फिर भी ज़िंदगी हसीन हैं...

सही दृष्टिकोण से पाएँ शांतिपूर्ण जीवन

सही दृष्टिकोण से पाएँ शांतिपूर्ण जीवन
global_herald_logo_1.png

Dec 10, 2021

सही दृष्टिकोण से पाएँ शांतिपूर्ण जीवन !!!


‘सर, जो मिलता है वह सकारात्मक रहने, सोचने, दृष्टिकोण रखने के बारे में समझाता है। मैं कोशिश भी करता हूँ लेकिन हर बार असफल हो जाता हूँ। परिस्थिति, घटना अथवा अनपेक्षित परिणाम मिलने पर नकारात्मक सोचने में आ ही जाता है। आप ही बताइए मैं क्या करूँ जिससे हमेशा, हर हाल में सकारात्मक रह सकूँ।’ कल काउन्सलिंग के दौरान जैसे ही एक बच्चे ने मुझसे यह प्रश्न किया, मैं कुछ पलों के लिए ख़यालों में खो गया क्यूँकि व्यापार में नुक़सान के बाद यही सलाह बहुत सारे लोगों ने मुझे दी थी, और मैं भी पूरे समय सकारात्मक रहने में असफल रहा था और अपने इस प्रश्न का उत्तर बड़ी मुश्किलों के साथ खोजा  था। मैंने तुरंत उस बच्चे को समझाते हुए कहा, ‘देखो, जिस तरह एक अच्छी फसल के लिए धूप-छाँव, गर्मी-सर्दी, सूखा-पानी सब ज़रूरी है ठीक उसी तरह हमारी क्षमताओं को निखारने और लक्ष्य तक पहुँचने के लिए सकारात्मक और नकारात्मक दोनों भाव ज़रूरी हैं। मेरी बात सुनते ही वह बच्चा दुविधा में पड़ गया और प्रश्नवाचक निगाहों से मेरी ओर देखता हुआ बोला, ‘सर मेरे मन में दो प्रश्न आ रहे हैं, पहला, नकारात्मक भाव मेरी मदद कैसे करेंगे? और दूसरा, फिर दूसरे लोग हमेशा सकारात्मक कैसे रह लेते हैं?’ 


वैसे दोस्तों यह उस अकेले बच्चे की नहीं बल्कि ज़्यादातर लोगों की परेशानी है। मेरी नज़र में हमेशा सकारात्मक रहने की परिकल्पना ही बिलकुल ग़लत है। इसे आप इस तरह समझ सकते हैं-


मनोवैज्ञानिकों के अनुसार एक दिन अर्थात् 24 घंटे में एक सामान्य इंसान के मन में 60,000 से ज़्यादा विचार आते हैं और अगर व्यक्ति राजनीति अथवा व्यापारिक पृष्ठभूमि का हो तो यह संख्या और ज़्यादा बढ़ जाती है। सामान्यतः इन 60,000 विचारों में से 50,000 विचार अर्थात् 83% नकारात्मक और 10,000 विचार अर्थात् मात्र 17% विचार सकारात्मक होते हैं। अब आप स्वयं सोचकर देखिएगा क्या 83% समय नकारात्मक विचारों के साथ रहते हुए पूरे समय सकारात्मक अथवा सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ रहा जा सकता है? बिलकुल नहीं दोस्तों! 


लेकिन एक तरीक़ा और है दोस्तों, जिसको अगर प्रयोग में लाना सीख लिया जाए तो फिर हमारे विचार या दृष्टिकोण सकारात्मक हों या नकारात्मक हमारी तरक़्क़ी होना निश्चित है। लेकिन उसे बताने से पहले मैं आपको मनोवैज्ञानिकों द्वारा कही एक बात और बता दूँ, इन सभी 60,000 विचारों में से लगभग 95 से 98% विचारों की पुनरावृत्ति होती है। सम्भवतः इसीलिए हम किसी व्यक्ति, परिस्थिति या काम से जितने परेशान नहीं होते है, उससे ज़्यादा हम उसके विचारों से परेशान होते हैं। साथ ही विचारों की यही पुनरावृत्ति हमारी रचनात्मकता खत्म करती है।


इसका अर्थ यह हुआ दोस्तों कि अपनी ग्रोथ के लिए हमें सकारात्मक अथवा नकारात्मक दृष्टिकोण से ऊपर उठकर सही दृष्टिकोण रखना सीखना होगा। इसके लिए हमें अपने विचार, निर्णय लेने की प्रक्रिया और कार्य करने के तरीक़े में थोड़ा सा बदलाव करना होगा, तभी हम सकारात्मक अथवा नकारात्मक विचारों अथवा दृष्टिकोण से ऊपर उठकर अपनी ग्रोथ सुनिश्चित कर सकते हैं। इसके लिए दोस्तों सबसे पहले आप वर्तमान में, इसी पल में रहना सीखें। दूसरी बात जो हमें सीखना होगी, वह है, इस पल अपने मन में चल रहे विचारों को पहचानना सीखना होगा। विचारों को पहचानने के बाद अगर आपको लगे इस वक्त मैं  नकारात्मक विचारों के साथ हूँ तो अपना निर्णय टाल दें, ठीक इसी तरह जब आप बहुत अधिक सकारात्मक मूड में हों तब भी अपना निर्णय टाल दें। दोस्तों अब आपके मन में दुविधा आ रही होगी कि ‘फिर निर्णय लेना कब है?’ तो जवाब है दोस्तों जब आप तटस्थ अर्थात् न्यूट्रल और संतुलित अर्थात् बैलेन्सड़ मूड में हों तब निर्णय लें और इसके बाद विचार कैसे भी क्यों ना हों, न्यूट्रल और संतुलित विचारों के साथ लिए गए निर्णय को अमल में लाए। इसे ही दोस्तों हम सही दृष्टिकोण अर्थात् राइट ऐटिटूड में रहना कहते हैं। 


जी हाँ दोस्तों, सही ऐटिटूड में रहते हुए सही निर्णय लेना और फिर सही दिशा में कार्य करना आपको मनचाहा परिणाम देता है, जो अंततः हमारे मन में सकारात्मक विचारों की संख्या बढ़ाता है। वैसे भी दोस्तों जब हम राइट ऐटिटूड में रहते हैं तब हमारे आलोचक हमें मजबूत करते हैं, हमारा डर हमें प्रोत्साहित करता है, दुश्मनों से हम सक्रिय रहना सीखते हैं, नफ़रत करने वालों को देख हम प्रबुद्ध बनते हैं, बाधाएँ हमें भावनात्मक बनाती है, नुक़सान से हम लाभ बनाना सीखते हैं, निराशाओं को अवसर में बदलना सीखते हैं और अंत में विचारों की बेचैनी के साथ रहने के स्थान पर हम, शांति के साथ रहना सीख जाते हैं। एक लाइन में कहा जाए तो दोस्तों राइट ऐटिटूड में हम हर उस चीज़ या बात से लाभ लेना सीख जाते हैं जो हमें नुक़सान पहुँचा सकता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर 

dreamsachieverspune@gmail.comपाएँ

1_edited_edited.jpg

Be the Best Student

Build rock solid attitude with other life skills.

05/09/21 - 11/09/21

Two Batches

Batch 1 - For all adults (18+ Yrs)

Batch 2 - For all minors (below 18 Yrs)

Duration - 14hrs (120m per day)

Investment -  Rs. 2500/-

DSC_5320_edited.jpg

MBA

( Maximize Business Achievement )

in 5 Days

30/08/21 - 03/09/21

Free Introductory briefing session

Batch 1 - For all adults

Duration - 7.5hrs (90m per day)

Investment - Rs. 7500/-

041_edited.jpg

Goal Setting

A proven, step-by-step workshop for setting and achieving goals.

01/10/21 - 04/10/21

Two Batches

Batch 1 - For all adults (18+ Yrs)

Batch 2 - Age group (13 to 18 Yrs)

Duration - 10hrs (60m per day)

Investment - Rs. 1300/-