फिर भी ज़िंदगी हसीन हैं...

धारणा से बचने के तीन सूत्र

धारणा से बचने के तीन सूत्र
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Mar 18, 2021
धारणा से बचने के तीन सूत्र

बहुत साल पहले दक्षिण के एक प्रतापी राजा ने बढ़ती उम्र और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए अपने तीनों पुत्रों को शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात समग्र दृष्टिकोण सिखाने अर्थात् भविष्य में उन्हें राज काज सम्भालने, न्यायप्रिय बनाने के लिए परिपक्व करने का निर्णय लिया। एक दिन राजा ने अपने पुत्रों को दरबार में बुलाया और कहा, ‘प्रिय राजकुमारों, हमारे राज्य में दुनिया के सबसे बेहतरीन फलों के वृक्ष हैं लेकिन हमेशा मुझे एक बात खटकती है कि हमारे फलों के बगीचे में एक भी नाशपाती का पेड़ नहीं है।

बड़े राजकुमार हम चाहते हैं कि तुम अगले चार माह में आसपास के जंगलों में जाओ और पता लगाओ कि नाशपाती का पेड़ कैसा होता है? बड़े राजकुमार ने राजा को प्रणाम किया और उनकी आज्ञा लेकर नाशपाती के पेड़ के बारे में जानकारी एकत्र करने के लिए जंगल चले गए।

इधर राजा ने मंझले और छोटे राजकुमार को अपने साथ रखकर राजकाज का कार्य सिखाना शुरू कर दिया। ठीक चार माह बाद बड़े राजकुमार वापस आए। राजा ने उनसे कहा, ‘इन चार माह में तुमने नाशपाती के बारे में जो भी पता किया हो वह तुम याद रखना अभी मेरे साथ राजकाज का कार्य सीखो और मंझले राजकुमार, अब तुम आस-पास के राज्यों में जाओ और चार माह में पता लगाओ कि नाशपाती का पेड़ कैसा होता है?’

ठीक चार माह बाद मंझले राजकुमार, दिया हुआ कार्य करके वापस आए। राजा ने उनसे कहा, ‘इन चार माह में तुमने आस-पास के राज्यों से नाशपाती के बारे में जो भी जानकारी इकट्ठा करी है वह याद रखो और वापस से मेरे साथ राज्य के अन्य काम सीखो। मंझले राजकुमार ने उन्हें प्रणाम करा और कार्य में लग गए।

इसके बाद राजा ने छोटे राजकुमार से कहा, ‘अब तुम्हारा नम्बर है छोटे राजकुमार तुम दो माह आस-पास के जंगलों में और उसके अगले 2 माह में आस-पास के राज्यों में जा कर पता लगाओ कि नाशपाती का पेड़ कैसा होता है?’  ठीक चार माह बाद छोटे राजकुमार वापस आए तो राजा ने उनसे कहा, ‘जाओ अभी आराम करो और कल हम राजसभा के पश्चात तुम तीनों से एक साथ नाशपाती के पेड़ के बारे में चर्चा करेंगे।

अगले दिन राजसभा समाप्त होने के पश्चात राजा ने तीनों पुत्रों को बुलाया और बारी-बारी से नाशपाती के पेड़ के बारे में बताने के लिए कहा। सबसे पहले बड़े राजकुमार खड़े हुए और राजा को प्रणाम करते हुए बोले, ‘महाराज जंगल में नाशपाती का पेड़ तो बिलकुल टेढ़ा-मेढ़ा और एकदम सूखा हुआ होता है। मुझे तो उसे देखकर बड़ा अजीब सा लग रहा था।’ बड़े राजकुमार की बात को बीच में ही काटते हुए मंझले राजकुमार बोले, ‘नहीं-नहीं महाराज, हमारे आस-पास के राज्यों में तो नाशपाती का पेड़ बहुत सुंदर और हरा भरा था लेकिन मुझे बस एक बाद अच्छी नहीं लगी कि उन पेड़ों पर एक भी फल नहीं था।’

सबसे छोटा राजकुमार दोनों राजकुमारों की ओर बड़े आश्चर्य के साथ देख रहा था। राजा ने उनसे इस तरह देखने का कारण पूछा तो वह बोला, ‘महाराज मुझे तो लगता है दोनों भैया गलती से कोई और वृक्ष देख आए। मुझे ना तो जंगल में नाशपाती के सूखे पेड़ दिखे और ना ही आस-पास के राज्यों में बिना फल वाले हरे-भरे पेड़। जंगल और आस-पास के राज्यों में मैंने तो फलों से लदे बहुत ही सुंदर पेड़ देखे। बड़ा ही शानदार अनुभव रहा मेरा।

छोटे राजकुमार की बात सुनते ही तीनों राजकुमार आपस में लड़ने और विवाद करने लगे। राजा ने बीच में उन्हें रोकते हुए कहा, ‘पुत्रों, तुम तीनों सही कह रहे हो, आपस में बहस या लड़ाई करने की ज़रूरत नहीं है। हक़ीक़त में तो तुम तीनों ने ही नाशपाती के पेड़ का सही वर्णन किया है बस अंतर इतना सा है कि तुमने उस पेड़ को अलग-अलग मौसम में देखा है।’

राजा ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “हम इस आधार पर जीवन के तीन महत्वपूर्ण पाठ सीख सकते हैं-

पहला पाठ - किसी भी चीज़ या व्यक्ति के बारे में धारणा बनाने से पूर्व हमें उसके बारे में पूरी जानकारी एकत्र करना चाहिए और पूरी जानकारी चाहिए तो तुम्हें उसे लम्बे समय तक देखना और परखना होगा। यह हर विषय, वस्तु, व्यक्ति और व्यवसाय के लिए समान रूप से लागू होता है।

दूसरा पाठ - जिस तरह हर मौसम एक सा नहीं होता है, वृक्ष हर मौसम में फल नहीं देता है, ठीक उसी तरह हमारे जीवन में भी उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। दौर कैसा भी हो अच्छा या बुरा, हिम्मत और धैर्य बनाए रखते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयत्न करो, समय बदलना निश्चित है। इसी तरह अपनी ख़ुशियों को मौसम अर्थात् वक्त पर आधारित मत रखो, हर हाल में खुश रहना सीखो।

तीसरा पाठ - अपने सीमित ज्ञान के आधार पर सिर्फ़ अपनी बात सही है उस पर अडे मत रहो। हर पल सीखने के लिए तैयार रहो और दूसरों के विचारों का भी सम्मान करो। जब तुम दूसरों के विचारों का सम्मान करते हो, तब अपने ज्ञान को और बढ़ाते हो। इस पूरे संसार में अथाह ज्ञान भरा हुआ है, हमें तो यह भी नहीं पता है कि हमें क्या-क्या नहीं पता है। इसलिए हम चाहकर भी सारा ज्ञान इकट्ठा नहीं कर सकते हैं। जब भी भ्रम की स्थिति हो अपने अधूरे ज्ञान पर आधारित निर्णय लेने के स्थान पर किसी ज्ञानी व्यक्ति से सलाह लो। यह तुम्हें ना सिर्फ़ सही निर्णय लेने में मदद करेगा अपितु उस निर्णय को लेने में लगने वाले समय को भी बचाएगा।

जी हाँ दोस्तों, ईश्वर ने जीवन में आने वाली हर समस्या का हल हमारे आस-पास ही छुपा दिया है। अगर हमें अपने जीवन को सफल बनाना होगा तो स्वयं को इस लायक़ बनाना होगा कि सृष्टि में छिपे उस गूढ़ अर्थ को पहचानकर अपनी समस्या का समाधान कर सकें।

-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर
dreamsachieverspune@gmail.com

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