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बच्चों की आक्रामकता को नियंत्रित करने के 5 तरीक़े - भाग 1

बच्चों की आक्रामकता को नियंत्रित करने के 5 तरीक़े - भाग 1
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Mar 31, 2021

बच्चों की आक्रामकता को नियंत्रित करने के 5 तरीक़े - भाग 1


आज सुबह सोशल मीडिया पर एक विडियो देखा, विडियो में एक छोटा बच्चा अपनी माँ के साथ किसी बात को लेकर बहस कर रहा था। माँ उसे कुछ समझाने का प्रयत्न कर रही थी लेकिन बच्चा कुछ सुनने को ही राज़ी नहीं था। काफ़ी देर तक जब वह नहीं माना तो उसके बड़े भाई ने बीच में पड़कर बात सम्भालने की कोशिश करी। लेकिन बड़े भाई का बीच में आना उस छोटे भाई को नागवार गुजरा और उसने पास में रखे, किचन में काम आने वाले पत्थर से भाई के सिर पर मारने का प्रयास करा। भगवान का शुक्र था कि भाई को किसी प्रकार की चोट नहीं लगी।


आजकल दोस्तों बच्चों की ऐसी आक्रामकता के कई सारे मामले देखने में आ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से काउन्सलिंग के दौरान भी मैंने इस बात को महसूस किया है। वैसे मेरे लिए छोड़िए, यह किसी के लिए भी नया तथ्य नहीं है। हम अपने परिवार या आसपास के बच्चों में बढ़ता हुआ ग़ुस्सा और आक्रामकता देख सकते हैं। देखने में यह हमें सामान्य लगता है और हम इसे नज़रंदाज़ कर जाते हैं। यक़ीन मानिएगा अगर हमने इसपर समय से ध्यान नहीं दिया तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है, वैसे भी राष्ट्रीय स्तर पर इसका बढ़ता असर अब ‘राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो’ एवं ‘क्राइम इन इंडिया’ की रिपोर्ट पर देखा जा सकता है।


अब सबसे बड़ा सवाल आता है बच्चे की आक्रामकता को शुरुआती स्तर पर कैसे पहचाना जाए? क्लिनिकल सायकॉलिजस्ट सुरभि अम्बर श्रीवास्तव के अनुसार, ‘अगर बच्चा छोटी-छोटी बात पर अपने भाई-बहनों से लड़ता है, दोस्तों को धक्का देता नज़र आता है या हर छोटी बात को प्रतिस्पर्धा के रूप में लेता है और मन माफ़िक़ परिणाम ना मिलने पर चिल्लाता है, लड़ता है, सामान तोड़ता-फोड़ता या फेंकता है, तो यह शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।’


वैसे दोस्तों मेरी नज़र में आजकल ज़्यादातर माता-पिता की रातों की नींद बच्चों की बढ़ती आक्रामकता की वजह से उड़ी हुई है। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि किस तरह बच्चे के ग़ुस्से और आक्रामकता का सामना करें और वे समाधान के तौर पर बच्चों को अकेला छोड़ देते हैं, उन्हें नज़रंदाज़ करते हैं या उसे पढ़ने के लिए हॉस्टल भेज देते हैं। लेकिन मेरी नज़र में यह समाधान तो छोड़िए स्थिति को सिर्फ़ और सिर्फ़ और भयावह बनाने वाला रास्ता है।


फिर क्या किया जाए? सबसे पहले तो एक चीज़ स्वीकारिये कि इसे आप रातों-रात ठीक नहीं कर पाएँगे। इसे ठीक करने के लिए आपको धैर्य के साथ बहुत सारा समय देना होगा। सुरभि के अनुसार, ‘अगर आप बच्चे की आक्रामकता और ग़ुस्से को कंट्रोल करना चाहते हैं तो सबसे पहले उन कारणों को पहचानिए जिसकी वजह से बच्चा ग़ुस्सा या आक्रामक होता है। इसके लिए बच्चे की दिनचर्या, उसके व्यवहार पर पैनी नज़र रखकर उन कारणों को पहचानने का प्रयत्न करें जो इन्हें बढ़ाते हैं।’


दोस्तों बच्चों की आक्रामकता को पहचाने बिना दूर करना सम्भव नहीं है आज के इस कालम में हम आक्रामकता के प्रकार और उसके लक्षणों को पहचानना सीखते हैं और कल के कालम में हम आक्रामकता दूर करने के तरीक़ों को सीखेंगे।

बच्चों में पाई जाने वाली आक्रामकता को दो भागों वे विभाजित किया जा सकता है-


पहला - चिकित्सीय

चिकित्सीय कारणों जैसे ए॰डी॰एच॰डी॰ (अटेन्शन डेफ़िसिट हाइपरऐक्टिविटी डिसॉर्डर) या विटामिन बी12 और डी3 की कमी के लिए आपको मेडिकल प्रैक्टिशनर अथवा आर॰सी॰आई॰ रजिस्टर्ड क्लिनिकल सायकॉलिजस्ट से मदद लेना चाहिए। इसपर जल्दी ऐक्शन लेना या मेडिकल मदद लेना बच्चे व परिवार के लिए फ़ायदेमंद रहता है।


दूसरा - ग़ैर चिकित्सीय

ग़ैर चिकित्सीय कारणों के पीछे व्यवहारिक समस्याएँ भी हो सकती हैं। इन्हें बच्चों के व्यवहार व दैनिक दिनचर्या से पहचाना जा सकता है। आमतौर पर बच्चों में निम्न में से एक से ज़्यादा लक्षण नज़र आते हैं-


-बात-बात पर चिढ़ाना

-पेट भर खाना ना खाना

-खेलने या शारीरिक गतिविधियों में रुचि न होना
 -अच्छी और गहरी नींद ना लेना

-किसी व्यक्ति के द्वारा बार-बार डराना

-लड़ाई-झगड़े वाले गेम खेलना अथवा पिक्चर, रियलिटी शो या कार्टून देखना

-बार बार किसी अन्य से अनुचित तुलना करना

-दिखावे के फेर में पड़ना

-दिनभर सुस्त और अकेले रहना

-किसी भी समारोह या स्कूल में मन न लगना और

-सबसे महत्वपूर्ण, माता-पिता या परिवार द्वारा किए जाने वाले व्यवहार का अनुसरण करना क्यूँकि ज़्यादातर बच्चा    वही करता है जो अपनी आँखों के सामने होता हुआ देखता है।


दोस्तों वैसे उपरोक्त में से कुछ लक्षण कभी ना कभी हर बच्चे में नज़र आ सकते हैं इसलिए किसी एक घटना के आधार पर पहचाने गए लक्षण के आधार पर धारणा ना बनाएँ। किसी भी एक लक्षण की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उससे सम्बंधित आचरण को लम्बे समय तक नोटिस करें और उन्हें लिखकर रख लें। इसके पश्चात मौक़ा मिलने पर बच्चों के शिक्षकों अथवा काउंसलर से इस बारे में विस्तृत चर्चा करें।

लेकिन दोस्तों कुछ अनुशासनात्मक नियम ऐसे हैं जो निश्चित तौर पर आपको बच्चों की आक्रामकता को सम्भालने या कम करने में मदद करेंगे। कल के कालम में हम बच्चों की आक्रामकता को सम्भालने के तरीक़े सीखेंगे।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

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