दैनिक भास्कर - मैनजमेंट फ़ंडा    
एन. रघुरामन, मैनजमेंट गुरु 

कुछ छोड़ना भी देने जैसा ही है

कुछ छोड़ना भी देने जैसा ही है
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Oct 2, 2021

कुछ छोड़ना भी देने जैसा ही है


ज़रा देखिए, बर्गर के बाज़ार में क्या हो रहा है। पिछले हफ्ते मिडलैंड सिटी, अल्बामा, अमेरिका के रेस्त्रां में नया बर्गर दिखा, जो न शाकाहारी है, न मांसाहारी। आपने सही पढ़ा। वह वीगन है! यह अक्टूबर से अमेरिका के चुनिंदा 250 रेस्त्रां में मिलने लगेगा और धीरे-धीरे 2022 तक यूके के हर रेस्त्रां में उपलब्ध होगा। जी हां, तीन साल के शोध व विकास के बाद मैक्डॉनल्ड ने प्लांट-बेस्ड (पौधों पर आधारित) फास्ट-फूड की जंग छेड़ दी है।


इस प्लांट-बेस्ड पैटीस को कंपनी ने एक अन्य अमेरिकी कंपनी ‘बियॉन्ड मीट’ के साथ बनाया है, जिसे वीगन बन और चीज़ के साथ अलग ग्रिल और बर्तनों में पकाया जाएगा। मैक्डॉनल्ड भले ही वीगन की दौड़ में देर से आया, लेकिन बड़े स्तर के कारण लोग देरी को भूल जाएंगे। हालांकि वीगन मैक्डिपर्स उनके मेन्यू में कुछ समय से थे, लेकिन यह कंपनी का पहला वीगन सैंडविच है।


ज्यादातर लोग जानते हैं कि अच्छे स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए कम मांस खाना चाहिए, लेकिन ज्यादातर बर्गर कंपनियां भी समझ गई हैं कि उन्हें ‘फ्लेक्सिटेरियन’ आंदोलन के साथ चलना होगा, जिसका उद्देश्य लोगों को प्लांट-बेस्ड खाने के लाभ बताना और कम मात्रा में मांसाहार के साथ मांस उत्पादों के विकल्पों के प्रति जागरूक करना है। कुछ चीजों को ही खाते रहने या बिल्कुल न खाने वाले तरीकों पर आधारित डाइट की बजाय फ्लेक्सिटेरियन डाइट में छोटे-छोटे बदलाव लाते हैं, जिनका बड़ा असर होता है।


अमेरिका के नॉर्दर्न आइलैंड में मैक्डॉनल्ड के एक टेस्टिंग पैनल में कुछ प्रतिभागियों ने पूछा, ‘क्या उन्हें गलती से मांसाहारी बर्गर दे दिया है?’ तब कंपनी को लगा कि उन्होंने सही वीगन उत्पाद बना लिया है, जिसका स्वाद मांस जैसा ही है। ‘मैक्प्लांट’ नया वीगन बर्गर है, जो मटर, बीन्स और चावल से बना है और मांस वाले बर्गर जैसे स्वाद वाला है। फूड क्रिटिक्स कह रहे हैं, ‘यह हैरतअंगेज़ है।’


जहां दुनिया धीरे-धीरे फ्लेक्सिटेरियन डाइट की ओर जा रही है, इस साल लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़े बताते हैं कि कैसे सीफूड (मछली आदि) भारतीयों के मुंह में पानी ला रहा है। यकीन नहीं होता न! अपनी शाकाहारी पसंद के लिए पहचाना जाने वाला और दुनिया को बिना प्याज-लहसुन वाला खाना देने वाला राज्य सबसे ज्यादा मछली खाने वाले राज्यों में शामिल हो गया है। जी हां, गुजरात में मछली की प्रति व्यक्ति खपत, सालाना 8.37 किग्रा है, जबकि राष्ट्रीय औसत 6.46 किग्रा प्रति व्यक्ति है। हैरानी है कि इसके पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में यह आंकड़ा सिर्फ 2.9 किग्रा प्रति व्यक्ति है। कोई कह सकता है कि उच्च कैश फ्लो (धनापूर्ति) लोगों को अपनी डाइट चुनने की ज्यादा आजादी दे रहा है। लेकिन मेरा तर्क है कि अमेरिका अमीर देश है, फिर भी वह धरती के हित में और मोटापा कम करने के लिए वीगन की ओर छोटे-छोटे कदम बढ़ा रहा है।


आज ‘दान उत्सव’ या ‘जॉय ऑफ गिविंग’ सप्ताह भी शुरू हो रहा है, जो हर वर्ष गांधी जयंती के दिन, 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक मनाया जाता है। इस हफ्ते में हर व्यक्ति को कुछ देने के लिए प्रेरित किया जाता है, फिर वह समय हो, पैसा, संसाधन या कौशल। अगर आप कुछ दे नहीं सकते, तो चिंता न करें, बस कुछ छोड़ दें या फ्लेक्सिटेरियन बन जाएं। यह भी देने का ही भाव है!


फंडा यह है कि मांस ‘छोड़ देने’ को भी ‘जॉय ऑफ गिविंग’ माना जाएगा क्योंकि एक जिंदगी मुस्कुराएगी और बेशक राष्ट्रपिता भी आशीर्वाद देंगे क्योंकि उन्होंने अहिंसा का सिर्फ ज्ञान नहीं दिया, उसे जीवन में उतारा भी था।

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