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रिश्ते में अपेक्षाओं को प्रबंधित करना सीखें - भाग 3

रिश्ते में अपेक्षाओं को प्रबंधित करना सीखें - भाग 3
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July 3, 2021

रिश्ते में अपेक्षाओं को प्रबंधित करना सीखें - भाग 3


रिश्तों में अपेक्षाओं को प्रबंधित करना सीखने के उद्देश्य से हमने पिछले दो दिनों में दो मुख्य बातें सीखी हैं। पहली, किस तरह ग़लत अपेक्षा या ग़लत तरह से अपेक्षा करना पहले मनमुटाव पैदा करता है और अगर मनमुटाव के कारणों पर ध्यान ना दिया जाए, तो यह आपसी झगड़े में बदलकर रिश्तों में दरार पैदा करना शुरू कर देता है। दरार पड़ने के बाद भी अगर इसे प्रबंधित ना किया जाए तो यह आपसी विश्वास को ख़त्म कर देता है। दूसरी महत्वपूर्ण बात, रिश्ते में उम्मीद और अपेक्षा को प्रबंधित अर्थात् मैनेज करने के लिए ज़रूरी किन आधारभूत बातों का ध्यान रखना चाहिए, इसे समझा था। आईए आज हम रिश्तों में प्यार बढ़ाने के लिए सही उम्मीद और अपेक्षा रखने के मुख्य बारह सूत्रों में से प्रथम 6 सूत्र सीखेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं-


प्रथम सूत्र - सराहना करें

आमतौर पर रिश्तों में हम सामने वाले के अच्छे और सार्थक प्रयासों को अपना अधिकार मानकर चलते हैं और उसके लिए कभी भी आभार व्यक्त नहीं करते, सराहना नहीं करते। इसे मैं आपको घर में बनने वाले भोजन के उदाहरण से समझाने का प्रयास करता हूँ। जिस दिन सब्ज़ी में नमक, मिर्ची, मसाला आदि कम या ज़्यादा हो जाता है, हम तत्काल उसकी शिकायत कर देते हैं लेकिन उस वक्त यह भूल जाते हैं कि चाय-नाश्ते या भोजन में परोसे गए अन्य स्वादिष्ट पकवानों के बारे में हमने कुछ नहीं कहा है।


अगर आप किसी भी रिश्ते में अपेक्षाओं को प्रबंधित करना सीखना चाहते हैं तो सबसे पहले प्रशंसा करना सीखें। प्रशंसा सुनने वाले और करने वाले दोनों के लिए ही फ़ायदेमंद होती है। जहां यह तारिफ़ सुनने वाले को और अच्छे से कार्य करने के लिए प्रेरित करती है, वही यह तारिफ़ करने वाले को मजबूर करती है कि वह अपना ध्यान नकारात्मक नहीं सकारात्मक बातों या गुणों को देखने में लगाए। ऐसा करना आपको छोटी व महत्वहीन अपेक्षाओं से दूर कर, ग़लतियों को नज़रंदाज़ करना सिखाता है जिसकी वजह से आप अवांछित मनमुटाव से बच जाते है। अपने साथी के सकारात्मक गुणों पर ध्यान देना, रिश्तों में गरमाहट पैदा करता है।


दूसरा सूत्र - चिढ़ने, चिल्लाने और लड़ने के स्थान पर चर्चा करें

ज़्यादातर लोग सामने वाले की ग़लतियों पर या अपेक्षा और उम्मीद पूरी ना होने पर उस विषय पर चर्चा करने के स्थान पर चिड़चिड़ाने लगते हैं। ऐसे में सामने वाला तो कई बार यही नहीं समझ पाता है आप किस वजह से नाराज़ हैं। इसके स्थान पर खुलकर अपनी अपेक्षाओं और उम्मीदों पर चर्चा करें। याद रखें चिढ़ना, चिल्लाना और लड़ना रिश्तों के लिए सबसे आवश्यक भावना, करुणा अर्थात् कम्पैशन को खत्म कर देता है। इसके स्थान पर चर्चा करके सही अपेक्षा या उम्मीद रखना और उस उम्मीद या अपेक्षा पर खरा उतरना रिश्तों में गर्मजोशी पैदा करता है और दिन प्रतिदिन रिश्तों को बेहतर बनाता है।


तीसरा सूत्र - ना सिर्फ़ सम्मान करें बल्कि उसे प्रदर्शित भी करें

रिश्ते का मूलभूत आधार सम्मान के भाव का होना होता है। जब आप सामने वाले की भावनाओं, दृष्टिकोण, आवश्यकताओं, इच्छाओं और ज़रूरतों का सम्मान करते हैं तो वह भी आप की इन सभी अपेक्षाओं और उम्मीदों का सम्मान करता है। जितना आवश्यक रिश्तों में उपरोक्त बातों का सम्मान करना होता है उतना ही आवश्यक इसका प्रदर्शन करना भी होता है। ऐसा करना सम्मान के एहसास को कई गुना बढ़ाकर अनावश्यक तनाव को दूर रखता है।


चौथा सूत्र - भावनाओं को प्रदर्शित करें

भावना सकारात्मक हो या नकारात्मक उसे मन में रखने के बजाए शांत रहते हुए सही तरीक़े से प्रदर्शित करें क्यूंकि जब आप नकारात्मक भावनाओं को अपने अंदर रखकर चुप रहते हैं, उसे सामने वाले को नहीं बताते हैं तो यह आपके अंदर असंतुष्टि का भाव पैदा कर तनाव बढ़ाता है ठीक इसी तरह जब आप सकारात्मक भावनाओं को प्रदर्शित नहीं करते हैं तो कई बार सामने वाला समझ ही नहीं पाता है कि आप उसका कितना ध्यान रखते हैं, प्यार और सम्मान करते हैं।


पाँचवाँ सूत्र - सहानुभूति रखें

जब आप कोई कार्य करते हैं तभी आप गलती करते हैं या फिर कई बार सब कुछ सही होने के बाद भी आप मनचाहा परिणाम प्राप्त नहीं कर पाते हैं। ठीक ऐसा ही आपके साथी के साथ भी हो सकता है। उदाहरण के लिए वह बहुत मन से आपके लिए कुछ बनाकर या बाज़ार से लेकर आए हैं और वह आपकी आशा के अनुरूप अच्छा नहीं निकला है। ऐसी स्थिति में नुक़्स निकालने या पूर्व की कोई घटना से इसकी तुलना करके, उल्हाने देने के स्थान पर सामने वाले से सहानुभूति रखते हुए उसके प्रयास और भावना का सम्मान करें। ठीक इसी तरह का सहानुभूति भरा व्यवहार उनके व्यक्तिगत कार्यों और उसके नतीजों के लिए भी रखें।


छठा सूत्र - साधन नहीं समय दें

कई बार हम अपने लक्ष्यों को पाने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपने रिश्तों के लिए समय ही नहीं निकाल पाते हैं और समय की इस कमी को पद या पैसों से जुटाए संसाधन से पूर्ण करने का प्रयास करते हैं। याद रखें आपकी कमी संसाधन पूरी नहीं कर सकते हैं। अपने रिश्ते को समय देना मूलभूत अपेक्षाओं में से एक है। वैसे हमारे सनातन धर्म में इसी बात को सुनिश्चित करने के लिए त्यौहार, रीति-रिवाज और परम्पराएँ बनाई गई हैं इनका निर्वहन सिर्फ़ औपचारिक रूप से ना करें बल्कि इसकी मूल भावना को ध्यान में रखते हुए, इनके लिए समय निकालकर अपने रिश्तों को मज़बूत करें। वैसे ऐसा करके आप प्रदर्शित करते हैं कि आपके लिए आपका रिश्ता वास्तविकता में प्राथमिकता रखता है और यह भावना आपके संबंध को मज़बूत बनाती है।


आज के लिए इतना ही दोस्तों, कल हम अगले कुछ बिंदुओं के साथ आगे बढ़ेंगे।


-निर्मल भटनागर

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