दैनिक भास्कर - मैनजमेंट फ़ंडा    
एन. रघुरामन, मैनजमेंट गुरु 

जान बचाना पूरी मानव जाति को गौरवान्वित करता है

जान बचाना पूरी मानव जाति को गौरवान्वित करता है
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April 21, 2021

जान बचाना पूरी मानव जाति को गौरवान्वित करता है


सोमवार को मेरे फोन पर जब वह वॉट्सएप आया, तो लगा जैसे किसी सुपरहीरो फिल्म का दृश्य हो। विश्वास नहीं हो रहा था कि वह वास्तविक है। छह वर्षीय साहिल अर्जुन शिरसट और उसकी 35 वर्षीय दृष्टिहीन मां संगीता प्लेटफॉर्म पर चल रहे थे कि अचानक साहिल पटरियों पर गिर गया। संगीता देख नहीं सकती थी, पर तेजी से करीब आती ट्रेन की थरथराहट महसूस कर सकती थी। वह अनहोनी के भय से मदद के लिए चीखी। तभी वहां कहीं से एक रक्षक आया, उसने बच्चे को प्लेटफॉर्म पर चढ़ाया और खुद भी तुरंत उसके ऊपर चढ़ गया। उसके चढ़ते ही ट्रेन मानो उसे छूकर निकल गई। कुछ पल की देरी अनहोनी का कारण बन सकती थी। बदहवास मां ने टटोलकर बेटे को छूना चाहा। रक्षक हटा तो मां ने बच्चे को महसूस किया। फिर उसे यूं गले लगाया, जैसे अब कभी दूर नहीं होने देगी। हम मां और उस रक्षक के डर की कल्पना ही कर सकते हैं। यह रक्षक था 30 वर्षीय पॉइंट्समैन मयूर सखाराम शेलके, जो उसी स्टेशन पर काम करता है।


उस पल मयूर ने दृष्टिहीन मां का आभार जीत लिया, जो बेटे को गले लगाए हुए, आंसुओं से कृतज्ञता व्यक्त कर रही थी। स्टेशन के सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए इस घटनाक्रम को रेल मंत्री पीयूष गोयल तक पहुंचने में दो दिन लगे, जिन्होंने फोन पर मयूर को उसके अच्छे काम के लिए बधाई दी। गोयल ने कहा, ‘उसे बधाई देने के लिए पर्याप्त शब्द नहीं हैं।’ सोमवार को जब मयूर अपने स्टेशन से 130 किमी दूर डिविजनल रेलवे मैनेजर के कार्यालय पहुंचा, तो सभी रेलवे कर्मचारियों ने तालियों से उसका स्वागत किया। एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट ने उसकी सतर्कता और साहस के लिए उसे 50 हजार रुपए देने की घोषणा की है। रेलवे भी अपना योगदान देगा। लेकिन याद रखें, मयूर के साहसिक कारनामे के आगे यह सब कुछ नहीं है।


मुझे ऐसा ही अहसास तब हुआ जब दिल्ली में इस रविवार एडिशनल डीसीपी सुधांशु धामा ने निहाल विहार पुलिस स्टेशन के एसएचओ को नांगलोई स्थिति मनसा राम हॉस्पिटल तक ऑक्सीजन पहुंचाने की जिम्मेदारी दी। पुलिस वालों को जब पता चला कि 35 मरीजों की जिंदगी खतरे में, तो उन्होंने 20 सिलेंडर की व्यवस्था की और कुछ ही समय में हॉस्पिटल पहुंचा दिए। हॉस्पिटल के डायरेक्टर और मरीजों के संबंधियों के पास उन्हें धन्यवाद कहने के लिए शब्द नहीं थे।


ऐसी कई दिल छूने वाली घटनाएं जरूरत के इस समय में सुनने मिल रही हैं। दिल्ली की ही एक और घटना में भारत नगर पुलिस स्टेशन के एसएचओ मोहर सिंह ने भोपाल निवासी व्यक्ति को रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध कराए। 67 वर्षीय मरीज के रिश्तेदार ने सिंह को जानकारी दी कि वे दवा की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। एसएचओ ने तुंरत इंजेक्शन की पांच शीशियों की व्यवस्था कर उन्हें हवाईमार्ग से भोपाल पहुंचाया। मरीज की हालत अब स्थिर बताई जा रही है। एक और दिल्लीवासी गौरव बग्गा ने कालकाजी पुलिस स्टेशन से मरीज के लिए ऑक्सीजन के लिए संपर्क किया और तुरंत मदद पाई।

नई दिल्ली की न्यू फ्रेंडस् कॉलोनी के बीट ऑफिसर देवेंदर, दिल्ली विश्वविद्यालय की रिटायर्ड इंग्लिश लिटरेचर की प्रोफेसर के लिए रक्षक बन गए, जो अपनी दवाएं लाने में सक्षम नहीं थीं। देवेंदर ने एक घंटे में दवाएं दे दीं। इसी तरह एक कॉन्सटेबल बाबूलाल ने न सिर्फ 85 वर्षीय सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी को अस्पताल पहुंचने के लिए आने-जाने का पास जारी किया, बल्कि पास घर तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की।


फंडा यह है कि दयालुता का हर काम, जो किसी की जान बचाता है, वह एक इंसान का दूसरे इंसान के लिए सर्वोत्तम अच्छा कार्य है। उसपर पूरी मानवता को गर्व होता है।

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