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स्व-प्रेरित (सेल्फ़ मोटिवेटेड) रहने के 10 तरीक़े - भाग 3

स्व-प्रेरित (सेल्फ़ मोटिवेटेड) रहने के 10 तरीक़े - भाग 3
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May 7, 2021

स्व-प्रेरित (सेल्फ़ मोटिवेटेड) रहने के 10 तरीक़े - भाग 3


दोस्तों पिछले दो दिनों में हमने इस नकारात्मक माहौल में स्व-प्रेरित (सेल्फ़ मोटिवेटेड) रहने की 10 तकनीकों में से प्रथम 7 तकनीकें सीखी थी। आईए एक बार उन्हें संक्षेप में दोहरा लेते हैं-


पहली तकनीक - सकारात्मकता के साथ जिएँ

सकारात्मक मानसिकता रखने के सर्वोत्तम तरीक़ों में से एक है सकारात्मकता में रहना, इसके लिए तीन मुख्य काम करें-

पहला - सबसे पहले स्वयं को नकारात्मक खबरों और उसके सोर्स से दूर कर लें।

दूसरा - छोटी-छोटी चीजों में आनंद को खोजें, बल्कि मैं तो यहाँ तक कहूँगा कि नकारात्मक घटनाओं में भी सकारात्मकता को देखें। छोटी-छोटी बातों या चीजों में आनंदित होने से आप तनाव और निराशा की भावनाओं को बहुत हद तक कम कर पाते हैं।

तीसरा - अपने सपनों, अपनी प्राथमिकताओं को अपने डर से ज़्यादा बड़ा बना लीजिए। याद रखिए जीवन में हम 90% उन बातों या घटनाओं से डरते हैं जो हमारे जीवन में कभी घटती ही नहीं है। अपनी जीने की इच्छा को मृत्यु के भय से ज़्यादा बड़ा बना लें। सकारात्मक सोच, सकारात्मक पुष्टि अर्थात् पॉज़िटिव अफ़र्मेशनस, बुरे में अच्छे को देखना, बड़े लक्ष्य और जीने की तीव्र इच्छा को बनाए रखना, आपको कठिन चुनौतियों और नकारात्मक माहौल से निपटने की ऊर्जा देता है।


दूसरी तकनीक - सकारात्मकता और अच्छी सोच वाले लोगों के बीच रहें

सकारात्मक और स्व-प्रेरित लोगों के बीच रहना आपको प्रेरणा देता है और आपको खुश और मन को हल्का बनाए रखने में मदद करता है।


तीसरी तकनीक - सीखते रहें

ज्ञान की कमी उलझन पैदा करती है और यह उलझन चिंता में बदलकर आत्म-संदेह पैदा करती है। अगर ज़्यादा दिनों तक इन नकारात्मक भाव के साथ रहा जाए तो इंसान अवसाद ( डिप्रेशन ) में जा सकता है। इस नकारात्मक चक्र को तोड़ने का सर्वोत्तम तरीक़ा, लगातार सीखना या अपना ज्ञान बढ़ाना है। इसलिए दोस्तों पढ़ना, सीखना और सवाल पूछना कभी बंद नहीं करना चाहिए, यह आपको नकारात्मकता से दूर रखते हुए आत्म-संदेह से बचाकर शांत बनाता है।


चौथी तकनीक - एक ही विषय पर बहुत अधिक ना सोचें (ओवरथिंक ना करें)

नवीन कार्यों में चिंता होना स्वभाविक है लेकिन जब किसी विषय में सिर्फ़ विचार ही करते रहते हैं, कोई लिखित योजना या नोट्स नहीं बनाते हैं, तो यह विचार हमारी मानसिक शांति को भंग कर देता है और हम हमेशा हमारे साथ क्या बुरा या ग़लत हो सकता है इसी विचार में उलझे रहते हैं। ऐसे में हम अपनी ऊर्जा को बर्बाद कर, शारीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर अपना नुक़सान करते हैं। अपनी ऊर्जा को, स्वयं को हर परिस्थिति के लिए तैयार करने वाले सशक्त सकारात्मक विचारों और कार्यों पर लगाएँ।


पाँचवी तकनीक - ख़ुशियों को चुनें

सुख, ख़ुशी और दुःख को एक विकल्प के रूप में देखें और जब भी दुविधा में हों, तब इनमें से किसी एक को जागरूक रहते हुए चुनें। निश्चित तौर पर हम सब दुःख और परेशानियाँ को नहीं, बल्कि सुखी और खुश रहना चुनेंगे। सकारात्मक मानसिकता और बार-बार, हर परिस्थिति में सुखी और ख़ुश रहने के लिए 100% प्रतिबद्ध रहना हमारे मन को विपरीत परिस्थितियों और परेशानियों को चुनौती के रूप में लेना सिखाता है।


छठी तकनीक - वर्तमान में रहें

याद रखें, अतीत के बारे में चिंता मत करो, यह चला गया है। भविष्य के बारे में तनाव न लें, यह अभी आया नहीं है। वर्तमान में जिएँ और उसे सुंदर बनाएँ। हर पल को 100% जीना आपको एहसास कराता है वास्तव में जीवन कितना सुंदर है!


सातवीं तकनीक - असफलता से ना डरें

असफलता या विपरीत परिस्थितियों से डरें नहीं, बल्कि उससे सीखें और एक बार फिर से उसे चुनौती मानते हुए प्रयास करें, आप निश्चित तौर पर विजेता बनेंगे। जब आप प्रयास करना बंद करते हैं, तब आप वास्तव में विफल होते हैं।

चलिए दोस्तों सीखते हैं स्व-प्रेरित (सेल्फ़ मोटिवेटेड) रहने की अंतिम 3 तकनीकें-


आठवीं तकनीक - दूसरों को भी प्रेरित करें

जब भी आप अत्यधिक निराशा या नकारात्मक भाव के साथ हों तो इस जादुई तरीक़े को अपनाएँ; अपने आस-पास मौजूद जरूरतमंद लोगों को प्रेरित करें, उनकी मदद करें। यह ना सिर्फ़ उन्हें बल्कि आपके जीवन में भी आशा की किरण जगाकर, विश्वास जगाएगी कि अभी जीवन में बहुत कुछ है और अभी बहुत कुछ करना भी है।

निराशा इंसान को खत्म कर देती है। उससे बाहर आएँ, दोस्तों से मिलें, अपने विचार साझा करें, जिनके साथ अच्छा लगता है उनके साथ समय बिताएँ। ऐसा करना आपको सकारात्मक ऊर्जा वाले माहौल में रखेगा और आप प्रेरित महसूस करेंगे!


नवीं तकनीक - बहाने ना बनाएँ

रचनात्मकता (क्रीएटिविटी) और प्रतिबद्धता (कमिटमेंट) किसी भी इंसान को विजेता बना सकती है। इसके विपरीत बहाने बनाना आपकी रचनात्मकता (क्रीएटिविटी) को खत्म कर देता है। याद रखें, बहाने सिर्फ़ आलसी लोगों के लिए हैं। बहाने बनाना आपको अपने लक्ष्य से दूर कर देता है। स्वयं के प्रति सच्चे रहें और अपने लक्ष्य की दिशा में काम करते रहें।


दसवीं तकनीक - स्वयं को पुरस्कृत करें

सफलता पाने, स्वस्थ और खुश रहने के लिए आपको जीवन में कई बार उन कार्यों को करना पड़ता है, जो आपको पसंद नहीं होते। जैसे, व्यायाम या योग करना, रोज़ घूमने जाना, जंक की जगह स्वास्थ्यवर्धक भोजन करना आदि। लेकिन अक्सर हम अपने इन लक्ष्यों से भटक जाते हैं क्यूँकि यह लम्बे समय में परिणाम देते हैं।

ऐसे में अपनी लय बरकरार रखने के लिए, अपने लक्ष्यों को पाने के लिए, किए जाने वाले हर उस कार्य को जिसे आप पसंद नहीं करते, एक ऐसी गतिविधि (ऐक्टिविटी) या कार्य से जोड़ें जिसे आप बेहद पसंद करते हैं और जब भी आप उस लक्ष्य को सफलता पूर्वक पाएँ, उसका जश्न मनाएँ, उसके लिए खुद को पुरस्कृत करें।


दोस्तों इन विपरीत परिस्थितियों और नकारात्मक माहौल के बीच स्व-प्रेरित (सेल्फ़ मोटिवेटेड) रहने के लिए उपरोक्त 10 तकनीकों को काम में लें और अपने जीवन को 100% जिएँ। याद रखिएगा यह जीवन वैसा ही है जैसा आप इसे बनाते हैं।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

dreamsachieverspune@gmail.com

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