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सपनों को हक़ीक़त में बदलने के 7 सूत्र - भाग 2

सपनों को हक़ीक़त में बदलने के 7 सूत्र - भाग 2
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Oct 11, 2021

सपनों को हक़ीक़त में बदलने के 7 सूत्र - भाग 2


दुनिया में दोस्तों दो तरह के लोग हैं पहले वे जो सपनों को पूरा करने के लिए उन्हें स्पष्ट तरीक़े से परिभाषित कर, योजनाबद्ध तरीक़े से उन्हें साकार करने का प्रयास करते हैं और दूसरे वे जो सपने पाने के लिए सिर्फ़ सोचते हैं या फिर दिशाहीन काम करते हुए असफल होने पर बहाने बनाते हैं या परिस्थितियों अथवा अपनी क़िस्मत को दोष देते हुए, समझौता करते हुए अपना जीवन जीते हैं। कल हमने पहला विकल्प चुनकर अपनी कल्पनाओं को साकार करके अपने सपनों का जीवन जीने के लिए आवश्यक 7 सूत्रों में से पहले तीन सूत्र सीखे थे आइए आगे बढ़ने से पहले उन्हें दोहरा लेते हैं-


पहला सूत्र - स्पष्ट सपना बनाएँ 

‘देख लेना मैं एक दिन बहुत बड़ा आदमी बनूँगा।’ जैसे अस्पष्ट सपने बनाने के स्थान पर स्पष्ट सपना बनाने के लिए एक डायरी और पेन लेकर शांत स्थान पर बैठें और खुद से प्रश्न करें कि 'आप जीवन में क्या चाहते हैं?’ अगर स्पष्ट जवाब ना भी मिले तो चिंता ना करें, बस जो विचार आ रहे हैं उन्हें लिख लें और उन विचारों के आधार पर ब्रॉडर फ़ील्ड में काम करें। जैसे अगर आप लेखक बनना चाहते हैं और समझ नहीं पा रहे हैं कि किस क्षेत्र में लिखें?, तो चिंता ना करें सबसे पहले ब्लॉग, डायरी या सोशल मीडिया पर लिखना शुरू करें। सही दिशा में कदम बढ़ाने से कुछ ही दिनों में आपको समझ आ जाएगा कि आप क्या चाहते है और उसे कैसे पाया जा सकता है? 


दूसरा सूत्र - प्रबल इच्छा अर्थात् स्ट्रोंग डिज़ायर पैदा करें 

काल्पनिक चीजों जैसे सपनों को सिर्फ़ और सिर्फ़ प्रबल इच्छा के द्वारा ही हक़ीक़त में बदला जा सकता है। प्रबल इच्छा आपके अंदर आत्मविश्वास पैदा करती है और आपको अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्पित बना देती है।


तीसरा सूत्र - प्रबल इच्छा के आधार पर अपने सपने को पहले बड़े फिर छोटे-छोटे लक्ष्यों में परिवर्तित करें

सपनों को हक़ीक़त में बदलने में समय लगता है और इस समय में अकसर होगा या नहीं होगा, वाली दुविधा प्रबल इच्छा होने के बाद भी हमें मनचाहा परिणाम नहीं दे पाती है। इससे बचने के लिए सबसे पहले अपने सपनों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बाँटे और फिर सपनों के उन छोटे-छोटे हिस्सों को पूरा करने के लिए अपनी क्षमता और योग्यता को ध्यान में रखते हुए एक नियत तिथि तय कर दें। क्यूँकि दोस्तों जब आप अपने सपने को डेड लाइन के साथ बांध देते हैं तो यह टार्गेट बन जाता है।


चलिए अब सीखते हैं अंतिम 4 सूत्र-


चौथा सूत्र - योजना बनाएँ 

सपनों को छोटे लक्ष्यों में परिवर्तित करने के बाद उन्हें तय समय में पाने के लिए दैनिक आधार पर योजना बनाएँ अर्थात् आप रोज़ कौन-कौन से काम करेंगे जो आपको तय दिन से पहले अपने छोटे लक्ष्य को पाना सुनिश्चित कर देंगे। अपनी योजना के हर एक पड़ाव के बारे में लिखें। ऐसा करने से आपको अपने लक्ष्य को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। 


पाँचवाँ सूत्र - योजना पर दैनिक आधार पर अमल करें

दोस्तों जिंदगी इतनी भी आसान नहीं है जितना हम इसे समझते है। अगर आप एक के बाद एक अपने लक्ष्यों को पाना चाहते हैं तो अपनी बनाई योजना पर बिना चुके दैनिक आधार पर अमल में लाएँ। इसका सबसे बड़ा फ़ायदा तब मिलेगा जब आप अपनी योजना के किसी पड़ाव में असफल होंगे। ऐसी असफलता की स्थिति में अपने सपनों को पूरा करने के लिए हम अपनी योजना या आगे के पड़ावों में तब्दीली कर, या किसी अन्य तरीक़े से उसपर कार्य कर अपने सपनों को हक़ीक़त में बदल सकते हैं।


छठा सूत्र - सफलता को ट्रैक करें

जब आप अपने बड़े लक्ष्य को पाने के लिए काम करते हैं तब कई बार आपको मनमाफ़िक परिणाम मिलते हैं और कई बार अपनी योजना या सोच के विपरीत। मनमाफ़िक परिणाम हमें अपने लक्ष्य के क़रीब ले जाते हैं तो विपरीत परिणाम उससे दूर। लेकिन अगर आप दोनों ही तरह के परिणामों में अपने लक्ष्य की ओर ही जाना चाहते हैं तो अपनी सफलता को ट्रैक करना शुरू करें। 


ट्रैक करने के लिए सबसे पहले अपने बड़े लक्ष्य को एक पेपर पर लिख लें, उसके बाद उसके ठीक नीचे इस लक्ष्य के जो छोटे भाग आपने निर्धारित किए हैं उनको लिखें और अंत में उसके सामने इन छोटे भागों को पाने के लिए जो कार्य दैनिक आधार पर करना है उन्हें लिख लें। अब इस चार्ट पर रोज़ रात को उस दिन का परिणाम अंकित करना शुरू कर दें जैसे जो कार्य हो गया उसके आगे टिक और जो नहीं हुआ उसके आगे एक क्रॉस। 


ट्रैकिंग लिस्ट में लगा हर क्रॉस आपको योजना अथवा कार्यशैली की विफलता का एहसास कराएगा और आपको अपनी योजना या कार्यशैली में जो बदलाव लाना है उसका ध्यान दिलाकर सफलता सुनिश्चित करेगा। 


सातवाँ सूत्र- आनंदित और प्रेरित अर्थात् मोटिवेटेड रहें 

जब आप अपनी योजना पर सर्वश्रेष्ठ देते हुए कार्य करते हैं तो मनमाफ़िक परिणाम पा पाते हैं। लेकिन कई बार ईश्वर को कुछ और मंज़ूर होता है और वो अपनी योजना के अनुसार आपको परिणाम देता है। ऐसी किसी भी स्थिति में चिंतित ना हों। लक्ष्य पाने के रास्ते में की गई मेहनत और रास्ते में मिले हर परिणाम को स्वीकार कर आनंदित रहें। मिली असफलता का विश्लेषण कर नई शुरुआत करें। नई शुरुआत करने के लिए आपको नकारात्मक भावों को भूलकर, अपनी योजना पर कार्य करते रहना होगा और यह तभी सम्भव हो सकता है जब आपने अपनी प्रेरणा और प्रबल इच्छा को बचाया हो और अपनी अभी तक की यात्रा का पूरा मज़ा उठाया हो। 


कल दोस्तों हम मोटिवेटेड अर्थात् हमेशा प्रेरित रहने के आठ सूत्र सीखेंगे।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर 

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