़ुशी के लिए निर्भर रहते हैं, उसे खोजते हैं, हम उससे दूर रहते है। लेकिन जैसे ही हम खुश रहना, 100 प्रतिशत जीना शुरू करते हैं, आनंद को पा लेते हैं।


-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर
dreamsachieverspune@gmail.com

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