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बातचीत जारी रखने के 9 आसान सूत्र - भाग 4

बातचीत जारी रखने के 9 आसान सूत्र - भाग 4
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June 08, 2021

बातचीत जारी रखने के 9 आसान सूत्र - भाग 4


दोस्तों कल तक हमने बातचीत जारी रखने के 9 सूत्रों में से सात सूत्रों को सीखा था। आईए अंतिम दो सूत्र सीखने से पहले उन्हें दोहरा लेते हैं-


पहला सूत्र - बातचीत शुरू करने के पहले पूरी तरह रिलैक्स रहें

अपना सर्वश्रेष्ठ देने की चाह में अपने ऊपर अवांछित तनाव न बनायें और घबराहट के साथ बातचीत की शुरुआत ना करें। आगे 

क्या कहना है प्लान करने के स्थान पर सामने वाले की बात सुनें और पद, पैसा, उपलब्धि, अनुभव या योग्यता से बात करने के स्थान पर उस व्यक्ति से बात करें। इसकी तैयारी निम्न तीन चरणों में करें - 

पहला चरण - जल्दबाज़ी से बचें 

दूसरा चरण - गहरी साँस लें 

तीसरा चरण - सर्वप्रथम रिश्ता बनाने पर ध्यान दें 

पहले दो चरण आत्मविश्वास बढ़ाकर, आपको आरामदायक स्थिति में रखकर माहौल को सकारात्मक बनाएँगे और तीसरा चरण अच्छा रिश्ता बनाकर, बातचीत को आपके पक्ष में मोड़ने में मदद करेगा।


दूसरा सूत्र - बातचीत में कभी खत्म ना होने वाले विषयों का समावेश करें 

FORD नियम (फ़ैमिली, ऑक्युपेशन, रिक्रीएशन एवं ड्रीम्स) का उपयोग कर बातचीत में कभी खत्म ना होने वाले विषयों का समावेश करें और माहौल को दिलचस्प बनाएँ।


तीसरा सूत्र - सामने वाले के हित का सम्मान करें और उसमें सही मायने में रुचि लें 

आपसी विश्वास बढ़ाने के लिए दिखावे के स्थान पर सही मायनों में दूसरे के कार्यों में रुचि लें। आपसी विश्वास बातचीत जारी रखने में मदद करता है। ओपन एंडेड प्रश्न (अर्थात् जिन प्रश्नों के उत्तर सीधे ‘हाँ’ या ‘ना’ में ना दिये जा सके) का प्रयोग करें, यह बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।


चौथा सूत्र - अपने पसंद के विषय पर बात करें 

उत्साहित रहना सकारात्मक माहौल बनाता है इसलिए अपने पसंदीदा विषय या जुनून पर बात करें। यह सामने वाले को भी अपने जुनून पर बोलने के लिए प्रेरित कर मज़बूत संबंधों के साथ बातचीत आगे बढ़ाने में मदद करता है।


पाँचवाँ सूत्र - नकारात्मक विषयों पर बातचीत करने से बचें 

नकारात्मक अंत वाले विषय पर चर्चा करने से बचें। जैसे - बीमारी, उबाऊ काम, नकारात्मक खबर या नकारात्मक माहौल में रहने वाले लोग, डरावने या ख़ौफ़नाक विषय आदि। इससे बातचीत रोचक, सकारात्मक और लाभदायक बनी रहती है। वैसे इसके स्थान पर अपनी विशेषज्ञता वाला विषय चुनें।


छठा सूत्र - कुछ अच्छे विषय, सकारात्मक और रोचक संस्मरण बचा कर रखें

अगर बातचीत निर्णय पर आने से पहले ही खत्म हो रही हो तो उसे बचा कर रखे गए अच्छे सकारात्मक विषय या रोचक संस्मरणों से नई दिशा प्रदान करें। ऐसा करना आपको सामने वाले की पसंद/नापसंद जानकर बातचीत को रोचक और लाभदायक बनाता है। आमतौर पर गाने, म्यूज़िक, खेल, फ़िल्में, बहुत ही अनूठा और अच्छा या सबसे बुरा अनुभव आदि ऐसे विषय हो सकते हैं। ऐसा करके हम वापस मुख्य विषय पर लौट सकते हैं।


सातवाँ सूत्र - पुराने विषयों को दोहराते हुए बातचीत आगे बढ़ाएँ

बातचीत में विषय से भटकने या लम्बे ब्रेक के बाद वापस शुरू करते वक्त पुराने मुख्य विषयों को दोहराना आपको बातचीत के ज़रिए मनचाहा परिणाम प्राप्त करने में मदद करता है। पूर्व में की गई चर्चा को याद दिलाने के लिए उस पर आधारित प्रश्न पूछकर बातचीत को आगे मुख्य विषय पर बढ़ाया जा सकता है।


आईए दोस्तों अब हम बातचीत जारी रखने के अंतिम 2 सूत्र सीखते हैं-


आठवाँ सूत्र - डिस्कर्सिव इंटेलिजेन्स बढ़ाएँ

डिस्कर्सिव इंटेलिजेन्स अर्थात् विभिन्न विषयों के बारे में ज्ञान होना। ज्ञान आपको प्रासंगिक बनाए रखता है और प्रासंगिक व्यक्ति से हर इंसान जुड़ा रहना चाहता है क्यूँकि ज्ञान उस व्यक्ति के अंदर आपसे सीखने के लिए तीव्र इच्छा पैदा करता है। वैसे भी हरिवंश राय बच्चन ने कहा है, ‘हर वक्त नई बातों को सुनने को तैयार रहता है इंसान, भले ही कहने वाला हो शैतान।’


नवाँ सूत्र - उपरोक्त सूत्रों का प्रयोग बार-बार करें 

किसी विषय का जानकार होना और उसमें विशेषज्ञता रखना अलग-अलग होता है। जिस बात को आप जानते हैं उसे आप बार-बार प्रयोग में लाते हैं तो आप उसमें विशेषज्ञता प्राप्त करते हैं। इसलिए जब तक आप उपरोक्त सूत्रों को बार-बार प्रयोग में नहीं लाएँगे आप बातचीत को आगे बढ़ाने के इस कौशल में महारत हासिल नहीं कर पाएँगे। 


लेकिन याद रखिएगा एक बार में महारत हासिल करना या किसी आदत को विकसित करना या मनचाहे परिणाम प्राप्त करने लायक़ बनना असम्भव ही है। जब भी आप कुछ नया करते हैं तब असफलता हाथ लग सकती है। उससे घबराएँ नहीं, उसके लिए खुद को सजा ना दें, बल्कि खुद को माफ़ कर उस असफलता से सीखने का प्रयत्न करें। खुद के प्रति दयालु और अधिक रचनात्मक दृष्टिकोण रखना हमें समय बर्बाद करने से बचाकर रचनात्मक बन, अधिक सीखने में मदद करता है। याद रखिएगा बड़े बदलाव हमेशा छोटी शुरुआत से आते हैं, बस हमें अपने प्रयास में निरंतरता बनाए रखना होती है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर 

dreamsachieverspune@gmail.com

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