फिर भी ज़िंदगी हसीन हैं...

पूर्ण क्षमता के साथ जीवन जीने के 8 सूत्र

पूर्ण क्षमता के साथ जीवन जीने के 8 सूत्र
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Oct 29, 2021

पूर्ण क्षमता के साथ जीवन जीने के 8 सूत्र


दोस्तों, ईश्वर ने हम सभी को असीमित क्षमताओं के साथ इस दुनिया में विजेता बनने के लिए भेजा है। लेकिन आप सभी लोग मेरी इस बात से पूर्णतः सहमत होंगे कि हममें से ज़्यादातर लोग किसी ना किसी वजह से ईश्वर द्वारा प्रदत्त शक्तियों तथा क्षमताओं का पूर्ण उपयोग नहीं कर पाते हैं और समझौता करते हुए ईश्वर के दिए इस बेहतरीन तोहफ़े, ‘जीवन’ को जीने की जगह काटते हुए गुज़ार देते हैं।


सोचकर देखिए क्या यह अफ़सोसजनक नहीं है? अगर अफ़सोसजनक है तो एक बार खुद से पूछकर देखिए कि आख़िर क्या कारण थे जिसकी वजह से आप या अन्य लोग अपनी क्षमताओं का उपयोग नहीं कर पाए। क्या प्रयास नहीं किया होगा? यह तो सम्भव नहीं है। निश्चित तौर पर प्रयास भी किया होगा। फिर क्या वजह है? शायद ‘सेफ़ खेलने’ अर्थात् रिस्क ना लेने, सुरक्षित रहने की आदत की वजह से? या फिर आप समझ नहीं पाए कि ‘पूरी क्षमता’ से तात्पर्य क्या है?


कारण जो भी हो दोस्तों, लेकिन एक बात तो तय है अपनी क्षमताओं का प्रयोग ना करने में या अपनी असीमित क्षमताओं को ना पहचानने में सिर्फ़ और सिर्फ़ हमारा ही नुक़सान है। आइए आज हम उन बातों को 7 चरणों में पहचानने का प्रयास करेंगे जो हमारी क्षमताओं को प्रभावित करती हैं और साथ ही हम कुछ आसान युक्तियों को सीखने का प्रयास करते हैं, जो हमें इन बातों को दूर करने में मदद कर सफलता की ओर ले जा सकती हैं -


पहला सूत्र - आत्मविश्वास बढ़ाएँ

निश्चित तौर पर आप कभी ना कभी कम आत्मविश्वास वाले किसी ना किसी व्यक्ति से मिले होंगे। थोड़ा सा याद करके देखिए कम आत्मविश्वास वाला जो शख़्स आपसे मिला था, क्या आपने उसकी बात मानी थी? या वह जो भी कार्य या योजना आपके पास लेकर आया था आपने उस पर विश्वास करते हुए, उसे पूर्ण किया था? शायद नहीं… क्यूँकि जिसे खुद ही अपनी बात पर, अपने उत्पाद पर, अपनी योजना पर विश्वास नहीं है वह हमें क्या विश्वास दिलाएगा?

अगर आत्मविश्वास बढ़ाना है, तो सबसे पहले आप निम्न तीन कार्य करें-


पहला कार्य - अपने ज्ञान को बढ़ाएँ

जिस क्षेत्र में आप स्वयं को स्थापित करना चाहते हैं, उस क्षेत्र का ज्ञान होना आत्मविश्वास बढ़ाने की पहली और प्रमुख आवश्यकता है। वैसे भी इंटरनेट के इस युग में ज्ञान बढ़ाना आसान हो गया है क्यूँकि दुनिया की बेहतरीन शिक्षा अब हमसे कुछ ही क्लिक दूर रहती है। ऑनलाइन कोर्स या शोध करके जितना हो सके उतना अधिक सीखें। विषय विशेषज्ञ लोगों के साथ अधिक से अधिक समय रहने का प्रयास करें। याद रखिएगा, ज्ञान बढ़ाने से अनुभव लेना आसान हो जाता है।


दूसरा कार्य - अनुभव बढ़ाएँ

जिस क्षेत्र में आप अपनी विशेषज्ञता साबित करना चाहते हैं उसमें ज़मीनी स्तर पर कार्य करके सबसे पहले अपने अनुभव को बढ़ाएँ। अनुभव आपके आत्मविश्वास में तेज़ी से बढ़ोतरी करता है। लेकिन अगर आप फ़्रेशर है, किसी क्षेत्र में बिलकुल नए हैं या अभी शुरुआत कर रहे हैं, तो जल्दी आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए किसी अनुभवी कोच या मेंटॉर की मदद लें।


तीसरा कार्य - अनुशासित रहें

अनुशासित रहना एक ऐसी स्किल है जो आपको किसी भी क्षेत्र में सफलता दिला सकती है। भले ही आपका ज्ञान और अनुभव कम हो लेकिन अगर आप एक लक्ष्य बनाकर अनुशासित रहते हुए उस दिशा में कार्य करते हैं तो निश्चित तौर पर सफल हो जाते हैं।

याद रखिएगा दोस्तों, यदि आप अपने आत्मविश्वास के भंडार को बढ़ा लेते हैं, तो वस्तुतः ऐसा कुछ भी नहीं है जिसमें आप सफल नहीं हो सकते। इसीलिए कहा गया है, ‘आत्मविश्वास और मेहनत सफलता की कुंजी है।’


दूसरा सूत्र - लोगों की राय से परेशान ना हो

एक बार भयंकर गर्मी की वजह से कुएँ का पानी खत्म होने लगा। कुएँ में रहने वाले युवा मेंढकों का मानना था कि हमें समय रहते इस कुएँ को छोड़ देना चाहिए। लेकिन इसके ठीक विपरीत बुजुर्ग मेंढकों का मानना था कि कुएँ की दीवार को आज तक कोई भी मेंढक चढ़कर पार नहीं कर पाया है, इसलिए कुएँ से बाहर निकलना असंभव है। बुजुर्गों की बातों ने कई युवाओं को दुविधा में डाल दिया। कुछ युवा मेंढकों ने बुजुर्गों की बात मान ली, लेकिन उनमें से कुछ ने इसका विरोध किया और बाहर निकलने के लिए कुएँ की दीवार चढ़ने लगे। उनके प्रयास करते ही बुजुर्ग मेंढकों ने चिल्लाना शुरू कर दिया कि ऊपर चढ़ोगे तो गिर जाओगे, चोट भी लग सकती है। इसका प्रभाव यह हुआ कि ज़्यादातर मेंढक चढ़ने के प्रयास में असफल होने लगे, कुछ तो ऊपर से गिर भी गए और उन्हें चोट भी लग गई। इनके गिरते ही बुजुर्ग मेंढकों ने बोला देखो हमने तो पहले ही बोला था, देख लिया बात नहीं मानने का नतीजा। बुजुर्गों के ऐसा कहते ही ज़्यादातर युवा मेंढकों ने प्रयास करना बंद कर दिया लेकिन इनमें एक मेंढक ऐसा था जिसने सबकी बातों को नज़रंदाज़ करा और कुएँ से बाहर निकल गया। उस मेंढक की सफलता का राज पूछने पर पता चला कि वह बहरा था और वह बुजुर्ग क्या कह रहे थे वह सुन ही नहीं पाया, मुझे तो लगा यह सभी लोग मेरा उत्साहवर्धन कर रहे हैं।


दोस्तों यह एक कहानी ही नहीं बल्कि सच्चाई भी है। इसीलिए तो कहा गया है, ‘सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग?’ पॉल रूलकेंस, जो कि सुरुचिपूर्ण, आसान और तेज तरीक़ों से बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने के विशेषज्ञ है, के अनुसार, ‘जब भी उच्च प्रदर्शन की बात आती है, बहुमत अकसर गलत सिद्ध होता है।’ याद रखिएगा दोस्तों अपनी पूरी क्षमता को उजागर करने का रहस्य, यह विश्वास करना है कि असंभव भी वास्तव में संभव है और आप इसे कर सकते हैं।


आज के लिए इतना ही दोस्तों कल हम अगले तीन सूत्र सीखेंगे।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

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