दैनिक भास्कर - मैनजमेंट फ़ंडा    
एन. रघुरामन, मैनजमेंट गुरु 

जब तक विज्ञान गारंटी न दे, मास्क पहनते रहें

जब तक विज्ञान गारंटी न दे, मास्क पहनते रहें
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July 13, 2021

जब तक विज्ञान गारंटी न दे, मास्क पहनते रहें


मैंने कई बार हवाईजहाज में अच्छे-बुरे व्यवहारों पर लिखा है। मेरे किस्सों के हमेशा दो पहलू होते हैं। लेकन शुक्रवार की मेरी फ्लाइट में जो हुआ उसका एक ही पहलू है। इसलिए इसे टिप्पणी कह सकते हैं।


वर्ष 2020 ‘रिवेंज शॉपिंग’ का साल था, जहां घर में फंसे लोगों ने जमकर शॉपिंग की। यह साल लगता है ‘यात्रा से बदले’ का साल है। हिल स्टेशनों पर लोग झुंड में पहुंच रहे हैं और प्लेन से रिश्तेदारों से मिलने जा रहे हैं क्योंकि उन्होंने 16-18 महीने से कहीं यात्रा नहीं की। जहां बिजनेसमैन व्यापार बढ़ने से खुश हैं, वहीं सरकारी अधिकारी चिंतित हैं कि कोविड प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ रही हैं। किसी शहर की सड़कों पर ही नहीं, यह लापरवाही हवाईजहाजों में भी दिख रही है, जहां निगरानी ज्यादा होती है।


जिन्होंने महामारी के बाद से हवाई यात्रा नहीं की है, उन्हें बता दें कि जिस एयरपोर्ट से बैठते हैं, वहां से उतरने वाले एयरपोर्ट तक, पूरी प्लाइट के दौरान मास्क जरूरी है। वरना आपको ‘उद्दंड यात्री’ मानकर उतरने कहा जाएगा। साथ ही आप पर एयरलाइंस आजीवन प्रतिबंध भी लगा सकती है।


यकीन मानिए यहां किसी अस्पताल की तरह नर्स नहीं हैं, जो गलियारे में घूम-घूमकर मास्क की अनिवार्यता पर जोर देती रहें। यहां एयरहोस्टेज हैं, जिन्हें बार-बार मास्क के लिए आपको टोकना उतना ही नापसंद है, जितना आपको मास्क पहनना।


कुछ यात्री नियम जानने के बावजूद मास्क हटाते रहते हैं। वे पानी पीने के बहाने इसे हटाते हैं, फिर यूं दर्शाते हैं, जैसे वापस पहनना भूल गए। कई बार सख्त सहयात्रियों और एयरहोस्टेज के टोकने के बाद वे मास्क वापस लगाते हैं। इस पर भी चिल्लाते हुए कुतर्क करते हैं कि मास्क कोविड से नहीं बचा सकता।


वे नहीं समझते कि क्यों कुछ लोग कोविड-19 के कारण अस्पताल जाकर संघर्ष करते हैं? पिछले गुरुवार जर्नल नेचर में प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के मुताबिक जेनेटिक कारण किसी कोविड संक्रमित व्यक्ति की हालत गंभीर होने की आशंका बढ़ा सकते हैं।

शोधकर्ता जानते हैं कि वे इस भयानक राक्षस को अकेले नहीं संभाल सकते। इसलिए दुनियाभर के शोधकर्ता साथ आए। फिर इन जेनेटिक खोजियों ने 19 देशों के 50,000 कोविड पॉजिटिव लोगों का डेटा खंगाला और उसकी तुलना 20 लाख गैर-संक्रमित लोगों से की। सिद्धांत को 3300 सह-लेखकों ने मिलकर लिखा और इंसानी जिनोम में 13 ऐसे बिंदु बताए जो गंभीर बीमारी से जुड़े हैं। उन्हें महसूस हुआ कि टीकाकरण लोगों की सुरक्षा करता है, लेकिन डॉक्टरों को अब भी संक्रमितों के इलाज के लिए बेहतर दवाओं की जरूरत है। अगर गंभीर रूप से संक्रमित लोगों के इलाज की और उन्हें अस्पताल से निकालने की व्यवस्था होगी तो जनस्वास्थ्य की स्थिति बदल जाएगी। उन्हें यूरोपियन वंशों की तुलना में, पूर्वी और दक्षिण एशियाई वंशावली में ज्यादा विविधता मिली।


इंस्टीट्यूट फॉर मॉलीक्यूलर मेडीसिन, फिनलैंड के निदेशक मार्क डाली ने यह अध्ययन शुरू करने में मदद की। वे स्वीकारते हैं कि ‘कोविड-19 चिंताजनक है और उम्मीद है कि अगले साल तक इलाज संबंधी अच्छी और ठोस अवधारणाएं आ जाएंगी।’


डब्ल्यूएचओ में स्वास्थ्य आपातकाल कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक डॉ माइक रियान मानते हैं कि ‘डेल्टा जैसे नए वैरिएंट तेज, चुस्त हैं, और पिछले वैरिएंट्स की तुलना में ज्यादा बेहतर ढंग से असुरक्षित लोगों को जकड़ रहे हैं।’


यह निश्चिततौर पर अपनी सुरक्षा हटाने का समय नहीं है, खासतौर पर जब तीसरी लहर की आशंका हो।


फंडा यह है कि जब तक विज्ञान सुरक्षा की गारंटी नहीं देता, हमें अपनी सुरक्षा के लिए मास्क पहनना ही पड़ेगा।

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