फिर भी ज़िंदगी हसीन हैं...

स्व-प्रेरित (सेल्फ़ मोटिवेटेड) रहने के 10 तरीक़े - भाग 2

स्व-प्रेरित (सेल्फ़ मोटिवेटेड) रहने के 10 तरीक़े - भाग 2
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May 6, 2021
स्व-प्रेरित (सेल्फ़ मोटिवेटेड) रहने के 10 तरीक़े - भाग 2

दोस्तों आप निश्चित तौर पर मेरी इस बात से सहमत होंगे कि आज की विपरीत परिस्थितियों में खुद को सकारात्मक बनाए रखना आवश्यक भी है और मुश्किल भी। इस लक्ष्य को पाना स्व-प्रेरणा के बिना सम्भव ही नहीं है। कल हमने इस नकारात्मक माहौल में स्व-प्रेरित (सेल्फ़ मोटिवेटेड) रहने की 10 तकनीकों में से प्रथम 2 तकनीक सीखी थी। आईए एक बार उन्हें संक्षेप में दोहरा लेते हैं-

पहली तकनीक - सकारात्मकता के साथ जिएँ
सकारात्मक मानसिकता रखने के सर्वोत्तम तरीक़ों में से एक है सकारात्मकता में रहना, इसके लिए तीन मुख्य काम करें-
पहला - सबसे पहले स्वयं को नकारात्मक खबरों और उसके सोर्स से दूर कर लें।
दूसरा - छोटी-छोटी चीजों में आनंद को खोजें, बल्कि मैं तो यहाँ तक कहूँगा कि नकारात्मक घटनाओं में भी सकारात्मकता को देखें। छोटी-छोटी बातों या चीजों में आनंदित होने से आप तनाव और निराशा की भावनाओं को बहुत हद तक कम कर पाते हैं।
तीसरा - अपने सपनों, अपनी प्राथमिकताओं को अपने डर से ज़्यादा बड़ा बना लीजिए और याद रखिए जीवन में हम 90% उन बातों या घटनाओं से डरते हैं जो हमारे जीवन में कभी घटती ही नहीं है। अपनी जीने की इच्छा को मृत्यु के भय से ज़्यादा बड़ा बना लें। सकारात्मक सोच, सकारात्मक पुष्टि अर्थात् पॉज़िटिव अफ़र्मेशनस, बुरे में अच्छे को देखना, बड़े लक्ष्य और जीने की तीव्र इच्छा को बनाए रखना आपको कठिन चुनौतियों और नकारात्मक माहौल से निपटने की ऊर्जा देता है। 

दूसरी तकनीक - सकारात्मकता और अच्छी सोच वाले लोगों के बीच रहें
सकारात्मक और स्व-प्रेरित लोगों के बीच रहना आपको प्रेरणा देता है और आपको खुश और मन को हल्का बनाए रखने में मदद करता है।

चलिए दोस्तों सीखते हैं स्व-प्रेरित (सेल्फ़ मोटिवेटेड) रहने की अगली 5 तकनीकें-

तीसरी तकनीक - सीखते रहें
दोस्तों जब आपको किसी विषय का ज़रूरत से कम ज्ञान होता है तो यह आमतौर पर उलझन पैदा करता है। कम ज्ञान होना और अत्यधिक चिंता करना, आत्म-संदेह पैदा करता है और अगर इन सब नकारात्मक भाव के साथ ज़्यादा दिनों तक रहा जाए, तो यह इंसान को अवसाद ( डिप्रेशन ) जैसी गम्भीर स्थिति तक पहुँचा देता है।

इस नकारात्मक चक्र को तोड़ने का सर्वोत्तम तरीक़ा लगातार सीखना या अपना ज्ञान बढ़ाना है। जब आप किसी निश्चित विषय, कार्य, परियोजना के बारे में लगातार सीखते हैं तो आप अपने कौशल (स्किल) को बढ़ाते हैं और यह कौशल आपको आत्म-संदेह से बचाता है। जैसे आज से एक वर्ष पहले मुझे लिखना या बिना प्रतिभागियों (पार्टिसिपेंट) के कैमरे के सामने बोलना असम्भव सा लगता था। लेकिन जब इस विषय में सीखना शुरू किया तो आज ‘ज़िंदगी ज़िंदाबाद’ रेडियो शो को करते हुए मुझे 345 दिन हो गए हैं, लगभग 300 दिनों से मैं रोज़ ‘फिर भी ज़िंदगी हसीन है…’ लेख लिख रहा हूँ और 100 से ज़्यादा ट्रेनिंग विडियो रेकोर्ड कर चुका हूँ। इसलिए दोस्तों पढ़ना, सीखना और सवाल पूछना कभी बंद नहीं करना चाहिए, यह आपको नकारात्मकता से दूर रखते हुए शांत बनाता है।

चौथी तकनीक - एक ही विषय पर बहुत अधिक ना सोचें (ओवरथिंक ना करें)
जब आप किसी नए विषय, कठिन कार्य या नई परेशानियों का सामना करते हैं या किसी नई परियोजना पर विचार या कार्य करते हैं तो चिंता होना सामान्य है। चिंता आपको उस विषय में अधिक गम्भीरता से नई जानकारी लेने और सीखने में मदद करती है। लेकिन जब आप उस विषय या परियोजना की कार्य योजना पर सिर्फ़ विचार ही करते रहते हैं, कोई लिखित योजना या नोट्स नहीं बनाते हैं, तो यह विचार हमारी मानसिक शांति को भंग कर देता है और हम आमतौर पर देर रात तक सिर्फ़ उसी विषय में उलझे रहते हैं। ऐसा करना हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता और इसी वजह से हम अपनी ऊर्जा को बर्बाद कर देते हैं।

हमेशा हमारे साथ क्या बुरा या ग़लत हो सकता है, बल्कि सबसे बुरा क्या हो सकता है यह सोचने के बजाय, अपनी ऊर्जा को स्वयं को हर परिस्थिति के लिए तैयार करने वाले सशक्त सकारात्मक विचारों और कार्यों पर लगाएँ।

पाँचवी तकनीक - ख़ुशियों को चुनें
दोस्तों हम सुख, ख़ुशी और दुःख को एक विकल्प के रूप में देखना शुरू कर दें। हर मौक़े पर खुद से पूछें इस वक्त मैं इन दोनों अर्थात् सुख, ख़ुशी और दुःख में से किसे चुनना चाहूँगा। निश्चित तौर पर हम सब दुःख और परेशानियाँ को नहीं बल्कि सुखी और खुश रहना चुनेंगे।

सकारात्मक मानसिकता और बार-बार, हर परिस्थिति में सुखी और ख़ुश रहने के लिए 100% प्रतिबद्ध रहना हमारे मन को विपरीत परिस्थितियों और परेशानियों को चुनौती के रूप में लेना सिखाता है और चुनौतियों से लड़कर जीतना मानवीय स्वभाव है।

छठी तकनीक - वर्तमान में रहें
पुरानी कहावत को याद रखें, ‘अतीत के बारे में चिंता मत करो, यह चला गया है। भविष्य के बारे में तनाव न लें, यह अभी आया नहीं है। वर्तमान में जिएँ और उसे सुंदर बनाएँ।’ जो आप कर सकते थे, उन सभी चीजों के लिए पछतावा करना या भविष्य पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित करना आपके वर्तमान को बर्बाद कर देता है। भूतकाल और भविष्य के बारे में ज़्यादा सोचकर खुद को बीमार मानसिकता वाला ना बनाएँ। वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करना और अपने हर पल को 100% जीना आपको एहसास कराता है वास्तव में जीवन कितना सुंदर है!

सातवीं तकनीक - असफलता से ना डरें
कोई भी असफल नहीं होना चाहता लेकिन यह भी सही है कि असफलता या विपरीत परिस्थितियाँ आपको सबसे ज़्यादा सिखाती हैं। असफलता से डरें नहीं, बल्कि उससे सीखें। सीखने के बाद उस परिस्थिति को एक चुनौती के रूप में देखें और एक बार फिर से प्रयास करें, आप निश्चित तौर पर विजेता बनेंगे। याद रखिएगा दोस्तों अगर आप प्रयास करना बंद कर देते हैं तो आप वास्तव में विफल होते हैं।

दोस्तों आज के लिए इतना ही अभी तक हम सात तकनीकें सीख चुके हैं, कल हम अंतिम तीन तकनीकों को सीखेंगे। तब तक याद रखिएगा यह ज़िंदगी वैसी ही है जैसी हम इसे बनाते हैं।

-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर
dreamsachieverspune@gmail.com

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