दैनिक भास्कर - मैनजमेंट फ़ंडा    
एन. रघुरामन, मैनजमेंट गुरु 

एक हाथ से सिर्फ चुटकी बजती है, ताली नहीं

एक हाथ से सिर्फ चुटकी बजती है, ताली नहीं
Bhaskar.png

Sep 6, 2021

एक हाथ से सिर्फ चुटकी बजती है, ताली नहीं


हमने पिछले हफ्ते पैरालिंपिक खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन अपने मोबाइल पर देखे। इसी बीच एक और वीडियो वायरल हुआ, जिसने मेरा ध्यान खींचा। यह वीडियो था उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के बहरामपुर इलाके की संध्या साहनी का।


इस वीडियो में कक्षा ग्यारहवीं की छात्रा और एक कारपेंटर की बेटी, 15 वर्षीय संध्या घर से स्कूल पहुंचने के लिए राप्ती नदी की डरावनी लहरों में 800 मीटर तक नाव चलाती दिख रही है। वह रोज ऐसे ही स्कूल जा रही है। उसका घर बाढ़ में डूबा हुआ है, इसलिए परिवार प्लास्टिक शीट के नीचे, छत पर रहने मजबूर है। सिर्फ उसका ही नहीं, कई घर डूबे हैं और लोग छत पर रह रहे हैं। जहां संध्या के साथी अपने माता-पिता की सुरक्षा में रह रहे हैं, वहीं वह राजघाट पहुंचने के लिए परिवार की नाव लेकर निकल जाती है, जैसे कोई शहरी लड़की अपने पिता की कार लेकर निकलती है। संध्या बैंक रोड स्थित अयोध्या दास गर्ल्स इंटर कॉलेज में पढ़ती है और वहां पहुंचने के लिए घाट से टेम्पो में बैठती है। इस लड़की का स्कूल यूनिफॉर्म में नाव चलाते हुए वीडियो वायरल होने पर उसके साहस और पढ़ाई के प्रति समर्पण की चहुंओर सराहना हो रही है।


शिक्षक दिवस मनाने के अगले दिन संध्या की कहानी से बेहतर मिसाल क्या हो सकती है। मुझे एक कारण बताएं कि एक छात्र का ऐसा समर्पण किसी शिक्षक को हर हालत में रोज स्कूल पहुंचने के लिए क्यों प्रेरित नहीं करेगा। जब मैंने उसका वीडियो अपने एक शिक्षक मित्र को भेजा तो उन्होंने कहा, ‘अगर मेरी कक्षा का एक भी छात्र ऐसा हो जाए तो मैं अपने काम से एक दिन भी छुट्‌टी न लूं।’ कितनी सच्ची बात है।


पिछले हफ्ते शनिवार तक मैं भोपाल के शिक्षण संस्थान, सेज ग्रुप के नए कॉलेज छात्रों के प्री-ओरिएंटेशन कार्यक्रम में सैकड़ों छात्रों को संबोधित करने में व्यस्त रहा। इनमें से कुछ को वैक्सीन लगी थी, कुछ को नहीं क्योंकि वे 18 वर्ष के नहीं हुए थे। ज्यादातर छात्र कोविड के समय में आने-जाने को लेकर चिंतित थे। यकीन मानिए अगर आपमें संध्या जैसी इच्छाशक्ति है तो समस्याओं का समाधान निकाल ही लेंगे।


उसने समाधान निकाला क्योंकि उसने पहले ही जिंदगी का लक्ष्य तय कर लिया कि उसे अपने माता-पिता और भाई-बहन को अच्छी जिंदगी देनी है। और वह जानती है कि यह अच्छे से पढ़ाई कर हासिल किया जा सकता है। स्थानीय मीडिया से उसने कहा, ‘मेरा स्कूल कोविड-19 लॉकडाउन के कारण लंबे समय से बंद था और अब हम राप्ती नदी में बाढ़ की चुनौती का सामना कर रहे हैं। मैं अपनी कक्षाएं और नहीं छोड़ना चाहती क्योंकि मैं कोई ट्यूशन नहीं लेती। मैं पढ़ाई के लिए पूरी तरह स्कूल पर निर्भर हूं।’ संध्या सरोजिनी नायडू, इंदिरा गांधी, कल्पना चावला और पीटी ऊषा जैसी महिलाओं से प्रेरित है।


अगर आपकी कोई महत्वाकांक्षा या इच्छा है और वह पूरी नहीं हो रही तो उसका सबसे पहला कारण होगा कि आपके मन में उसके प्रति दुविधा है। यानी आपको उस चीज की इच्छा है भी और नहीं भी। इसलिए या तो इच्छा छोड़ दें या उसके खिलाफ सोचना। और आप देखेंगे आपकी गति पूरी तरह बदल जाएगी। बेशक कोविड ने हमारी गति प्रभावित की है लेकिन हमारा दृढ़निश्चय और कर्म मिलकर इसपर जीत हासिल कर लेंगे।


फंडा यह है कि आप एक हाथ से ताली नहीं बजा सकते, सिर्फ चुटकी बजा सकते हैं और निश्चिततौर पर यह कम से कम अच्छी ध्वनि पैदा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

1_edited_edited.jpg

Be the Best Student

Build rock solid attitude with other life skills.

05/09/21 - 11/09/21

Two Batches

Batch 1 - For all adults (18+ Yrs)

Batch 2 - For all minors (below 18 Yrs)

Duration - 14hrs (120m per day)

Investment -  Rs. 2500/-

DSC_5320_edited.jpg

MBA

( Maximize Business Achievement )

in 5 Days

30/08/21 - 03/09/21

Free Introductory briefing session

Batch 1 - For all adults

Duration - 7.5hrs (90m per day)

Investment - Rs. 7500/-

041_edited.jpg

Goal Setting

A proven, step-by-step workshop for setting and achieving goals.

01/10/21 - 04/10/21

Two Batches

Batch 1 - For all adults (18+ Yrs)

Batch 2 - Age group (13 to 18 Yrs)

Duration - 10hrs (60m per day)

Investment - Rs. 1300/-